पठानकोट में पिछले 5 दिन से रुक-रुककर हुई बारिश रात में भी जारी रही। जिससे तापमान में गिरावट लगातार हो रही है। इससे मौसम तो सुहावना बना हुआ है। लेकिन, लीची और आम की फसल के लिए ये मौसम खतरे की घंटी बन सकता है। बता दें, लीची जोन घोषित हो चुके पठानकोट में बड़ी तादात में लीची और आम की खेती की जाती है। इसके अलावा, यहां 5200 हेक्टेयर के रकबे पर अन्य फलों की खेती हो रही है। लगातार हो रही बरसात से तापमान में गिरावट जारी है। दूसरी ओर मौसम विभाग की ओर से आंधी-तूफान की चेतावनी से बागबानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं हैं। अब अधिक बारिश की स्थिति में आम और लीची की फसल को नुकसान हो सकता है, क्योंकि आम और लीची दोनों में फ्लावरिंग हो रही है। बारिश से फ्लावर ड्रापिंग हो सकती है। जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा। लीची जोन पठानकोट में 2100 हेक्टेयर में लीची की काश्त
जिले में लीची की प्रमुख पैदावार है। जिसके चलते पठानकोट को लीची जोन घोषित किया गया है। वहीं, पंजाब सरकार की और से सुजानपुर में लीची एस्टेट का निर्माण किया गया है। ताकि, बागबानों की लीची को अन्य राज्यों और विदेशों में भेजे जाने तक फ्रैश रखा जा सके। जिले के 2100 हेक्टेयर रकबे पर केवल लीची की काश्त की जाती है। बागवानी विभाग के मुताबिक पिछले साल जिले में 35 हजार मीट्रिक टन लीची की पैदावार हुई थी। जो इस बार बढ़ने के आसार हैं। लेकिन, अगर बारिश अधिक हुई या तेज आंधी चली तो भी बागबानों का नुकसान हो सकता है। इस साल 400 एकड़ एरिया लीची का बढ़ाया गया है। पठानकोट में 24 घंटे में 9.9 एमएम बारिश रिकार्ड मौसम विभाग के मुताबिक, पठानकोट में 24 घंटे में 9.9 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। जबकि, 1 से 20 मार्च तक पठानकोट में 43.5 फीसदी बारिश हुई है। जोकि, पंजाब में सबसे अधिक है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में गरज, हवाएं चलने के साथ ही मध्यम बारिश की संभावना जताई है। 21 मार्च को कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जिससे लीची और आम के काश्तकारों की चिंता बढ़ गई है। सुहावना मौसम बना खतरा पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी (PAU) की बागबानी विभाग माहिर डॉ. मनु त्यागी का कहना है कि आम के पेड़ों के स्वास्थ्य और बेहतर उत्पादन के लिए 24°C से 27°C का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। वहीं, लीची का फल पकने के दौरान (अप्रैल-मई) तापमान 30°C से 35°C के बीच होना चाहिए। अभी दोनों फल फ्लावरिंग स्टेज पर हैं। बौर (मंजर) उग रही हैं। अभी तक किसी नुक्सान की खबर नहीं है। लेकिन, लगातार बारिश हो रही है। तापमान 10 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच बना है। अगर मौसम विभाग की फॉरकास्ट के अनुसार मौसम रहा। आंधी और ओलावृष्टि हुई तो बड़ा नुकसान हो सकता है। कुछ दिनों में दोनों फल मसर के दाने जितने बड़े हो जाएंगे तो तेज हवा भी इस स्टेज पर फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। 5200 हेक्टेयर में फलों की काश्त
हार्टीकल्चर अफसर जितेंद्र कुमार ने बताया कि पठानकोट में सबसे अधिक 2100 हेक्टेयर रकबे पर केवल लीची की काश्त की जाती है। इसके बाद 2000 एकड़ में आम, 600 हेक्टेयर में किन्नू सहित कुल 5200 हेक्टेयर में सिर्फ फलों की काश्त होती है। अभी तक तो नुकसान की कोई सूचना नहीं है। फिर भी बागबानों से मिलकर सर्वे किया जाएगा।


