बिहार शरीफ के प्रसिद्ध मघड़ा शीतला मंदिर में हुई भगदड़ के बाद प्रशासन और धार्मिक न्यास बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। हादसे की जांच के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि मुख्य द्वार की फिसलन भरी सीढ़ियां भगदड़ का मुख्य कारण बनी थी। एसडीओ ने उन सीढ़ियों को तत्काल तोड़कर वहां स्लोपिंग रैंप बनाने का आदेश दिया है। इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि दिव्यांगों और बुजुर्गों के साथ-साथ आम श्रद्धालुओं को आवागमन में सुगमता हो। दोबारा ऐसी दुर्घटना न हो सके। जिग-जैग प्रणाली की जा रही विकसित मंदिर परिसर में अब श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह नियंत्रित होगा। नई व्यवस्था के तहत अब शीतल तालाब में स्नान करने के बाद श्रद्धालु सीधे गर्भगृह की ओर नहीं जा सकेंगे। तालाब के आसपास ग्रिल और बैरिकेडिंग की जा रही है, जिससे हर श्रद्धालु को मुख्य द्वार से कतार में लगकर ही प्रवेश मिल सके। भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए परिसर में ‘जिग-जैग’ कतार प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसे एसडीओ क्रिसलय श्रीवास्तव ने सुचारू दर्शन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए तालाब के पानी के स्तर को भी कम किया जा रहा है ताकि गहरे पानी में डूबने का खतरा न रहे। दान के पैसे से होगा मंदिर का विकास प्रशासनिक स्तर पर हुए बदलावों की जानकारी देते हुए वार्ड पार्षद प्रतिनिधि जयंत शर्मा ने बताया कि मंदिर की दान-पेटी को अब ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में लेकर उसमें ताला लगा दिया गया है। इस राशि का उपयोग मंदिर के सर्वांगीण विकास और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला निर्माण में किया जाएगा। पुजारियों की भूमिका को लेकर भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि वे ट्रस्ट की नियमावली के अनुसार ही कार्य करेंगे। श्रद्धालुओं पर दक्षिणा के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन का मुख्य जोर अब अनुशासन और सुरक्षित दर्शन पर है। जिसके लिए सरकार ने भी तत्परता दिखाते हुए विकास योजनाओं को हरी झंडी दे दी है। बिहार शरीफ के प्रसिद्ध मघड़ा शीतला मंदिर में हुई भगदड़ के बाद प्रशासन और धार्मिक न्यास बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। हादसे की जांच के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि मुख्य द्वार की फिसलन भरी सीढ़ियां भगदड़ का मुख्य कारण बनी थी। एसडीओ ने उन सीढ़ियों को तत्काल तोड़कर वहां स्लोपिंग रैंप बनाने का आदेश दिया है। इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि दिव्यांगों और बुजुर्गों के साथ-साथ आम श्रद्धालुओं को आवागमन में सुगमता हो। दोबारा ऐसी दुर्घटना न हो सके। जिग-जैग प्रणाली की जा रही विकसित मंदिर परिसर में अब श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह नियंत्रित होगा। नई व्यवस्था के तहत अब शीतल तालाब में स्नान करने के बाद श्रद्धालु सीधे गर्भगृह की ओर नहीं जा सकेंगे। तालाब के आसपास ग्रिल और बैरिकेडिंग की जा रही है, जिससे हर श्रद्धालु को मुख्य द्वार से कतार में लगकर ही प्रवेश मिल सके। भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए परिसर में ‘जिग-जैग’ कतार प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसे एसडीओ क्रिसलय श्रीवास्तव ने सुचारू दर्शन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए तालाब के पानी के स्तर को भी कम किया जा रहा है ताकि गहरे पानी में डूबने का खतरा न रहे। दान के पैसे से होगा मंदिर का विकास प्रशासनिक स्तर पर हुए बदलावों की जानकारी देते हुए वार्ड पार्षद प्रतिनिधि जयंत शर्मा ने बताया कि मंदिर की दान-पेटी को अब ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में लेकर उसमें ताला लगा दिया गया है। इस राशि का उपयोग मंदिर के सर्वांगीण विकास और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला निर्माण में किया जाएगा। पुजारियों की भूमिका को लेकर भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि वे ट्रस्ट की नियमावली के अनुसार ही कार्य करेंगे। श्रद्धालुओं पर दक्षिणा के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन का मुख्य जोर अब अनुशासन और सुरक्षित दर्शन पर है। जिसके लिए सरकार ने भी तत्परता दिखाते हुए विकास योजनाओं को हरी झंडी दे दी है।


