मंगला आरती से भगवान हनुमान जन्मोत्सव की शुरुआत:तीन बजे ही मुख्य हॉल भर गया था खचाखच; चार बजे खुले मंदिर के पट

मंगला आरती से भगवान हनुमान जन्मोत्सव की शुरुआत:तीन बजे ही मुख्य हॉल भर गया था खचाखच; चार बजे खुले मंदिर के पट

जिले के प्रसिद्ध हनुमान टेकरी मंदिर पर भगवान हनुमान जन्मोत्सव की शुरुआत मंगला आरती के साथ हुई। सुबह 4 बजे जयकारों के साथ आरती की गई। इसी करा साथ ही दो दिवसीय मेले की शुरुआत हो गई है। दिन भर में दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के मंगला आरती के लिए रात 3:30 बजे ही मुख्य हॉल श्रद्धालुओं से भर चुका था। बाकी आये नागरिकों को बाहर ही रोक दिया गया। प्रशासनिक और पुलिस का अमला रात 1 बजे से ही मंदिर पर पहुंचकर व्यवस्थाएं संभालने में जुट गया था। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुले। पूरा हॉल ‘जय बजरंग बली’ के नारों से गुंजायमान हो गया। मंगला आरती के साथ भगवान हनुमान जन्मोत्सव की शुरुआत हुई। 20 मिनिट तक आरती के बाद मंदिर सभी के लिए खोल दिया गया। इसके बाद से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार बना हुआ है।
पूर्व विधायक संभाल रहे जूता स्टैंड आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कार्यालय के पास जूता स्टैंड बनाया गया है। इसकी व्यवस्थाएं पूर्व विधायक और पूर्ण नगरपालिका अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सलूजा संभाल रहे हैं। बाकी वॉलंटियर्स के साथ वे खुद जूते रखने में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले 36 वर्षों से ये सेवा करते आ रहे हैं। विधायक रहने हुए भी वह हर साल हनुमान जयंती पर जूता स्टैंड की व्यवस्थाएं संभालते थे।
तस्वीरों में देखिए आयोजन…
बता दें कि गुना जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर प्राचीन हनुमान टेकरी मंदिर है। यह मंदिर महाभारत काल का है। यहां धनुर्धर कर्ण ने भी तपस्या की थी। बताया जाता है कि यहां हनुमान जी की मूर्ति 7वीं शताब्दी की स्वयं प्रकट हुई है। यह साधु-संतों की तपोभूमि का केंद्र भी रहा है। यहां दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा है।
जीणोद्धार के समय मिले थे सोने के सिक्के बताते हैं कि मढ़िया से मंदिर बनाने के लिए जब इस जगह का जीणोद्धार किया जा रहा था, तब खुदाई में सोने के सिक्के मिले थे। वहां मंदिर के नीचे की तरफ एक पत्थर हटाया गया, तो बड़ी संख्या में सांप निकले। सांप इतने ज्यादा थे कि उस जगह को वापस बंद करना पड़ा। वहां खुदाई बंद करनी पड़ी। कहा तो यह भी जाता है कि खुदाई में कुछ साधुओं की समाधि भी मिली थीं।
नाग देवता करते हैं मंदिर की पहरेदारी ट्रस्ट के अध्यक्ष नारायण अग्रवाल ने बताया कि जब यहां मढ़िया थी, तो उसके गेट से चमेली की बेल लगी थी। उस बेल पर हमेशा नाग देवता रहते थे। वह हर समय बालाजी सरकार की पहरेदारी किया करते थे। मंदिर के जीणोद्धार के बाद भी पीछे के पेड़ पर अकसर नाग देवता दिखाई देते हैं। आज भी वह हर समय मंदिर की पहरेदारी कर रहे हैं।
रात में नहीं रुकता कोई मुख्य मंदिर में रात के समय कोई नहीं रुकता। ऐसी किवदंती है कि रात के समय में यहां मीटिंग होती है। पास की पहाड़ियों पर से देवता आते हैं। उनकी बैठकों का दौर चलता है। एक किवदंती यह भी है कि रात को राम टेकरी से यहां तक बारात आती है। कई प्रकार की रोशनी यहां दिखाई देती है। आसपास के ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने कई बार ऐसी रोशनी वहां देखी है। यही वजह है कि रात में यहां कोई नहीं रुकता।
बाबा को पसंद है बूंदी के लड्डू ट्रस्ट के सदस्यों ने बताया कि बाबा का पसंदीदा भोग बूंदी और बेसन के लड्डू ैहैं, इसीलिए आरती के तुरंत बाद सबसे पहले बालाजी सरकार को बूंदी और बेसन के लड़्ड्र का भोग लगाया जाता है। इसके बाद फल और सूखे मेवे अर्पित किए जाते हैं। हर वर्ष कई क्विंटल बूंदी बनाई जाती है। इसी का प्रसाद भी बांटा जाता है।
जिंद बाबा को चढ़ती है सिगरेट टेकरी परिसर में पीछे की तरफ जिंद बाबा का सिद्धस्थल है। यहां काफी लोग मन्नत मांगने पहुंचते हैं। मन्नत पूरी होने पर यहां झूला चढ़ाया जाता है। वहीं, बाबा पर सिगरेट का भोग लगाया जाता है।

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