राजधानी लखनऊ में रविवार को साहित्य, संवाद और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला। कविशाला की ओर से ‘आग़ाज़ लखनऊ’ साहित्यिक उत्सव शेरोज हैंगआउट में किया गया , जहां बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, युवा और रचनाकार जुटे। कार्यक्रम ने स्थापित साहित्यकारों और नई पीढ़ी के रचनाकारों के बीच सार्थक संवाद का मंच तैयार किया। वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने ‘पत्रकारिता और भाषा संवाद’ विषय पर कहा कि बदलते दौर में भाषा की जिम्मेदारी और पत्रकारिता की संवेदनशीलता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।इतिहासकार डॉ. रवि भट्ट ने ‘अनकहा इतिहास’ पर चर्चा करते हुए उन पहलुओं को सामने रखा, जो मुख्यधारा के विमर्श में अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। देवी गीत और फाग की प्रस्तुति दी लोक कलाकार मालविका हरिओम ने लोकगीतों और लोक परंपरा की सांस्कृतिक गहराई पर बात की। उन्होंने ‘रेलिया बैरन पिया को लिये जाये रे’, देवी गीत और फाग की प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पद्मश्री सम्मानित अभिनेता अनिल रस्तोगी ने साहित्य, रंगमंच और समाज के रिश्तों पर अपने अनुभव साझा किए। व्यंग्यकार पंकज प्रसून ने ‘हास्य व्यंग – नुक्ताचीनी’ से समकालीन विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया। वहीं कवि राजेश कुमार ने ‘दोहा का संसार’ के बारे में बताते हुए कहा—’मेरे अपने देश का कटा फटा भूगोल,खुद अपने इतिहास की खोल रहा है पोल।’ कवि सम्मेलन में गूंजे समकालीन स्वर मुख्य आकर्षण रहे कवि सम्मेलन में डॉ. संजय शौक, शहबाज तालिब, डॉ. सुधा मिश्रा, डॉ. ओम शर्मा ओम, देवेन्द्र दीक्षित, आदर्श श्रीवास्तव, लोकेश त्रिपाठी और अभिष्टेष्ठ तिवारी ने अपनी रचनाओं से माहौल को ऊर्जावान बना दिया। सामाजिक सरोकार, प्रेम, व्यंग्य और मानवीय रिश्तों की भावनाओं ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। ‘नए स्वर’ बना युवाओं का मंच ओपन माइक ‘नए स्वर’ में उभरते कवियों और लेखकों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं। वरिष्ठ साहित्यकारों से मिली सराहना ने युवाओं का उत्साह दोगुना कर दिया। साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए पंकज प्रसून को ‘कविशाला साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कविशाला के संस्थापक अंकुर मिश्रा ने कहा कि ‘आग़ाज़’ का उद्देश्य साहित्य को समाज से जोड़ना है। युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि साहित्य के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।


