एमबीएस अस्पताल: न्यू ओपीडी ब्लॉक की इमरजेंसी के तीन साल बाद ताले खुले

एमबीएस अस्पताल: न्यू ओपीडी ब्लॉक की इमरजेंसी के तीन साल बाद ताले खुले

Kota News : एमबीएस अस्पताल में गुरुवार को तीन साल बाद न्यू ओपीडी ब्लॉक की इमरजेंसी के तीन साल बाद ताले खुले। यहां आपातकालीन वार्ड एवं ओपीडी सुविधाओं का उद्घाटन मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. संगीता सक्सेना, अस्पताल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा, उप अधीक्षक डॉ. कर्णेश गोयल व अन्य सभी विभागों के विभागाध्यक्षों ने फीता काटकर उद्घाटन किया। कार्यक्रम में एमबीएस अस्पताल का समस्त चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ उपस्थित रहा।

प्रिंसिपल डॉ. सक्सेना ने बताया कि पूर्व में आपातकालीन सेवाएं पुराने भवन में संचालित हो रही थीं। मरीजों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नई इमरजेंसी सुविधा शुरू की गई है, जिससे रोगियों को त्वरित और बेहतर उपचार मिल सकेगा।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा ने बताया कि नए भवन में आपातकालीन वार्ड के साथ आईसीयू का भी उद्घाटन किया गया। इससे इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी और इलाज में होने वाली देरी कम होगी। नए भवन में 15 बेड मेडिसिन व 15 बेड सर्जरी के लिए लगाए गए है।

राजस्थान पत्रिका ने उठाया था मामला

राजस्थान पत्रिका ने 20 नवम्बर के अंक में एमबीएस अस्पताल में न्यू ओपीडी ब्लॉक की इमरजेंसी के तीन साल बाद खुलेंगे ताले शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया गया था कि कोटा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अस्पताल में करीब 40 करोड़ की लागत से तैयार नए ओपीडी भवन के इमरजेंसी कक्ष के ताले आखिरकार तीन साल बाद खुलेंगे। हालांकि यह सुविधा दिसम्बर में शुरू होनी थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से एक माह और बढ़ा दिया गया था।

ऑक्सीजन पाइप लाइन डालना भूल गए थे

हैरिटेज लुक में बने इस भवन का उद्घाटन तो 21 अक्टूबर 2022 को हो गया था। निर्माण प्रावधानों में यूआईटी अब केडीए के ठेकेदार को यहां ऑक्सीजन पाइप लाइन डालना भी था, लेकिन वह भूल गया था। जिसके कारण सेवाएं शुरू नहीं हो सकी। यहां तीन साल से ओपीडी चालू थी, लेकिन आइपीडी नहीं चालू थी। अस्पताल प्रशासन ने दोबारा निविदा जारी कर ऑक्सीजन पाइप लाइन डलवाई। उसके बाद अब जाकर इसे चालू किया गया।

एक कमरे में चलती थी इमरजेंसी सुविधा

पहले अस्पताल में 125 नंबर कक्ष में पुरानी इमरजेंसी सुविधा संचालित थी। यहां भवन जर्जर हालात में पहुंच चुका था। दीवारों पर सीलन आ चुकी थी। इसके बावजूद चिकित्सक यहां सेवाएं दे रहे थे।

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