बांका जिले के रजौन प्रखंड अंतर्गत रानीटीकर गांव में गुरुवार दोपहर श्री श्री 108 महा रुद्र यज्ञ का शुभारंभ 1051 कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। इस अवसर पर 1051 महिलाएं और कन्याएं सिर पर कलश धारण कर शोभायात्रा में शामिल हुईं। यह यात्रा नवादा पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाली गई। गांव से निकली इस विशाल कलश यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े, जिससे लगभग दो किलोमीटर लंबी कतार बन गई। देवी-देवताओं के स्वरूप में सजी झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र शोभायात्रा में रथ, हाथी-घोड़े, डीजे, बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ श्रद्धालु भक्तिमय माहौल में आगे बढ़ रहे थे। यात्रा के दौरान विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूप में सजी झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच श्रद्धालुओं की सेवा के लिए रास्ते में कई स्थानों पर ठंडा पानी और शरबत की व्यवस्था भी की गई थी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में जल भरवाया कलश यात्रा रानीटीकर गांव से निकलकर फैजपुर सोहली गांव का भ्रमण करते हुए तिलकपुर गांव स्थित तालाब के पास पहुंची। वहां पुरोहितों और पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में जल भरवाया। शोभायात्रा के आगे-आगे रथ पर सवार विद्वान पंडित आलोक झा, आचार्य सुदामा यादव, उनकी धर्मपत्नी किरण देवी सहित रानीटीकर गांव के ग्रामीण चल रहे थे। इस दौरान “हर हर महादेव” के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। विधि-विधान के साथ कलश की स्थापना की गई इसके बाद शोभायात्रा बामदेव गौतार होते हुए पुनः यज्ञ स्थल पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ कलश की स्थापना की गई। श्रद्धालुओं ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। महा रुद्र यज्ञ को लेकर यज्ञ स्थल परिसर में एक मेले का भी आयोजन किया गया है। मेले में विभिन्न प्रकार के झूले, तारामतची और कई तरह की दुकानें लगाई गई हैं, जिससे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। बांका जिले के रजौन प्रखंड अंतर्गत रानीटीकर गांव में गुरुवार दोपहर श्री श्री 108 महा रुद्र यज्ञ का शुभारंभ 1051 कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। इस अवसर पर 1051 महिलाएं और कन्याएं सिर पर कलश धारण कर शोभायात्रा में शामिल हुईं। यह यात्रा नवादा पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाली गई। गांव से निकली इस विशाल कलश यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े, जिससे लगभग दो किलोमीटर लंबी कतार बन गई। देवी-देवताओं के स्वरूप में सजी झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र शोभायात्रा में रथ, हाथी-घोड़े, डीजे, बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ श्रद्धालु भक्तिमय माहौल में आगे बढ़ रहे थे। यात्रा के दौरान विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूप में सजी झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच श्रद्धालुओं की सेवा के लिए रास्ते में कई स्थानों पर ठंडा पानी और शरबत की व्यवस्था भी की गई थी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में जल भरवाया कलश यात्रा रानीटीकर गांव से निकलकर फैजपुर सोहली गांव का भ्रमण करते हुए तिलकपुर गांव स्थित तालाब के पास पहुंची। वहां पुरोहितों और पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में जल भरवाया। शोभायात्रा के आगे-आगे रथ पर सवार विद्वान पंडित आलोक झा, आचार्य सुदामा यादव, उनकी धर्मपत्नी किरण देवी सहित रानीटीकर गांव के ग्रामीण चल रहे थे। इस दौरान “हर हर महादेव” के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। विधि-विधान के साथ कलश की स्थापना की गई इसके बाद शोभायात्रा बामदेव गौतार होते हुए पुनः यज्ञ स्थल पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ कलश की स्थापना की गई। श्रद्धालुओं ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। महा रुद्र यज्ञ को लेकर यज्ञ स्थल परिसर में एक मेले का भी आयोजन किया गया है। मेले में विभिन्न प्रकार के झूले, तारामतची और कई तरह की दुकानें लगाई गई हैं, जिससे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।


