गुरुग्राम में पारिवारिक धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। सेक्टर-48 के रहने वाले सुशील कुमार ने सेक्टर-14 पुलिस स्टेशन में अपने भाई, भाभी और भतीजे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। उसने 6 करोड़ 28 लाख रुपये से अधिक के लोन में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया है। यह धोखाधड़ी तब हुई जब सुशील कुमार जुलाई 2017 से जुलाई 2018 तक न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। जेल में बंदी के दौरान ज्वाइंट लोन लिया शिकायतकर्ता सुशील ने बताया कि हिरासत के दौरान वे किसी भी व्यवसाय, दस्तावेज पर हस्ताक्षर या बैंक जाने में असमर्थ था। उनके पास मौजूद दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके भाई सतीश कुमार यादव, भाभी लतीश और लोकेश निवासी डीएलएफ फेज-3, सेक्टर-24 ने विभिन्न बैंकों और एनबीएफसी से मिलीभगत करके उनके नाम पर संयुक्त लोन प्राप्त किए। अलग बैंकों से लिया 6.28 करोड़ का लोन इसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से 74,55,224 रुपये, 2,48,47,187 रुपये, 59,31,361 रुपये के लोन शामिल हैं।ये लोन 2017 में खुले और 2021 तक बंद हुए, जिसमें सेटलमेंट और राइट-ऑफ राशि दर्ज है। इसके अलावा पिरामल फाइनेंस से 1,30,98,000 रुपये, जो 2017 में खुला, 2023 में बंद हो गया। जबकि एडी बिरला कैपिटल से 15,00,000 रुपये का लोन 2018 में खुला, 2022 में बंद हुआ। वहीं कैपरी ग्लोबल से 1,00,00,000 रुपये का लोन 2017 में खुला और बंद हुआ। फर्जी साइन और फेक डॉक्यूमेंट बनवाए उसने आरोप लगाया कि इन लोन में उसके जाली हस्ताक्षर किए गए, दस्तावेज फर्जी बनाए गए और बैंक अधिकारियों ने आवश्यक जांच-परख किए बिना लोन मंजूर कर दिए। हिरासत के दौरान ही इन लोन को अवैध रूप से सेटल किया गया। जिससे उसके नाम पर गलत क्रेडिट हिस्ट्री बन गई। रिहाई के बाद धोखे में रखा रिहाई के बाद आरोपी परिवार ने उन्हें धोखे में रखा और उनकी पत्नी की संपत्ति का गिफ्ट डीड उनके पक्ष में करवा लिया, जिसका मामला सिविल कोर्ट में लंबित है। इससे उसे भारी वित्तीय नुकसान, व्यवसाय से बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना हुई। क्रेडिट खराब होने से नहीं मिल रहा लोन हाल ही में उन्हें 400 करोड़ रुपये के वर्क ऑर्डर मिले, लेकिन क्रेडिट रिपोर्ट में एडवर्स एंट्री के कारण बैंक लोन देने से इनकार कर रहे हैं। उसकी शिकायत पर उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद सेक्टर-14 थाने में केस दर्ज किया गया है। फिलहाल इस केस की जांच ईओडब्ल्यू-2 पुलिस टीम कर रही है।


