महाराष्ट्र में आज परिवहन सेवाएं बड़े पैमाने पर प्रभावित हो सकती हैं। राज्यभर के परिवहन संगठनों ने गुरुवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। इस आंदोलन के तहत करीब 1 लाख ड्राइवर और वाहन मालिक मुंबई के आज़ाद मैदान में एकत्रित होकर प्रदर्शन करने वाले हैं। यह हड़ताल मुख्य रूप से ई-चलान प्रणाली और भारी करों के खिलाफ की जा रही है। परिवहन संगठनों का आरोप है कि मौजूदा नियम ड्राइवरों के लिए आर्थिक और कानूनी रूप से बेहद नुकसानदायक हैं।
आखिरी समय की बातचीत भी रही बेनतीजा
हड़ताल से पहले परिवहन संगठनों और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी (M-TAC) के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन में ट्रक, टैक्सी, ऑटो-रिक्शा, निजी बसें और स्कूल बसों सहित कई प्रकार के व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। संगठनों ने सरकार के आश्वासनों को खोखला बताते हुए कहा कि जब तक लिखित निर्णय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
मुंबई-पुणे सहित कई शहरों में यातायात पर असर
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर मुंबई, पुणे और अन्य बड़े शहरों में देखने को मिल सकता है। आज सड़कों पर से टैक्सी, ऑटो-रिक्शा, ऐप आधारित कैब (ओला और उबर), निजी और इंटरसिटी बसें, स्कूल बसें, मालवाहक ट्रक और टैंकर जैसे वाहन सड़कों से नदारद रह सकते हैं। इस वजह से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है। एसोसिएशन के अनुसार हजारों स्कूल बसें आज सड़कों पर नहीं उतरेंगी। ऐसे में कई शहरों में परीक्षा देने जा रहे छात्रों के लिए स्कूल पहुंचना चुनौती बन सकता है, जिससे अभिभावकों को बच्चों को परीक्षा केंद्र तक खुद पहुंचाने की व्यवस्था करनी पड़ेगी।
माल परिवहन पर भी पड़ेगा असर
हड़ताल का असर केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रक और टैंकर यूनियन भी इस चक्का जाम आंदोलन में शामिल हो रही हैं। इससे उद्योगों के कच्चे माल और रोजमर्रा की वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। खासकर खाद्य सामग्री और अन्य जल्दी खराब होने वाले सामान की डिलीवरी में देरी होने की आशंका है।
हड़ताल से एक दिन पहले बुधवार दोपहर को कई जगहों पर ट्रांसपोर्टरों ने एक मिनट का प्रतीकात्मक हॉर्न बजाकर विरोध भी दर्ज कराया था।
ई-चलान नियम पर विवाद क्यों?
बताया जा रहा है कि इस पूरे विवाद का केंद्र ई-चलान प्रणाली है। यूनियनों का आरोप है कि नए नियम के तहत अगर किसी ड्राइवर को ई-चलान मिलता है और वह उसे चुनौती देना चाहता है, तो उसे पहले कुल जुर्माने का 50% जमा करना पड़ता है। परिवहन संगठनों का कहना है कि यह नियम दोषी मानने की पूर्वधारणा जैसा है और इससे कई ड्राइवरों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कुछ मामलों में तो डिजिटल जुर्माना वाहन की बाजार कीमत से भी ज्यादा बताया जा रहा है।
ट्रांसपोर्ट यूनियनों की मुख्य मांगें
हड़ताल कर रहे संगठनों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। जिसमें मुख्य तौर पर ई-चलान को चुनौती देने के लिए 50% अग्रिम भुगतान नियम में बदलाव, परिवहन विवादों के लिए अलग न्यायिक प्राधिकरण की स्थापना, पुराने और गलत ई-चलानों को रद्द करना और पैनिक बटन और FDSS जैसे महंगे उपकरण लगाने की अनिवार्यता पर रोक शामिल है।
यूनियनों के मुताबिक राज्य में करीब 4500 करोड़ रुपये के ई-चलान लंबित हैं, जिनमें से कई तकनीकी त्रुटियों के कारण जारी हुए बताए जा रहे हैं।
सरकार ने फिर बुलाई बैठक
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि सरकार परिवहन क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक है। इस मुद्दे पर आज एक और संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इस बीच पुलिस ने मुंबई के आजाद मैदान, राज्य की सीमाओं और रेलवे स्टेशनों पर अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की है ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो सके।


