लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच ने केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश के विरुद्ध दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज करने के गोंडा की सत्र अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने सत्र अदालत को मामले को गुण-दोष के आधार पर फिर से निर्णय लेने का आदेश दिया है। मंत्री को पुनरीक्षण याचिका के दौरान मिली अंतरिम राहत को अंतिम निस्तारण तक बरकरार रखा गया है। यह मामला अजय सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत से जुड़ा है। अजय सिंह ने गोंडा की स्थानीय अदालत से मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश प्राप्त किया था। झूठा मुकदमा दर्ज कराने का आरोप शिकायतकर्ता अजय सिंह का आरोप है कि मंत्री और उनके सहयोगियों ने उसकी जमीन हड़पने के लिए धोखाधड़ी की है। उसके खिलाफ झूठा मुकदमा भी दर्ज कराया है।एफआईआर दर्ज करने के विशेष न्यायालय (एमपी/एमएलए) के आदेश के खिलाफ मंत्री ने सत्र अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। सत्र अदालत ने 30 जनवरी को याचीगण के लगातार अनुपस्थित रहने के कारण इस याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने सत्र अदालत के 30 जनवरी के इस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत के निर्णय के अनुसार, स्वीकृत हो चुकी पुनरीक्षण याचिका को केवल पैरवी न होने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने सत्र अदालत को मंत्री की पुनरीक्षण याचिका पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।


