LPG Cylinder Update: मृत लोगों के नाम पर मिल रहा सिलेंडर, जिंदा लाइन में… राजस्थान के इस जिले में एजेंसियों का नया खेल

LPG Cylinder Update: मृत लोगों के नाम पर मिल रहा सिलेंडर, जिंदा लाइन में… राजस्थान के इस जिले में एजेंसियों का नया खेल

केस एक : चांदपोल गेट के पास मोहल्ला कारीगरान निवासी इम्तियाज सोलंकी की माता के नाम रसोई गैस कंपनी का कनेक्शन था, जिनका निधन चार वर्ष पूर्व हो गया था। कनेक्शन में दर्ज मोबाइल नंबर पर सिलेंडर की डिलीवरी के मैसेज आ रहे हैं, जबकि कोई सिलेंडर डिलीवरी नहीं दी गई।

केस दो : देवीपुरा कोठी निवासी अनिता (बदला हुआ नाम) ने 20 मार्च को रसोई गैस की बुकिंग के साथ ऑनलाइन पेमेंट किया। बुकिंग के चार दिन बाद सिलेंडर आउट फॉर डिलीवरी का मैसेज आ गया, लेकिन आठ दिन बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं की गई। एजेंसी से संपर्क किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

सीकर। यह केवल दो उदाहरण मात्र नहीं हैं। वैश्विक तनाव के बाद घरेलू गैस एजेंसियों की मनमानी और फर्जीवाड़े बढ़ते जा रहे हैं। कंपनी और एजेंसी संचालकों की गड़बड़ी का एक बड़ा खुलासा सामने आया है। यहां एजेंसियां उपभोक्ताओं के नाम पर सिलेंडर जारी कर अवैध बिक्री कर रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कई मामलों में दिवंगत उपभोक्ताओं के नाम पर भी सिलेंडर बुक कर डिलीवरी दिखा दी गई, जबकि वास्तविक आपूर्ति हुई ही नहीं।

आश्चर्य की बात है कि बुकिंग वाले सिलेंडरों के लिए उपभोक्ताओं को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं, जबकि बिना बुकिंग के सिलेंडरों की डिलीवरी बिना किसी परेशानी के हो रही है। उपभोक्ताओं के अनुसार रसोई गैस की किल्लत नहीं हो, इसके लिए गैस एजेंसियां बुकिंग के समय केवाईसी और बीमा करवाने की अनिवार्यता के नाम पर कतारों में खड़ा कर रही हैं, जबकि यह प्रक्रिया सिलेंडर देने के बाद भी की जा सकती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसियों की यह मनमानी आपदा के समय सरकार की व्यवस्थाओं के दावों की हकीकत उजागर कर रही है। समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इस तरह कर रहे फर्जीवाड़ा

मृत कनेक्शन धारकों के परिजनों की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जमा नहीं करवाने के कारण कनेक्शन कागजों में चालू रहते हैं। एक कनेक्शन धारक को साल में 12 सिलेंडर रीफिल मिलते हैं, लेकिन कई परिवार इस कोटे का पूरा उपयोग नहीं कर पाते। वहीं कुछ मामलों में कोटा पूरा होने के बाद भी बुकिंग जारी रहती है। इसका फायदा उठाकर एजेंसी संचालक ऐसे कनेक्शनों को कागजों में सक्रिय रखते हैं और समय-समय पर बुकिंग दिखाकर सिलेंडर जारी करते हैं, जो कालाबाजारी में उपयोग होते हैं। कई बार बिना ओटीपी बताए भी सिलेंडर की डिलीवरी दर्ज कर दी जाती है।

कार्रवाई के नाम पर महज नोटिस

कंपनियों की ओर से नियमित मॉनिटरिंग के बावजूद उपभोक्ताओं की रीफिल डिलीवरी और अधिक राशि वसूली से जुड़ी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। अधिक दबाव बनाने पर एजेंसियों को केवल नोटिस देकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि मौजूदा समय में रीफिल वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है।

यह वीडियो भी देखें

वैश्विक तनाव का हवाला देकर आम उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है, जबकि होटल और ढाबों में घरेलू गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ओटीपी आधारित डिलीवरी को उपभोक्ता के सामने अनिवार्य रूप से सत्यापित किया जाए और मृत उपभोक्ताओं के कनेक्शनों का नियमित सत्यापन कर उन्हें बंद किया जाए, ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

फैक्ट फाइल

जिले में रसोई गैस एजेंसियां: लगभग 60
सिलेंडर डिलीवरी रोजाना: पंद्रह से सत्रह हजार
हर माह खपत: साढ़े चार लाख सिलेंडर
कनेक्शन धारक: नौ लाख
मौजूदा समय में बुकिंग का दबाव: लगभग 25 से 30 प्रतिशत

इनका कहना है

इस समय पैनिक बुकिंग ज्यादा हो रही है। सिलेंडर डिलीवरी से पहले ओटीपी बताना उपभोक्ता की गलती है। मृत व्यक्ति के परिजनों को एजेंसी पर जाकर दस्तावेज जमा करवाने चाहिए।

  • रिजवान, सेल्स ऑफिसर बीपीसीएल

सिलेंडर रीफिल की डिलीवरी ओटीपी बताने पर ही दी जाएगी। कालाबाजारी को रोकने के लिए सभी गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंप संचालकों को अपने व्यवसायिक परिसर और गोदामों पर 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • विजेन्द्र पाल, जिला रसद अधिकारी सीकर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *