महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय को लगे विकास के पर

महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय को लगे विकास के पर

उज्जैन। महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय को मध्यप्रदेश शासन द्वारा वार्षिक अनुदान में महत्वपूर्ण वृद्धि प्रदान की गई है। पहले जहां विश्वविद्यालय को लगभग 5 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त होता था, वहीं अब इसमें लगभग 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि की गई है। इस प्रकार कुल अनुदान में यह उल्लेखनीय विस्तार विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति और शासन के विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। इस निर्णय से विश्वविद्यालय के विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

कुलगुरु के नेतृत्व में मिली नई पहचान

विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि का श्रेय कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र के दूरदर्शी नेतृत्व, सतत प्रयासों और प्रभावी प्रशासनिक समन्वय को दिया जा रहा है। मात्र छह माह के अल्प समय में उनके कुशल मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध गतिविधियों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित नवाचारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। कुलगुरु प्रो. मिश्र ने अनुदान वृद्धि के लिए मध्यप्रदेश शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के प्रति शासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

अधोसंरचना और शोध गतिविधियों को मिलेगा प्रोत्साहन

कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा 12-बी की मान्यता प्राप्त करने हेतु आवश्यक औपचारिकताएं और प्रयास तेजी से जारी हैं। 12-बी की मान्यता प्राप्त होने पर विश्वविद्यालय को केंद्रीय योजनाओं और अनुसंधान अनुदानों का लाभ मिल सकेगा, जिससे शोध और अधोसंरचना विकास को नई दिशा मिलेगी। अतिरिक्त अनुदान का उपयोग शैक्षणिक रिक्त पदों पर नियुक्तियां, आधुनिक शोध केंद्रों की स्थापना, डिजिटल ग्रंथालय विस्तार, पांडुलिपि संरक्षण, स्मार्ट कक्षाओं के विकास तथा योग एवं वैदिक अध्ययन के अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रमों के विस्तार में किया जाएगा। विश्वविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि को कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र के सशक्त नेतृत्व और दूरदर्शी सोच का परिणाम बताते हुए उनका अभिनंदन किया।

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