‘सकारात्मक और नकारात्मक विचारों के बीच संतुलन बनाकर मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखें’

‘सकारात्मक और नकारात्मक विचारों के बीच संतुलन बनाकर मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखें’

अजमेर (Ajmernews). हार्टफुलनेस संस्थान के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल (दाजी) ने शुक्रवार शाम मेडिकल कॉलेेज के सभागार मेें हृदय आधारित ध्यान योग का अनुभव कराया। सभागार भरने के पश्चात व्यवस्था के लिए बाहर लागाई कुर्सियां भी कम पड़ी। अभ्यासियों ने सीढ़ियों पर बैठकर ध्यान किया। ध्यान सत्र में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, समाजसेवी भंवर सिंह पलाड़ा, अतिरिक्त जिला कलक्टर ज्योति ककवानी आदि ने हिस्सा लिया।

नकारात्मकता बहुत शक्तिशाली

ध्यान सत्र में पूज्य दाजी ने मनुष्य के मस्तिष्क में सकारात्मक और नकारात्मक विचारों के द्वंद्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैसे नींबू की कुछ बूंदें दूध को फाड़ देती हैं, ठीक वैसे ही नकारात्मकता बहुत शक्तिशाली होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक महकते कमरे में खुशबूदार फूलों की महक को एक मछली की गंध दुर्गन्ध में बदल देती है। नकारात्मक विचारों का असर हमारे जीवन पर गहरा पड़ता है। यह हमारी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को हानि पहुंचाता है।

मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना चाहिए

उन्होंने कहा कि किसी व्यापारी को अगर यह कहा जाए कि शनि आड़े आ रहा है, तो उसकी पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में ज्योतिष और धार्मिक पूजा का असर कम होता है, लेकिन वहां की सफलता का एक महत्वपूर्ण कारण आशावादी दृष्टिकोण है। आशावादी होना मानसिक शांति प्रदान करता है और नकारात्मक विचारों से ऊर्जा की हानि को कम करता है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक और नकारात्मक विचारों के बीच संतुलन बनाकर हमें अपने मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना चाहिए।

अधिक विचारों के साथ कार्य करने से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित

उन्होंने अपने दादागुरु शाहजहांपुर के बाबूजी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि बाबूजी ने एक बार सर्दियों में शाहजहांपुर में कहा कि सोचो पानी का स्रोत बह रहा है। इसमें से एक पाइपलाइन निकालते हैं फिर दूसरी और इसी प्रकार जितनी पाइपलाइन निकालेंगे जलस्रोत कि शक्ति कम होती जाएगी। यही बात हमारे विचारों के साथ है। अधिक विचारों के साथ कार्य करने से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होगी।

सकारात्मकता की ओर अग्रसर करता है ध्यान

उन्होंने ध्यान के मेडिकल फायदों की चर्चा करते हुए बताया कि ध्यान करने से शरीर के तीन प्रमुख कोशिकीय प्रक्रियाएं ऑक्सीकरण, फॉस्फोरिलेशन और मेथिलेशन 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो जाती हैं, जिससे शरीर में होने वाली क्षति की गति धीमी होती है। इसके साथ ही ध्यान से टेलोमीयर की लंबाई बढ़ जाती है, जो उम्र के प्रभाव को कम करने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि ध्यान हमें सकारात्मकता की ओर अग्रसर करता है।

पुण्य आत्माओं के जन्म के लिए सात्विकता का पालन जरूरी

हार्टफुलनेस की सफाई प्रक्रिया को एक शक्ति के रूप में बताया जो नकारात्मकता को दूर करती है और हमें ईश्वर से जुड़ने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि पुण्य आत्माओं के जन्म के लिए सात्विकता का पालन जरूरी है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए बताया कि मनोभाव के अनुसार ही संतान का जन्म होता है और सात्विकता से पुण्य आत्माएं जन्म लेती हैं। उन्होंने गीता के 10वें अध्याय के 20वें श्लोक का हवाला देते हुए कहा कि भगवान हर व्यक्ति के हृदय में निवास करते हैं। उनका असली रूप केवल हृदय से ही पहचाना जा सकता है।

ध्यान ईश्वर के साथ संबंधों को सशक्त करता है

उन्होंने संदेश दिया कि ध्यान केवल शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की ओर नहीं, बल्कि यह ईश्वर के साथ हमारे संबंधों को भी सशक्त करता है। हार्टफुलनैस के कार्यक्रम समन्वयक सेवानिवृत्त आईएएस के. के. शर्मा ने बताया कि पद्मभूषण से सम्मानित कमलेश डी. पटेल (दाजी) ने अजमेर प्रवास के दौरान ध्यान कराया। शनिवार सुबह 7 बजे भी ध्यान सत्र आयोजित होगा।

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