भगवानपुर पंचायत स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन इन दिनों शिक्षकों और बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। वर्ष 1962 में स्थापित इस मदरसे को 1974 में बिहार स्टेट मदरसा एजुकेशन बोर्ड से मान्यता मिली थी। प्रखंड क्षेत्र के इस संस्थान में कक्षा आठ तक दीनियात के साथ-साथ अंग्रेजी, हिंदी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई कराई जाती है। मदरसे में वर्तमान में 220 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से करीब 140 छात्र नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित रहते हैं। नियमानुसार यहां आठ शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन फिलहाल केवल चार शिक्षक ही कार्यरत हैं। शिक्षकों की कमी के कारण पठन-पाठन व्यवस्था प्रभावित हो रही है और छात्रों को पूरी शैक्षणिक सुविधा नहीं मिल पा रही है। पेयजल, भवन और फर्नीचर का अभाव मदरसे के हेडमास्टर मोहम्मद अथरुल कासमी ने बताया कि संस्थान में पेयजल, भवन और फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच शिक्षक अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन आवश्यक सुविधाओं के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को केवल वेतन दिया जाता है, अन्य किसी प्रकार का भत्ता या अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती। इसके बावजूद शिक्षक और छात्र दोनों शिक्षा के प्रति गंभीर हैं। स्थानीय लोगों ने की विशेष बजट की मांग मदरसे की स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने सरकार से विशेष बजट आवंटित करने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति और आधारभूत संरचना के विकास के बिना छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मांग की कि मदरसे को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। जांच के बाद भेजी जाएगी रिपोर्ट इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नारायण सुमन ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। मदरसे की स्थिति की जांच कराई जाएगी और वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमानुसार जो भी सुविधाएं संभव होंगी, उन्हें उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। भगवानपुर पंचायत स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन इन दिनों शिक्षकों और बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। वर्ष 1962 में स्थापित इस मदरसे को 1974 में बिहार स्टेट मदरसा एजुकेशन बोर्ड से मान्यता मिली थी। प्रखंड क्षेत्र के इस संस्थान में कक्षा आठ तक दीनियात के साथ-साथ अंग्रेजी, हिंदी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई कराई जाती है। मदरसे में वर्तमान में 220 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से करीब 140 छात्र नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित रहते हैं। नियमानुसार यहां आठ शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन फिलहाल केवल चार शिक्षक ही कार्यरत हैं। शिक्षकों की कमी के कारण पठन-पाठन व्यवस्था प्रभावित हो रही है और छात्रों को पूरी शैक्षणिक सुविधा नहीं मिल पा रही है। पेयजल, भवन और फर्नीचर का अभाव मदरसे के हेडमास्टर मोहम्मद अथरुल कासमी ने बताया कि संस्थान में पेयजल, भवन और फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच शिक्षक अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन आवश्यक सुविधाओं के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को केवल वेतन दिया जाता है, अन्य किसी प्रकार का भत्ता या अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती। इसके बावजूद शिक्षक और छात्र दोनों शिक्षा के प्रति गंभीर हैं। स्थानीय लोगों ने की विशेष बजट की मांग मदरसे की स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने सरकार से विशेष बजट आवंटित करने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति और आधारभूत संरचना के विकास के बिना छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मांग की कि मदरसे को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। जांच के बाद भेजी जाएगी रिपोर्ट इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नारायण सुमन ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। मदरसे की स्थिति की जांच कराई जाएगी और वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमानुसार जो भी सुविधाएं संभव होंगी, उन्हें उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।


