LPG गैस संकट गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर भी दिखा:बंद हुआ प्लेटफॉर्म का कैन्टीन, जैसे तैसे वंदे भारत में हो रही खाने की सप्लाई

LPG गैस संकट गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर भी दिखा:बंद हुआ प्लेटफॉर्म का कैन्टीन, जैसे तैसे वंदे भारत में हो रही खाने की सप्लाई

एलपीजी गैस की किल्लत का असर अब गोरखपुर रेलवे पर भी दिखने लगा है। रेलवे स्टेशन पर मौजूद जन आहार और रेलवे द्वारा संचालित खाने के कैन्टीन को जनता के लिए बंद कर दिया गया है। यहाँ सिर्फ पैक आईटम मिल रहे। इसके अलावा रेलवे के रनिंग स्टाफ यानी लोको पायलट और गार्ड को अब रनिंग रूम में अपनी पसंद का खाना नहीं मिल पाएगा। गोरखपुर, गोंडा, छपरा, बलिया, सीवान, थावे, भटनी, बनारस और प्रयागराज रामबाग जैसे स्टेशनों पर स्थित रनिंग रूम में अब सिर्फ तय मेन्यू के अनुसार ही नाश्ता और भोजन तैयार किया जाएगा। मंडल प्रशासन ने जारी किए निर्देश पूर्वोत्तर रेलवे की पहल पर वाराणसी और लखनऊ मंडल प्रशासन ने सभी रनिंग रूम प्रभारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों ने पत्र के जरिए बताया है कि एलपीजी सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए अगले आदेश तक सभी रनिंग रूम में लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर (गार्ड) को केवल अनुदानित मेन्यू के आधार पर ही भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। बहुत कम कीमत में मिलता है भोजन रेलवे प्रशासन अपने रनिंग स्टाफ के लिए रनिंग रूम में विश्राम के साथ नाश्ता और भोजन की व्यवस्था करता है। यहां स्टाफ को अनुदानित दरों पर भोजन मिलता है। रनिंग स्टाफ को सिर्फ 5, 7 और 9 रुपये में भोजन की थाली मिल जाती है। इसके लिए उन्हें टोकन भी दिया जाता है। पहले स्टाफ अपनी पसंद का खाना बनवाते थे अब तक अधिकतर रनिंग स्टाफ अनुदानित भोजन के बजाय अपनी पसंद का नाश्ता और खाना बनवाते थे। वे बाजार से सब्जी, पनीर, दूध, दही, चिकन, मटन या अन्य सामग्री खरीदकर मेस के कुक को दे देते थे। कुक उसी के अनुसार खाना तैयार कर देता था, जिससे उन्हें घर जैसा भोजन मिल जाता था। गैस की खपत बढ़ने से लिया गया फैसला रेलवे अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग लोगों की पसंद के हिसाब से खाना बनाने में गैस की खपत ज्यादा होती थी। मौजूदा समय में गैस की कमी को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने अब इस व्यवस्था पर रोक लगा दी है। इससे गैस की बचत होगी और सभी को एक ही मेन्यू के अनुसार भोजन दिया जाएगा। यात्रियों के खानपान पर भी पड़ सकता है असर गैस की कमी का असर ट्रेनों में यात्रियों के खानपान पर भी पड़ सकता है। हालांकि सुरक्षा कारणों से ट्रेनों के पेंट्रीकार में गैस सिलेंडर पहले से ही प्रतिबंधित हैं। वहां इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल होता है, जिन पर नाश्ता और खाना गर्म किया जाता है। पेंट्रीकार में मिलने वाला भोजन बेस किचन से तैयार होकर आता है। वंदे भारत में ‘रेडी टू ईट’ देने की तैयारी रेलवे प्रशासन वंदे भारत ट्रेनों में ‘रेडी टू ईट’ नाश्ता और भोजन देने की तैयारी भी कर रहा है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है। बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद वंदे भारत ट्रेनों में पैक्ड ‘रेडी टू ईट’ भोजन यात्रियों को दिया जा सकता है। गोरखपुर में तीन बेस किचन फिलहाल ट्रेनों के लिए नाश्ता और भोजन बेस किचन में तैयार होता है, जहां गैस सिलेंडर का उपयोग किया जाता है। अगर गैस की कमी के कारण इन किचनों में खाना बनना प्रभावित हुआ तो यात्रियों को ‘रेडी टू ईट’ भोजन दिया जा सकता है। गोरखपुर में फिलहाल आईआरसीटीसी के तीन बेस किचन संचालित हो रहे हैं।

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