इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अलीगढ़ बस हादसे में निलंबित क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) वंदना को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। यह मामला अलीगढ़ में बस के टूटे फर्श से गिरकर सात वर्षीय छात्रा की मौत से जुड़ा है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने आरटीओ वंदना की ओर से दाखिल सेवा संबंधी याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि निलंबन आदेश पर रोक रहेगी, लेकिन चल रही विभागीय जांच पर कोई रोक नहीं होगी। याचिका में 1 मार्च 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत वंदना को विभागीय जांच की प्रत्याशा में निलंबित कर दिया गया था। याची पर आरोप था कि 28 फरवरी 2026 को अलीगढ़ में एक निजी स्कूल बस का फर्श धंसने से उसमें सवार एक बच्ची की मृत्यु हो गई थी। याची की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने न्यायालय को बताया कि घटना दुखद है, लेकिन इसमें आरटीओ की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि बस के निरीक्षण की जिम्मेदारी सिर्फ आरटीओ की नहीं होती, बल्कि निरीक्षण अधिकारियों पर होती है। ऐसे में याची के खिलाफ लापरवाही का कोई मामला नहीं बनता। न्यायालय ने राज्य सरकार को इस मामले में चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल वाले सप्ताह में होगी। कोर्ट ने मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता जताई है।


