Bijbehara Pahalgam Railway Line के विरोध में उतरे स्थानीय लोग, राजनीतिक दलों का भी मिल रहा समर्थन

Bijbehara Pahalgam Railway Line के विरोध में उतरे स्थानीय लोग, राजनीतिक दलों का भी मिल रहा समर्थन
दक्षिण कश्मीर में प्रस्तावित बिजबेहड़ा से पहलगाम रेल लाइन का विरोध तेज हो गया है। इस 40 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोग, किसान, बागवान और अब राजनीतिक प्रतिनिधि भी खुलकर सड़कों पर उतर आए हैं। उनका साफ कहना है कि यह परियोजना विनाश का रास्ता खोलेगी। हम आपको बता दें कि बिजबेहड़ा अनंतनाग जिले का एक ऐतिहासिक कस्बा है, जो श्रीनगर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है। प्रस्तावित रेल लाइन यहीं से होकर पर्यटन स्थल पहलगाम तक जानी है। लेकिन यह लाइन जिन गांवों और जमीनों से गुजरनी है, वहां के लोग इसे अपने जीवन पर हमला मान रहे हैं।
अनंतनाग पूंछ लोकसभा क्षेत्र से सांसद मियां अल्ताफ ने वुलहरहामा गांव का दौरा कर स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस गांव की सेब की बागवानी और कृषि भूमि प्रस्तावित रेल अलाइनमेंट में आ रही है। लोगों की नाराजगी को साझा करते हुए मियां अल्ताफ ने दो टूक कहा कि यह रेल लाइन किसी के भी काम की नहीं है। न इससे केंद्र सरकार को फायदा है, न जम्मू-कश्मीर सरकार को और न ही यहां के लोगों को। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस परियोजना का कोई उद्देश्य नहीं है और इसे लेकर केंद्र सरकार को सख्त संदेश दिया जाना चाहिए।

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मियां अल्ताफ ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि दोनों को केंद्र को पत्र लिखकर इस परियोजना को रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए। हम आपको बता दें कि दक्षिण कश्मीर के कई गांव दिसंबर 2025 से ही इस परियोजना के खिलाफ खड़े हैं। सर्वे टीमों के गांवों में पहुंचते ही लोगों ने इसे अपनी जमीन, रोजगार और भविष्य पर खतरा बताया। बिजबेहड़ा से विधायक और नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता बशीर अहमद वीरी ने इस परियोजना को जनविरोधी और अव्यवहारिक करार दिया है।
इसी कड़ी में पहलगाम से नेशनल कांफ्रेंस विधायक अल्ताफ अहमद कालू ने भी सवाल उठाया कि जब पहले से सड़क मौजूद है तो रेल लाइन की जरूरत क्या है। उन्होंने कहा कि पहलगाम के लिए समानांतर सड़क को पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग 501 घोषित किया जा चुका है और उसकी जमीन का सीमांकन भी हो चुका है। जब जमीन पहले ही कम है और बड़ा हिस्सा एनएच 501 के लिए लिया जा चुका है, तो फिर 40 किलोमीटर की जिग जैग रेल लाइन का क्या औचित्य है, जो किसी भी तरह से मददगार नहीं होगी। कल्लू ने यह भी बताया कि राजमार्ग परियोजना के कारण पहले ही बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है और इसका निर्माण शीघ्र होने वाला है।
हम आपको यह भी बता दें कि पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने भी इलाके का दौरा कर लोगों के विरोध को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सैंकड़ों कनाल उपजाऊ कृषि भूमि, बागवानी क्षेत्र और रिहायशी मकानों के ऊपर से रेल लाइन निकालना न सिर्फ अव्यवहारिक है बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी टिकाऊ नहीं है। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस योजना को पूरी तरह रद्द करने की अपील की। इल्तिजा मुफ्ती ने जोर देकर कहा कि किसी भी बड़ी परियोजना से पहले सरकार को लोगों से सलाह मशविरा करना चाहिए। अगर कृषि और बागवानी जमीन से रेल लाइन गुजारी गई, तो बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार और बेघर हो जाएंगे। यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

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