बांका में मकर संक्रांति पर मधुसूदन की रथ यात्रा:गरुड़ पर सवार होकर निकले भगवान, हजारों श्रद्धालु उमड़े

बांका में मकर संक्रांति पर मधुसूदन की रथ यात्रा:गरुड़ पर सवार होकर निकले भगवान, हजारों श्रद्धालु उमड़े

बांका के बौसी प्रखंड अंतर्गत मंदार में बुधवार शाम भगवान मधुसूदन की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित इस यात्रा में मंदार क्षेत्र सहित आसपास के जिलों और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। ‘जय मधुसूदन’ के जयघोष से पूरा मधुसूदन धाम भक्तिमय हो उठा। निर्धारित शुभ मुहूर्त पर भगवान मधुसूदन मंदिर के गर्भगृह से बाहर आए। उन्हें 16 पहियों वाले धर्म रथ के सिंहासन पर विराजमान किया गया। इस दौरान भक्तों में दर्शन के लिए विशेष उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजा-अर्चना कर भगवान के दर्शन किए। भक्तों की बारात के साथ मंदार भ्रमण पर निकले मधुसूदन भगवान मधुसूदन ने मंदार यात्रा शुरू की। यह यात्रा मधु-कैटभ को दिए गए वचन के अनुसार धर्म, संस्कृति और परंपरा का निर्वाह करते हुए निकाली गई। पीतांबर धारण किए भगवान गरुड़ रथ पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ हजारों भक्तों की बारात के साथ मंदार भ्रमण पर निकले। यात्रा मार्ग में जगह-जगह भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय पंडा समाज और धर्म रक्षिणी समाज ने भक्ति-भजन, नृत्य और उल्लासपूर्ण वातावरण में यात्रा संपन्न कराई। परंपरा के अनुसार, पिछले 400 वर्षों से अधिक समय से छतरी सेवा का दायित्व निभा रहे क्षत्रिय किनवार वंशज मंटू सिंह (56 वर्षीय, निवासी गुरुधाम) ने सपरिवार भगवान को छतरी सेवा प्रदान की। पुलिस ने सुरक्षा का किया इंतजाम इस धार्मिक आयोजन में सभी वर्ग, समुदाय, महिला-पुरुष और बच्चों ने भगवान के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ के कारण मधुसूदन मंदिर परिसर से लेकर कई किलोमीटर दूर स्थित मंदार पर्वत मंदिर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। शाम को भगवान मधुसूदन यात्रा पूरी कर मंदिर लौटे। इसके बाद 16 कलाओं में निपुण राजा स्वरूप सांवरिया सरकार को सिंहासन पर विराजमान किया गया। मंदिर परिसर और रथ को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। बांका के बौसी प्रखंड अंतर्गत मंदार में बुधवार शाम भगवान मधुसूदन की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित इस यात्रा में मंदार क्षेत्र सहित आसपास के जिलों और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। ‘जय मधुसूदन’ के जयघोष से पूरा मधुसूदन धाम भक्तिमय हो उठा। निर्धारित शुभ मुहूर्त पर भगवान मधुसूदन मंदिर के गर्भगृह से बाहर आए। उन्हें 16 पहियों वाले धर्म रथ के सिंहासन पर विराजमान किया गया। इस दौरान भक्तों में दर्शन के लिए विशेष उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजा-अर्चना कर भगवान के दर्शन किए। भक्तों की बारात के साथ मंदार भ्रमण पर निकले मधुसूदन भगवान मधुसूदन ने मंदार यात्रा शुरू की। यह यात्रा मधु-कैटभ को दिए गए वचन के अनुसार धर्म, संस्कृति और परंपरा का निर्वाह करते हुए निकाली गई। पीतांबर धारण किए भगवान गरुड़ रथ पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ हजारों भक्तों की बारात के साथ मंदार भ्रमण पर निकले। यात्रा मार्ग में जगह-जगह भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय पंडा समाज और धर्म रक्षिणी समाज ने भक्ति-भजन, नृत्य और उल्लासपूर्ण वातावरण में यात्रा संपन्न कराई। परंपरा के अनुसार, पिछले 400 वर्षों से अधिक समय से छतरी सेवा का दायित्व निभा रहे क्षत्रिय किनवार वंशज मंटू सिंह (56 वर्षीय, निवासी गुरुधाम) ने सपरिवार भगवान को छतरी सेवा प्रदान की। पुलिस ने सुरक्षा का किया इंतजाम इस धार्मिक आयोजन में सभी वर्ग, समुदाय, महिला-पुरुष और बच्चों ने भगवान के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ के कारण मधुसूदन मंदिर परिसर से लेकर कई किलोमीटर दूर स्थित मंदार पर्वत मंदिर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। शाम को भगवान मधुसूदन यात्रा पूरी कर मंदिर लौटे। इसके बाद 16 कलाओं में निपुण राजा स्वरूप सांवरिया सरकार को सिंहासन पर विराजमान किया गया। मंदिर परिसर और रथ को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *