प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 25 को ‘महाकुंभ’, एक साथ होगी मेगा पीटीएम और पीएएम

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 25 को ‘महाकुंभ’, एक साथ होगी मेगा पीटीएम और पीएएम

प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई देने और अभिभावकों को स्कूल से सीधे जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग ने आगामी 25 मार्च को प्रदेशव्यापी मेगा पीटीएम (पेरेंट्स टीचर मीटिंग) और पीएएम (पेरेंट आंगनबाड़ी मीटिंग) आयोजित करने का निर्णय किया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आदेशों के अनुसार इस दिन स्कूलों में न केवल विद्यार्थियों की प्रगति पर चर्चा होगी, बल्कि प्रवेशोत्सव का शंखनाद करते हुए आगामी कक्षा में अस्थायी प्रवेश भी दिए जाएंगे।

इस बार की पीटीएम खास होगी क्योंकि इसमें पारंपरिक चर्चा के साथ-साथ एआई आधारित दक्षता आकलन की रिपोर्ट भी साझा की जाएगी। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि इस आयोजन को उत्सव का रूप देने के लिए अभिभावकों को पीले चावल बांटकर या निमंत्रण पत्र देकर सम्मानपूर्वक बुलाया जाए।

आपके लिए जानना जरूरी है

कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को उसी दिन अस्थायी प्रवेश दिया जाएगा। आंगनबाड़ी के 5-6 वर्ष के बच्चों को कक्षा 1 में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलेगा। अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा कि नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रेल 2026 से शुरू हो रहा है, ताकि पहले दिन से ही शत-प्रतिशत उपस्थिति रहे। स्कूलों में होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड साझा किए जाएंगे। साथ ही बेहतर परिणाम वाले स्कूलों को विद्यालय सम्मान पत्र भी प्रदर्शित करने होंगे। विद्यार्थियों से 50 प्रतिशत पुरानी किताबें वापस जमा करवाई जाएंगी, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर पुस्तकें मिल सकें।

आंगनबाड़ी और स्कूल का अनूठा संगम

जिन स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, वहां संयुक्त रूप से पेरेंट आंगनबाड़ी मीटिंग होगी। इसमें 3 से 6 वर्ष के बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर चर्चा की जाएगी। जो केंद्र स्कूल परिसर से बाहर हैं, वहां मेंटर टीचर्स और कार्यकर्ता अलग से बैठक करेंगे। जाट ने कहा कि शत-प्रतिशत नामांकन और ड्रॉप-आउट रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। शिक्षक अभिभावकों से सीधा संवाद करें और बच्चों के सीखने के स्तर पर चर्चा करें।

क्या करें अभिभावक

25 मार्च को स्कूल पहुंचकर अपने बच्चे की एआई रिपोर्ट कार्ड देखें। शिक्षकों से बच्चों की ओआरएफ (रीडिंग फ्लुएंसी) पर बात करें। पुरानी किताबें स्कूल में जमा कराएं ताकि उनका पुन: उपयोग हो सके।

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