‘गैस के लिए हम सुबह से यहां बैठे हैं। 6 घंटे हो गए हैं। ऑफिस भी बंद है। बोला गया कि नंबर लगाइए, लेकिन नंबर तब ही लगेगा, जब वो आएंगे। घर से कई बार मोबाइल से नंबर लगाने की कोशिश की, लेकिन नहीं लगा। फिर ऑफिस आए। यहां भी बैठे-बैठे परेशान हो गए हैं। कोई आगे की जानकारी देने वाला भी नहीं है। ऐसे में कारोबार कैसे चलेगा।’ मधेपुरा के पुरानी बाजार चौक के पवन साह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही। दरअसल, मंगलवार को मधेपुरा ही नहीं, लखीसराय, खगड़िया, मोतिहारी, छपरा, गोपालगंज समेत बिहार के 10 से ज्यादा जिलों में लोगों को गैस नहीं मिलने की शिकायतें आईं। हालांकि, एजेंसियों का दावा है कि उनके पास गैस का स्टॉक है। लोग बेवजह पैनिक हो रहे हैं। आखिर लोग एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर इतने परेशान क्यों हैं? कॉमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर लोगों और सिलेंडर डिलीवर करने वाले एजेंसियों का क्या कहना है? पढ़िए, पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले एजेंसियों से आई 2 तस्वीरें देखिए अब जानिए कॉमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर के डीलर का क्या कहना है? मोतिहारी के डीलर सुभाष गुप्ता ने बताया कि लोगों में इजराइल-अमेरिका और इरान युद्ध को लेकर भय फैल गया है। इसकी वजह से लोग अपने-अपने इलाके से गैस गोदाम पर पहुंच रहे हैं। यहां गैस की आपूर्ति पूरी है। हम होम डिलीवरी की तैयारी कर रहे हैं, फिर भी लोग यहां भीड़ लगा रहे हैं। हमारे पास 25 दिनों का स्टॉक है। दरअसल, केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955’ लागू कर दिया है। होर्मुज जल मार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई ठप होने के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है। गैस की किल्लत को देखते हुए बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने फिलहाल कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम? एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक ऐसा कानून है, जो सरकार को यह ताकत देता है कि वह किसी भी जरूरी चीज जैसे- अनाज, दालें, खाने का तेल, दवाइयां या ईंधन की सप्लाई और कीमतों को कंट्रोल कर सके। इसे आसान भाषा में ‘जमाखोरी रोकने वाला कानून’ कह सकते हैं। जब कभी किसी चीज की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने लगती हैं, तो सरकार इस कानून को लागू कर देती है। इसके तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की एक लिमिट तय कर दी जाती है कि वे एक सीमा से ज्यादा सामान गोदामों में नहीं भर सकते। बिहार में वर्तमान खपत की क्या स्थिति है? बिहार में करीब 1.8 से 2 करोड़ घरेलू गैस कनेक्शन हैं और एक उपभोक्ता औसतन साल में लगभग 5-6 सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) इस्तेमाल करता है। इस आधार पर बिहार में सालाना लगभग 11–12 करोड़ घरेलू गैस सिलेंडर की खपत मानी जाती है। इसी औसत के आधार पर बिहार में प्रतिदिन करीब 30 से 33 लाख LPG सिलेंडर की खपत होती है। वजन के हिसाब से यह लगभग 1200 से 1400 टन गैस प्रतिदिन के बराबर है, जिसमें मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं की ओर से इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस शामिल है। बिहार में LPG गैस सिलेंडर को लेकर कहां ज्यादा परेशानी दिखी? लखीसराय: पायल रेस्टोरेंट के संचालक साहिल कुमार ने बताया कि वे पिछले दो दिनों से गैस के लिए कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। नंबर लगाने की कोशिश करते हैं, लेकिन फोन ही नहीं लग रहा। खगड़िया: प्रभास कुमार ने बताया कि हमारा गैस शनिवार को ही खत्म हो गया था। रविवार को एजेंसी बंद थी और सोमवार को ऑफिस बंद रहता है, लेकिन मंगलवार को भी एजेंसी बंद होने से वे परेशान हैं। हम प्राइवेट नौकरी छोड़कर गैस लेने आए हैं, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही। मोतिहारी: हत्ता बक्सर के रहने वाले अनिल कुमार ने कहा कि पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं हुई। जब भी गैस लेने आए, सिलेंडर मिल जाता था। लेकिन इस बार एजेंसी का नंबर नहीं उठ रहा और गूगल पर भी सही संपर्क नंबर नहीं मिल रहा। छपरा: धनंजय कुमार ने बताया कि गैस एजेंसियों में खाली सिलेंडरों का ढेर लग रहा है, लेकिन आपूर्ति उस अनुपात में नहीं हो रहा है। इससे लोगों में गैस को लेकर पैनिक का माहौल बन गया है। इजराइल-ईरान युद्ध की खबरों से भी लोगों की चिंता बढ़ गई है। गोपालगंज: सोनू ने बताया कि वे सुबह 6 बजे से गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लगे हैं। काम पर भी जाना होता है, लेकिन गैस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। औरंगाबाद: ब्लॉक मोड़ स्थित सवेरा एचपी गैस एजेंसी के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी लाइन लग गई। भीड़ बढ़ने के बाद एजेंसी संचालक ने मुख्य गेट बंद कर दिया और कई लोग बिना गैस लिए लौट गए। पचरुखिया के बिरजू यादव ने बताया कि बेटी की शादी के लिए छह सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन एजेंसी के चक्कर लगाने के बाद भी गैस नहीं मिल रहा है। दरभंगा: बहेड़ी बाजार समेत कई गैस एजेंसियों के बाहर सुबह चार-पांच बजे से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतार लग रही है। कई लोगों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गैस की आपूर्ति कम होने के कारण सिलेंडर मिलने में काफी परेशानी हो रही है। मजदूरी और काम छोड़कर लोगों को लाइन में लगना पड़ रहा है। यहां स्थिति फिलहाल सामान्य और नियंत्रित नालंदा: यहां घरेलू गैस की किल्लत नहीं बताई जा रही है। हालांकि, कमर्शियल गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे होटल और छोटे कारोबारियों को परेशानी हो रही है। समस्तीपुर: यहां भी घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य है। लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण दुकानदारों को कुछ दिक्कत हो रही है। बेगूसराय: बेगूसराय में गैस की कोई किल्लत नहीं है। इंडियन ऑयल की बरौनी रिफाइनरी से एजेंसियों को पर्याप्त मात्रा में गैस मिल रही है, जिससे लोगों को समय पर सिलेंडर उपलब्ध हो रहा है। किशनगंज: किशनगंज गैस एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। लोग बेवजह घबराकर गैस लेने पहुंच रहे हैं, जबकि आपूर्ति सामान्य है। सुपौल: सुपौल में फिलहाल हालात सामान्य हैं। शहर के एक एजेंसी संचालक ने बताया कि न्यूज में युद्ध की जानकारी पढ़कर लोग पैनिक जरूर हुए। जिस कारण एजेंसी के बाहर भीड़ लगाने लग गए। लेकिन यहां स्टॉक पूरा है। गैस की कोई कमी नहीं है। कब तक सामान्य हो सकते हैं हालात इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (एलपीजी) के.एम. ठाकुर के अनुसार, उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है और अनावश्यक बुकिंग से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक स्रोतों से गैस मंगाने के विकल्प भी तलाश रही है। बताया जा रहा है कि अमेरिका समेत कुछ अन्य देशों से अतिरिक्त एलपीजी कार्गो मंगाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं वैश्विक स्तर पर जी-7 देश भी अपने आपातकालीन तेल भंडार से सप्लाई बढ़ाने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। इसके अलावा रूस और अल्जीरिया जैसे देशों से भी अतिरिक्त कच्चा तेल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर ये आपूर्ति शुरू होती है तो आने वाले दिनों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है। जमाखोरी और कालाबाजारी पर रखें विशेष नजर स्पेशल ब्रांच के DIG ने सभी डिविजनल के कमिश्नर, सभी रेंज के IG, DIG, सभी DM और SSP/SP को अलर्ट लेटर भेजा है। लेटर के जरिए कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण LPG गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में कमी होने की आशंका के मद्देनजर सतर्कता बरतने की जरूरत है। प्रदेश के गैस एजेंसियों, विक्रेताओं और पेट्रोल पंपो पर आम नागरिकों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। ऐसे स्थिति में भीड़ होने से अव्यवस्था हो सकती है। विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। असामाजिक तत्वों की ओर से गैस सिलेंडर और पेट्रोलियम पदार्थों की जमाखोरी और कालाबाजारी किए जाने की आशंका है। इसको लेकर अपने-अपने जिलों में निगरानी रखें। गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों के आसपास विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें। ‘गैस के लिए हम सुबह से यहां बैठे हैं। 6 घंटे हो गए हैं। ऑफिस भी बंद है। बोला गया कि नंबर लगाइए, लेकिन नंबर तब ही लगेगा, जब वो आएंगे। घर से कई बार मोबाइल से नंबर लगाने की कोशिश की, लेकिन नहीं लगा। फिर ऑफिस आए। यहां भी बैठे-बैठे परेशान हो गए हैं। कोई आगे की जानकारी देने वाला भी नहीं है। ऐसे में कारोबार कैसे चलेगा।’ मधेपुरा के पुरानी बाजार चौक के पवन साह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही। दरअसल, मंगलवार को मधेपुरा ही नहीं, लखीसराय, खगड़िया, मोतिहारी, छपरा, गोपालगंज समेत बिहार के 10 से ज्यादा जिलों में लोगों को गैस नहीं मिलने की शिकायतें आईं। हालांकि, एजेंसियों का दावा है कि उनके पास गैस का स्टॉक है। लोग बेवजह पैनिक हो रहे हैं। आखिर लोग एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर इतने परेशान क्यों हैं? कॉमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर लोगों और सिलेंडर डिलीवर करने वाले एजेंसियों का क्या कहना है? पढ़िए, पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले एजेंसियों से आई 2 तस्वीरें देखिए अब जानिए कॉमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर के डीलर का क्या कहना है? मोतिहारी के डीलर सुभाष गुप्ता ने बताया कि लोगों में इजराइल-अमेरिका और इरान युद्ध को लेकर भय फैल गया है। इसकी वजह से लोग अपने-अपने इलाके से गैस गोदाम पर पहुंच रहे हैं। यहां गैस की आपूर्ति पूरी है। हम होम डिलीवरी की तैयारी कर रहे हैं, फिर भी लोग यहां भीड़ लगा रहे हैं। हमारे पास 25 दिनों का स्टॉक है। दरअसल, केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955’ लागू कर दिया है। होर्मुज जल मार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई ठप होने के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है। गैस की किल्लत को देखते हुए बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने फिलहाल कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम? एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक ऐसा कानून है, जो सरकार को यह ताकत देता है कि वह किसी भी जरूरी चीज जैसे- अनाज, दालें, खाने का तेल, दवाइयां या ईंधन की सप्लाई और कीमतों को कंट्रोल कर सके। इसे आसान भाषा में ‘जमाखोरी रोकने वाला कानून’ कह सकते हैं। जब कभी किसी चीज की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने लगती हैं, तो सरकार इस कानून को लागू कर देती है। इसके तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की एक लिमिट तय कर दी जाती है कि वे एक सीमा से ज्यादा सामान गोदामों में नहीं भर सकते। बिहार में वर्तमान खपत की क्या स्थिति है? बिहार में करीब 1.8 से 2 करोड़ घरेलू गैस कनेक्शन हैं और एक उपभोक्ता औसतन साल में लगभग 5-6 सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) इस्तेमाल करता है। इस आधार पर बिहार में सालाना लगभग 11–12 करोड़ घरेलू गैस सिलेंडर की खपत मानी जाती है। इसी औसत के आधार पर बिहार में प्रतिदिन करीब 30 से 33 लाख LPG सिलेंडर की खपत होती है। वजन के हिसाब से यह लगभग 1200 से 1400 टन गैस प्रतिदिन के बराबर है, जिसमें मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं की ओर से इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस शामिल है। बिहार में LPG गैस सिलेंडर को लेकर कहां ज्यादा परेशानी दिखी? लखीसराय: पायल रेस्टोरेंट के संचालक साहिल कुमार ने बताया कि वे पिछले दो दिनों से गैस के लिए कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। नंबर लगाने की कोशिश करते हैं, लेकिन फोन ही नहीं लग रहा। खगड़िया: प्रभास कुमार ने बताया कि हमारा गैस शनिवार को ही खत्म हो गया था। रविवार को एजेंसी बंद थी और सोमवार को ऑफिस बंद रहता है, लेकिन मंगलवार को भी एजेंसी बंद होने से वे परेशान हैं। हम प्राइवेट नौकरी छोड़कर गैस लेने आए हैं, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही। मोतिहारी: हत्ता बक्सर के रहने वाले अनिल कुमार ने कहा कि पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं हुई। जब भी गैस लेने आए, सिलेंडर मिल जाता था। लेकिन इस बार एजेंसी का नंबर नहीं उठ रहा और गूगल पर भी सही संपर्क नंबर नहीं मिल रहा। छपरा: धनंजय कुमार ने बताया कि गैस एजेंसियों में खाली सिलेंडरों का ढेर लग रहा है, लेकिन आपूर्ति उस अनुपात में नहीं हो रहा है। इससे लोगों में गैस को लेकर पैनिक का माहौल बन गया है। इजराइल-ईरान युद्ध की खबरों से भी लोगों की चिंता बढ़ गई है। गोपालगंज: सोनू ने बताया कि वे सुबह 6 बजे से गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लगे हैं। काम पर भी जाना होता है, लेकिन गैस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। औरंगाबाद: ब्लॉक मोड़ स्थित सवेरा एचपी गैस एजेंसी के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी लाइन लग गई। भीड़ बढ़ने के बाद एजेंसी संचालक ने मुख्य गेट बंद कर दिया और कई लोग बिना गैस लिए लौट गए। पचरुखिया के बिरजू यादव ने बताया कि बेटी की शादी के लिए छह सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन एजेंसी के चक्कर लगाने के बाद भी गैस नहीं मिल रहा है। दरभंगा: बहेड़ी बाजार समेत कई गैस एजेंसियों के बाहर सुबह चार-पांच बजे से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतार लग रही है। कई लोगों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गैस की आपूर्ति कम होने के कारण सिलेंडर मिलने में काफी परेशानी हो रही है। मजदूरी और काम छोड़कर लोगों को लाइन में लगना पड़ रहा है। यहां स्थिति फिलहाल सामान्य और नियंत्रित नालंदा: यहां घरेलू गैस की किल्लत नहीं बताई जा रही है। हालांकि, कमर्शियल गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे होटल और छोटे कारोबारियों को परेशानी हो रही है। समस्तीपुर: यहां भी घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य है। लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण दुकानदारों को कुछ दिक्कत हो रही है। बेगूसराय: बेगूसराय में गैस की कोई किल्लत नहीं है। इंडियन ऑयल की बरौनी रिफाइनरी से एजेंसियों को पर्याप्त मात्रा में गैस मिल रही है, जिससे लोगों को समय पर सिलेंडर उपलब्ध हो रहा है। किशनगंज: किशनगंज गैस एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। लोग बेवजह घबराकर गैस लेने पहुंच रहे हैं, जबकि आपूर्ति सामान्य है। सुपौल: सुपौल में फिलहाल हालात सामान्य हैं। शहर के एक एजेंसी संचालक ने बताया कि न्यूज में युद्ध की जानकारी पढ़कर लोग पैनिक जरूर हुए। जिस कारण एजेंसी के बाहर भीड़ लगाने लग गए। लेकिन यहां स्टॉक पूरा है। गैस की कोई कमी नहीं है। कब तक सामान्य हो सकते हैं हालात इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (एलपीजी) के.एम. ठाकुर के अनुसार, उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है और अनावश्यक बुकिंग से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक स्रोतों से गैस मंगाने के विकल्प भी तलाश रही है। बताया जा रहा है कि अमेरिका समेत कुछ अन्य देशों से अतिरिक्त एलपीजी कार्गो मंगाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं वैश्विक स्तर पर जी-7 देश भी अपने आपातकालीन तेल भंडार से सप्लाई बढ़ाने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। इसके अलावा रूस और अल्जीरिया जैसे देशों से भी अतिरिक्त कच्चा तेल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर ये आपूर्ति शुरू होती है तो आने वाले दिनों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है। जमाखोरी और कालाबाजारी पर रखें विशेष नजर स्पेशल ब्रांच के DIG ने सभी डिविजनल के कमिश्नर, सभी रेंज के IG, DIG, सभी DM और SSP/SP को अलर्ट लेटर भेजा है। लेटर के जरिए कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण LPG गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में कमी होने की आशंका के मद्देनजर सतर्कता बरतने की जरूरत है। प्रदेश के गैस एजेंसियों, विक्रेताओं और पेट्रोल पंपो पर आम नागरिकों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। ऐसे स्थिति में भीड़ होने से अव्यवस्था हो सकती है। विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। असामाजिक तत्वों की ओर से गैस सिलेंडर और पेट्रोलियम पदार्थों की जमाखोरी और कालाबाजारी किए जाने की आशंका है। इसको लेकर अपने-अपने जिलों में निगरानी रखें। गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों के आसपास विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।


