बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि महोत्सव:पहले दिन हल्दी रस्म, भक्तों ने बाबा को लगाई हल्दी, भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए सभी

बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि महोत्सव:पहले दिन हल्दी रस्म, भक्तों ने बाबा को लगाई हल्दी, भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए सभी

छत्तीसगढ़ के धमतरी स्थित प्राचीन बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि महोत्सव का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। देर रात से शुरू हुए इस महोत्सव के पहले दिन हल्दी की रस्म निभाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर मंदिर में शिव नवरात्रि का भी आयोजन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में विवाह के दौरान हल्दी चढ़ाने की परंपरा की तर्ज पर, बूढ़ेश्वर महादेव को हल्दी अर्पित करने के लिए बाजे-गाजे के साथ हल्दी मंदिर लाई गई। गर्भ गृह में हल्दी रखकर पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद इसे बूढ़ेश्वर महादेव को लगाया गया। इसके बाद बूढ़ेश्वर महादेव की आरती की गई। इस आरती में धमतरी ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी भक्तगण उपस्थित हुए। सभी ने ढोल-बाजे के साथ महादेव की आरती की और भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए। पहले दिन देर रात संपन्न हुई हल्दी की रस्म महाशिवरात्रि महोत्सव 11 फरवरी की रात से शुरू होकर 15 फरवरी को महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस दौरान प्रत्येक दिन अलग-अलग धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। पहले दिन देर रात हल्दी की रस्म संपन्न हुई और बाबा की आरती उतारी गई। आरती के बाद, उपस्थित भक्तों ने अपने साथ लाई हुई हल्दी को बारी-बारी से बूढ़ेश्वर महादेव को अर्पित किया। इसके बाद सभी भक्तों ने बाहर निकलकर एक-दूसरे को हल्दी लगाकर बधाई दी। भक्तों ने बताया अनुभव को अविस्मरणीय भक्तों ने बताया कि बूढ़ेश्वर महादेव को हल्दी लगाकर उन्हें अत्यंत सुखद अनुभव हुआ, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि वे हर साल महाशिवरात्रि पर्व पर हल्दी लेकर बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर पहुंचते हैं और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। 1400 साल प्राचीन है बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं ने बताया कि बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर लगभग 1400 वर्ष प्राचीन है और इसकी मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है। इस दौरान, छत्तीसगढ़ी पारंपरिक विवाह गीतों पर आधारित भजनों का गायन किया गया, जिस पर सभी श्रद्धालु अपने-अपने स्थान पर झूम उठे।

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