Lucknow Zoo Wolf Health Update: लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में रह रही एक वृद्ध मादा भेड़िया पिछले कई दिनों से बीमार चल रही है। प्राणि उद्यान प्रशासन के अनुसार 16 फरवरी 2026 से उसकी तबीयत खराब है और वन्यजीव चिकित्सकों की टीम लगातार उसकी निगरानी व उपचार में जुटी हुई है। यह मादा भेड़िया वर्ष 2014 में जयपुर प्राणि उद्यान से लखनऊ लाई गई थी और वर्तमान में उसकी आयु लगभग 15 से 16 वर्ष आंकी जा रही है, जो भेड़ियों की सामान्य आयु सीमा से अधिक मानी जाती है।
वृद्धावस्था बनी बीमारी की बड़ी वजह
प्राणि उद्यान प्रशासन के मुताबिक प्राकृतिक वातावरण में भेड़ियों की औसत आयु सामान्यतः 12 से 14 वर्ष के बीच होती है। ऐसे में यह मादा भेड़िया उम्र के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ जंगली जानवरों में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे संक्रमण और शारीरिक कमजोरी की संभावना बढ़ जाती है। चिकित्सकों ने बताया कि मादा भेड़िया में वृद्धावस्था से जुड़ी सामान्य समस्याएं देखी जा रही हैं। उसकी भूख कम हो गई है और गतिविधियों में भी कमी आई है। इसी कारण उसे विशेष चिकित्सा देखभाल में रखा गया है।
डॉक्टरों की टीम लगातार कर रही निगरानी
चिड़ियाघर प्रशासन ने मादा भेड़िया की हालत को देखते हुए विशेष मेडिकल प्रोटोकॉल लागू किया है। वन्य जीव चिकित्सकों की टीम नियमित रूप से उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है।
नियमित तापमान जांच
भोजन और पानी की निगरानी
दवाइयों का नियंत्रित सेवन
आरामदायक बाड़े की व्यवस्था
संक्रमण से बचाव के विशेष उपाय
कीपर और डॉक्टर चौबीसों घंटे उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के लिए चिकित्सा उपकरण और दवाइयां तैयार रखी गई हैं।
2014 में जयपुर से लखनऊ लाई गई थी भेड़िया
प्राणि उद्यान के अधिकारियों ने बताया कि यह मादा भेड़िया 13 अक्टूबर 2014 को जयपुर प्राणि उद्यान, जयपुर से लखनऊ लाई गई थी। तब से वह नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान की प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही है। लखनऊ आने के बाद उसने यहां के वातावरण में खुद को अच्छी तरह ढाल लिया था और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन व्यतीत किया। चिड़ियाघर आने वाले पर्यटकों और बच्चों के बीच भेड़िया हमेशा उत्सुकता का केंद्र रही है।
वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चिड़ियाघरों में रहने वाले जानवर केवल प्रदर्शन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे संरक्षण, शोध और जागरूकता का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। भेड़िया एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक जीव है, जो प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे जानवरों की स्वास्थ्य निगरानी और संरक्षण से वन्यजीव प्रबंधन की गुणवत्ता का भी आकलन होता है।
विशेष आहार और देखभाल
बीमार मादा भेड़िया को उसकी स्थिति के अनुसार विशेष आहार दिया जा रहा है। डॉक्टरों की सलाह पर हल्का और सुपाच्य भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उसकी ऊर्जा बनी रहे। साथ ही उसके बाड़े को शांत और कम शोर वाला रखा गया है, जिससे तनाव कम हो और स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
चिड़ियाघर प्रशासन सतर्क
प्राणि उद्यान प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जानवर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर बाहरी विशेषज्ञों से भी सलाह ली जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि वृद्ध जानवरों की देखभाल चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन अनुभवी चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ की मदद से बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
पर्यटकों से संयम की अपील
चिड़ियाघर प्रशासन ने आगंतुकों से अपील की है कि बीमार जानवर के बाड़े के पास अनावश्यक शोर न करें और निर्धारित नियमों का पालन करें। इससे जानवर को आराम मिल सकेगा और उपचार प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।
प्राकृतिक जीवन और कैद का अंतर
विशेषज्ञ बताते हैं कि जंगल में रहने वाले भेड़ियों को भोजन की तलाश, संघर्ष और पर्यावरणीय जोखिमों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी औसत आयु सीमित रहती है। इसके विपरीत चिड़ियाघरों में नियंत्रित वातावरण, नियमित भोजन और चिकित्सा सुविधा मिलने से कई जानवर अपेक्षाकृत अधिक समय तक जीवित रहते हैं। यही कारण है कि लखनऊ चिड़ियाघर की यह मादा भेड़िया सामान्य आयु सीमा से अधिक जीवन जी चुकी है।
स्वास्थ्य सुधार की उम्मीद
वन्यजीव चिकित्सकों का कहना है कि अभी मादा भेड़िया का इलाज जारी है और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल उसे विशेष निगरानी में रखा गया है और स्वास्थ्य सुधार के प्रयास जारी हैं। चिड़ियाघर प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि उचित देखभाल और उपचार से उसकी हालत में सुधार होगा।


