कान्हा टाइगर रिजर्व से एक नर बाघ को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) ट्रांसफर किया गया। यह वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। पूरी प्रक्रिया रविवार को विशेषज्ञों की निगरानी में सभी मानकों के अनुसार पूरी की गई। ढाई साल पहले हुआ था रेस्क्यू इस नर बाघ को ढाई वर्ष पहले पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ क्षेत्र, सिवनी से रेस्क्यू किया गया था। उस समय इसकी उम्र केवल 4 से 5 माह थी। रेस्क्यू के बाद इसे कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़े में रखा गया। वहां वैज्ञानिक तरीके से उसका पालन-पोषण किया गया और उसे प्राकृतिक शिकार व स्वतंत्र विचरण के लिए प्रशिक्षित किया गया। स्वस्थ और तैयार बाघ को छोड़ा वर्तमान में बाघ की उम्र लगभग 33 से 35 माह है। मेडिकल चेकअप में वह पूर्ण रूप से स्वस्थ पाया गया और जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए सक्षम है। विशेषज्ञों ने ऐसे क्षेत्र में बाघ को छोड़ने की सलाह दी जहाँ बाघों का घनत्व कम हो और पर्याप्त प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो। इसी आधार पर नौरादेही टाइगर रिजर्व को उपयुक्त माना गया। सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाया ट्रांसफर से पहले वन्यप्राणी चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने बाघ को निश्चेत कर सभी जैविक मापदंड दर्ज किए। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 11(1)(ए) के तहत अनुमति लेने के बाद बाघ को सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाया गया। इससे उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। विशेषज्ञ और अधिकारी रहे मौजूद यह पूरी कार्रवाई कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रवीन्द्र मणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। ट्रांसफर प्रक्रिया में उप संचालक (कोर) पुनीत गोयल, उप संचालक (बफर) अमीथा के.बी., वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल और राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर के डॉ. अनिरुद्ध मजूमदार सहित अन्य विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने बताया- नौरादेही टाइगर रिजर्व में उपलब्ध प्राकृतिक और अनुकूल आवास बाघ के दीर्घकालीन संरक्षण में सहायक होगा और वह यहां स्वाभाविक रूप से स्वतंत्र विचरण कर सकेगा।


