आस्था और भक्ति के महापर्व महाशिवरात्रि पर रविवार को किशनगंज में श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह की पहली किरण के साथ ही शिव भक्त जल, दूध, बेलपत्र और फल-फूल लेकर मंदिरों की ओर निकल पड़े। हर सड़क, हर चौक से होकर ‘हर हर महादेव’ की गूंज सुनाई देती रही। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी भक्तिमय माहौल में शिव आराधना में डूबे रहे। हर शिवालय में उमड़ी अपार भीड़ जिले के प्रमुख शिवालयों भूतनाथ गौशाला शिव मंदिर, थिरानी धर्मशाला शिव मंदिर, ठाकुरगंज हरगौरी मंदिर, मनोरंजन क्लब शिव मंदिर, श्री विष्णु राधा कृष्ण हनुमान मंदिर, महावीर मार्ग हनुमान मंदिर, रेलवे कॉलोनी हनुमान मंदिर, डे मार्केट शिव मंदिर, अस्पताल रोड शीतला मंदिर, रमजान पुल शिव मंदिर, लाइन बूढ़ी काली, पश्चिमपाली और उत्तरपाली दुर्गा मंदिर, रुईधासा महाकाल मंदिर, तेघरिया बाल मंदिर चौक हनुमान मंदिर, मेडिकल कॉलेज रोड शिव मंदिर, मोतिबाग काली मंदिर और ढेकसरा काली मंदिर में सुबह से देर शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रही। हर मंदिर के बाहर जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखी गईं। स्वयंसेवकों की ओर से भक्तों को लाइन प्रबंधन और प्रसाद वितरण में मदद दी गई। 130 साल पुराने हरगौरी मंदिर में आस्था का महासागर महाशिवरात्रि पर सबसे ज्यादा भीड़ ठाकुरगंज के 130 साल पुराने हरगौरी मंदिर में उमड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल से हजारों भक्त यहां जलाभिषेक करने पहुंचे। लोगों का मानना है कि यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग पर जल चढ़ाने से सभी संकट दूर होते हैं। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग और माता पार्वती की संयुक्त प्रतिमा के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। सिद्धपीठ की ऐतिहासिक मान्यता साल 1901 में स्थापित यह प्राचीन सिद्धपीठ अपनी विशिष्टता के कारण क्षेत्र के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां मौजूद स्वयंभू शिवलिंग पर माता पार्वती की प्रतिमा उकेरी हुई है, जो इसे इस इलाके में अद्वितीय बनाती है। मान्यता है कि इस मंदिर में की गई पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। टैगोर परिवार से जुड़ा है मंदिर का इतिहास हरगौरी मंदिर का इतिहास टैगोर (ठाकुर) परिवार से भी जुड़ा है। 19वीं शताब्दी के अंत में इस क्षेत्र के विकास और मंदिर के जीर्णोद्धार में ठाकुर परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी कारण यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी खास पहचान रखता है। आज यह स्थल बिहार, बंगाल, नेपाल की सांस्कृतिक सीमा पर आस्था का मजबूत केंद्र माना जाता है। फूलों और रोशनी से सजा मंदिर परिसर, रातभर चलेगी पूजा महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर को फूलों की झालरों, रंगीन लाइटों और आकर्षक सजावट से दुल्हन की तरह सजाया गया। भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। जलाभिषेक के लिए अलग लाइन, महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग गलियारा, मेडिकल कैंप और प्राथमिक उपचार केंद्र, प्रसाद और शरबत वितरण, रातभर मंदिर में भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक चलता रहेगा। शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने प्रमुख मंदिरों के बाहर बैरिकेडिंग लगाई। पुलिस बल और स्वयंसेवकों की टीम लगातार भीड़ नियंत्रित करने में लगी रही। कलेक्टरेट और नगरपालिका की टीमों ने सफाई और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की। महाशिवरात्रि पर पूरे किशनगंज ने शिव भक्ति में खुद को समर्पित कर दिया। शिवालयों में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आस्था की डोर आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती से थामे हुए है। 130 साल पुराने हरगौरी मंदिर से लेकर शहर के हर छोटे-बड़े शिवालय तक हर जगह भक्ति, विश्वास और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। आस्था और भक्ति के महापर्व महाशिवरात्रि पर रविवार को किशनगंज में श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह की पहली किरण के साथ ही शिव भक्त जल, दूध, बेलपत्र और फल-फूल लेकर मंदिरों की ओर निकल पड़े। हर सड़क, हर चौक से होकर ‘हर हर महादेव’ की गूंज सुनाई देती रही। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी भक्तिमय माहौल में शिव आराधना में डूबे रहे। हर शिवालय में उमड़ी अपार भीड़ जिले के प्रमुख शिवालयों भूतनाथ गौशाला शिव मंदिर, थिरानी धर्मशाला शिव मंदिर, ठाकुरगंज हरगौरी मंदिर, मनोरंजन क्लब शिव मंदिर, श्री विष्णु राधा कृष्ण हनुमान मंदिर, महावीर मार्ग हनुमान मंदिर, रेलवे कॉलोनी हनुमान मंदिर, डे मार्केट शिव मंदिर, अस्पताल रोड शीतला मंदिर, रमजान पुल शिव मंदिर, लाइन बूढ़ी काली, पश्चिमपाली और उत्तरपाली दुर्गा मंदिर, रुईधासा महाकाल मंदिर, तेघरिया बाल मंदिर चौक हनुमान मंदिर, मेडिकल कॉलेज रोड शिव मंदिर, मोतिबाग काली मंदिर और ढेकसरा काली मंदिर में सुबह से देर शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रही। हर मंदिर के बाहर जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखी गईं। स्वयंसेवकों की ओर से भक्तों को लाइन प्रबंधन और प्रसाद वितरण में मदद दी गई। 130 साल पुराने हरगौरी मंदिर में आस्था का महासागर महाशिवरात्रि पर सबसे ज्यादा भीड़ ठाकुरगंज के 130 साल पुराने हरगौरी मंदिर में उमड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल से हजारों भक्त यहां जलाभिषेक करने पहुंचे। लोगों का मानना है कि यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग पर जल चढ़ाने से सभी संकट दूर होते हैं। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग और माता पार्वती की संयुक्त प्रतिमा के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। सिद्धपीठ की ऐतिहासिक मान्यता साल 1901 में स्थापित यह प्राचीन सिद्धपीठ अपनी विशिष्टता के कारण क्षेत्र के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां मौजूद स्वयंभू शिवलिंग पर माता पार्वती की प्रतिमा उकेरी हुई है, जो इसे इस इलाके में अद्वितीय बनाती है। मान्यता है कि इस मंदिर में की गई पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। टैगोर परिवार से जुड़ा है मंदिर का इतिहास हरगौरी मंदिर का इतिहास टैगोर (ठाकुर) परिवार से भी जुड़ा है। 19वीं शताब्दी के अंत में इस क्षेत्र के विकास और मंदिर के जीर्णोद्धार में ठाकुर परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी कारण यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी खास पहचान रखता है। आज यह स्थल बिहार, बंगाल, नेपाल की सांस्कृतिक सीमा पर आस्था का मजबूत केंद्र माना जाता है। फूलों और रोशनी से सजा मंदिर परिसर, रातभर चलेगी पूजा महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर को फूलों की झालरों, रंगीन लाइटों और आकर्षक सजावट से दुल्हन की तरह सजाया गया। भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। जलाभिषेक के लिए अलग लाइन, महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग गलियारा, मेडिकल कैंप और प्राथमिक उपचार केंद्र, प्रसाद और शरबत वितरण, रातभर मंदिर में भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक चलता रहेगा। शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने प्रमुख मंदिरों के बाहर बैरिकेडिंग लगाई। पुलिस बल और स्वयंसेवकों की टीम लगातार भीड़ नियंत्रित करने में लगी रही। कलेक्टरेट और नगरपालिका की टीमों ने सफाई और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की। महाशिवरात्रि पर पूरे किशनगंज ने शिव भक्ति में खुद को समर्पित कर दिया। शिवालयों में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आस्था की डोर आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती से थामे हुए है। 130 साल पुराने हरगौरी मंदिर से लेकर शहर के हर छोटे-बड़े शिवालय तक हर जगह भक्ति, विश्वास और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।


