गुना शहर में शनिवार को ईद-उल-फितर का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शुक्रवार को चांद का दीदार होने के बाद सुबह 7:30 बजे से ही ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज का सिलसिला शुरू हो गया। बड़ी ईदगाह में सुबह 9:30 बजे मुख्य नमाज अदा की गई, जिसके बाद मुस्लिम धर्मावलंबियों ने देश और प्रदेश की खुशहाली व अमन-चैन के लिए सामूहिक रूप से दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और घर के बड़ों ने बच्चों को ईदी बांटी। प्रशासन द्वारा जिले में शांति व्यवस्था और नमाज के लिए सभी जगह विशेष प्रबंध किए गए थे। कैंट मस्जिद और हड्डी मील सहित एक दर्जन जगह हुई नमाज शहर में लगभग एक दर्जन जगह ईद की नमाज अता की गई। कैंट मस्जिद, ईदगाह बाड़ी स्थित बड़ी ईदगाह और हड्डी मील में बड़े स्तर पर नमाज हुई, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के नागरिकों ने पहुंचकर नमाज अता की। बड़ी ईदगाह पर सुन्नी मस्जिद के इमाम ने ईद की नमाज अता करवाई और तकरीरें सुनाईं। खुशियां बांटने और दान करने का पर्व है ईद-उल-फितर अरबी भाषा के शब्द ‘ईद-उल-फितर’ में ‘ईद’ का तात्पर्य खुशी और ‘फितर’ का अभिप्राय दान से है। ईद ऐसा दान-पर्व है, जिसमें खुशी बांटी जाती है और जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं उन्हें फितरा (दान) दिया जाता है। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का 9वां माह है, जिसे इबादत का सर्वश्रेष्ठ महीना कहा गया है। इसमें सभी मुस्लिम रोजे रखते हैं और इसके पूरे होने की खुशी में ईद मनाई जाती है। बुखारी शरीफ की हदीस नं. 1793 के मुताबिक़, सन् 2 हिजरी (1448 वर्ष पूर्व) पैग़म्बर मोहम्मद ने अपनी उम्मत (प्रजा) से कहा था कि अल्लाह का हुक़्म हुआ है कि रोज़े रखे जाएं। 30 दिन भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत के साथ नेक काम करने का इनाम ही ईद का त्योहार है। कुरान और हदीस के अनुसार ये हैं ईद के खास नियम गरीबों को जमा-पूंजी का 2.5% दें: उमदतुल क़ारी हदीस में आया है कि ज़कात सन 4 हिजरी में फ़र्ज़ की गई। अपनी जमा-पूंजी का 2.5% गरीब को देना जरूरी है और इसे ईद से पहले देना होता है। कुरान में सूरे बक़रा सूरत नं. 2 आयत नं. 43 में इसका जिक्र है। एक दिन के बच्चे के नाम भी देना है अनाज: बुख़ारी शरीफ़ हदीस नं. 1503 के अनुसार गरीबों को फितरा दें। फितरा एक निश्चित वजन में अनाज या उसकी मौजूदा कीमत के बराबर पैसा हर व्यक्ति को देना होता है। एक दिन के बच्चे का भी फितरा पिता को निकालना पड़ता है। अच्छे कपड़े पहनो, दूसरों को भी दो: पैग़म्बर मोहम्मद ईद पर अच्छे कपड़े पहनते और दूसरों को भी अच्छा लिबास पहनने काे कहते थे। मिशकात शरीफ़ हदीस नं. 1428 के अनुसार मोहम्मद साहब ने कहा है कि ईद के दिन गरीबों को लिबास और ज़रूरत की चीज़ों का सदक़ा करें। काम करने वालों का सम्मान करें: मिशकात शरीफ़ हदीस नं. 1432 के अनुसार पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद ने फ़रमाया है कि ईद सबकी है। इसलिए अपने मुलाजिमों के साथ भी अच्छा व्यवहार करें। इस्लाम में मुलाजिमों की जरूरतों का ध्यान रखने का कहा गया है।


