अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के डॉक्टरों ने तीन वर्षीय बच्चे के लिवर कैंसर का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। बच्चा हेपेटोब्लास्टोमा (Hepatoblastoma) नामक दुर्लभ और आक्रामक लिवर कैंसर से पीड़ित था। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने बच्चे की ‘राइट हेमीहेपेटेक्टोमी’ (Right Hemihepatectomy) की, जिसमें लिवर के पूरे दाहिने हिस्से को सुरक्षित रूप से निकाला गया। यह एक अत्यंत जटिल सर्जरी थी, जो सात घंटे से अधिक समय तक चली। भारत में ऐसे जटिल ऑपरेशन केवल चुनिंदा विशेषज्ञ केंद्रों में ही संभव हैं, क्योंकि इसके लिए बाल कैंसर सर्जरी में उच्च स्तर की विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। एक ऑपरेशन में दोनों समस्या ठीक हुए लिवर कैंसर के साथ-साथ, बच्चे में जन्मजात विसंगतियां भी पाई गई थीं, जिनमें ‘मेकल्स डाइवर्टिकुलम’ और ‘इनगुइनल हर्निया’ शामिल थे। सर्जिकल टीम ने एक ही ऑपरेशन के दौरान इन दोनों समस्या को भी सफलतापूर्वक ठीक कर दिया, जो टीम के बहु-विषयक दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह सफल ऑपरेशन पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम ने किया गया, जिसमें डॉ. अमित कुमार सिन्हा, डॉ. सौरव श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राशि, डॉ. दिगंबर चौबे और डॉ. गौरव शामिल थे। गैस्ट्रोसर्जरी विभाग से डॉ. उत्पल आनंद और डॉ. बसंत, तथा पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया से डॉ. चांदनी का विशेष सहयोग रहा। रेडियोथेरेपी विभाग की डॉ. प्रितांजलि सिंह और रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. राजीव प्रियदर्शी एवं डॉ. माधुरी द्वारा की गई सटीक प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग ने भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग कैंसर और अन्य जटिल बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को विश्व स्तरीय और आधुनिक इलाज देने के अपने संकल्प को फिर से दोहराता है। डॉ. विशेषज्ञों ने कहा हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के लिए उच्च स्तरीय और बेहतर इलाज देश के भीतर ही आसानी से उपलब्ध हो सके। अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के डॉक्टरों ने तीन वर्षीय बच्चे के लिवर कैंसर का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। बच्चा हेपेटोब्लास्टोमा (Hepatoblastoma) नामक दुर्लभ और आक्रामक लिवर कैंसर से पीड़ित था। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने बच्चे की ‘राइट हेमीहेपेटेक्टोमी’ (Right Hemihepatectomy) की, जिसमें लिवर के पूरे दाहिने हिस्से को सुरक्षित रूप से निकाला गया। यह एक अत्यंत जटिल सर्जरी थी, जो सात घंटे से अधिक समय तक चली। भारत में ऐसे जटिल ऑपरेशन केवल चुनिंदा विशेषज्ञ केंद्रों में ही संभव हैं, क्योंकि इसके लिए बाल कैंसर सर्जरी में उच्च स्तर की विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। एक ऑपरेशन में दोनों समस्या ठीक हुए लिवर कैंसर के साथ-साथ, बच्चे में जन्मजात विसंगतियां भी पाई गई थीं, जिनमें ‘मेकल्स डाइवर्टिकुलम’ और ‘इनगुइनल हर्निया’ शामिल थे। सर्जिकल टीम ने एक ही ऑपरेशन के दौरान इन दोनों समस्या को भी सफलतापूर्वक ठीक कर दिया, जो टीम के बहु-विषयक दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह सफल ऑपरेशन पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम ने किया गया, जिसमें डॉ. अमित कुमार सिन्हा, डॉ. सौरव श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राशि, डॉ. दिगंबर चौबे और डॉ. गौरव शामिल थे। गैस्ट्रोसर्जरी विभाग से डॉ. उत्पल आनंद और डॉ. बसंत, तथा पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया से डॉ. चांदनी का विशेष सहयोग रहा। रेडियोथेरेपी विभाग की डॉ. प्रितांजलि सिंह और रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. राजीव प्रियदर्शी एवं डॉ. माधुरी द्वारा की गई सटीक प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग ने भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग कैंसर और अन्य जटिल बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को विश्व स्तरीय और आधुनिक इलाज देने के अपने संकल्प को फिर से दोहराता है। डॉ. विशेषज्ञों ने कहा हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के लिए उच्च स्तरीय और बेहतर इलाज देश के भीतर ही आसानी से उपलब्ध हो सके।


