जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आज बेगूसराय में पत्रकारों से बातचीत की। इन्होंने बिहार नवनिर्माण के लिए फिर पूरी ताकत से पूरे बिहार में नया अभियान शुरू किए हैं। अपने साथ जुड़े सभी साथियों के साथ मिल-बैठकर विधायक विचार कर रहे हैं कि पार्टी को क्या करना चाहिए। लोग क्या चाहते हैं, इन मुद्दों पर बात कर जनता के मुद्दों के अनुसार काम करना है। सरकार में एनडीए है, 200 से अधिक उनके विधायक हैं, तो फिर एनडीए के विधायक सदन में शराबबंदी पर पुनर्विचार की मांग क्यों करते हैं, उन्हें तो पुनर्विचार कर देना चाहिए। अगर बिहार में शराबबंदी से महिलाओं को सशक्तिकरण हो रहा है तो इसे यूपी सहित पूरे देश में लागू किया जाए। अगर यह बढ़िया स्कीम है तो बिहार के महिलाओं के लिए क्यों। पूरे देश की महिलाओं को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है, सबको लाभ मिलना चाहिए। शराबबंदी को पूरे देश में लागू करना चाहिए एनडीए की सरकार बिहार में है और दिल्ली में भी है। अगर बिहार में एनडीए के शराबबंदी स्कीम से महिलाओं का फायदा हो रहा है, तो मोदी जी को इसे देश भर में लागू करना चाहिए। जिससे पूरे देश के महिलाओं को फायदा हो। खुले में मांस बिक्री पर रोक को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा है कि आप जैसी व्यवस्था चुनेंगे, वैसी व्यवस्था पाएंगे, जैसा करेंगे वैसा ही फल मिलेगा। एनडीए की सरकार बनी है तो उनका चलेगा, उनका एजेंडा क्लियर है। हम सुप्रीम कोर्ट गए थे, तो कोर्ट ने कहा कि यह हाईकोर्ट के क्षेत्र का मामला है, हम हाईकोर्ट जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश टिप्पणी किया कि आप चुनाव हारने के बाद आए हैं। इस देश के संविधान की व्यवस्था के अनुसार जिसके साथ अन्याय होता है, वही तो न्यायालय में जाता है। लेकिन यह नया भारत है, यह नए भारत के न्यायाधीश हैं, उन्होंने यह टिप्पणी क्यों की यह वही जानें। नियमों का वर्गीकरण नया उनके डेफिनेशन के हिसाब से न्यायालय में वही जा सकता है, जो चुनाव जीता है, लेकिन जो चुनाव जीता है, वह न्यायालय क्यों जाएगा। जिनको लगता है कि गलत तरीके से चुनाव जीत गया है, वही तो कोर्ट जाएगा। यह नया भारत है, न्यायाधीश नए हैं, नियमों का वर्गीकरण नया है। उनको इस तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहिए, हम लोग हाई कोर्ट की तैयारी कर रहे हैं। कानून व्यवस्था को लेकर कहा कि अभी तीन-चार महीना पहले ही बिहार की जनता ने काफी विश्वास के साथ फिर से एनडीए को वोट दिया है। बिहार की कानून व्यवस्था लगातार लंबे समय से बदतर होती जा रही है। लोगों ने जब फिर से उसी सरकार को चुना है तो निश्चित तौर पर अब उसमें सुधार की संभावना लोगों को नहीं देखना चाहिए। जो अपराध हो रहा है उसके लिए जहां तक हो सकेगा जन सुराज आवाज उठाएगी। जहानाबाद की छात्रा के साथ जघन्य अपराध जहानाबाद की छात्रा के साथ जघन्य अपराध हुआ, पुलिस प्रशासन ने उसे आत्महत्या कह दिया था। सबसे पहले जन सुराज के लोग और हम पीड़िता के घर गए, तब सरकार की आंख खुली और एसआईटी का गठन किया गया। पुलिस के दो अधिकारी सस्पेंड किए गए। जहां भी उस तरह अपराध होता है, हम कोशिश करते हैं कि वहां पहुंचे, उनकी आवाज बनें, मदद करें। लेकिन जो सरकारी व्यवस्था है, वह जनता ने चुनकर बनाया है। हम 3 साल से लोगों को बता रहे थे कि अगर आप बबुल बोएगें तो आम नहीं खा सकेंगे। लोगों ने एनडीए की जो सरकार चुनी है, इस व्यवस्था से लोग परेशान थे, भ्रष्टाचार और अपराध से लोग परेशान थे। फिर से उन्हीं विधायक को चुना और इस सरकार को फिर से वोट के बड़े अंतर से चुनकर सरकार बना दिया, तो स्थिति बदलने वाली नहीं है। इसके लिए लोगों को बदलना होगा, क्योंकि जब वोट देना होता है तो फिर उसी को वोट दे देते हैं, सोचते हैं नहीं। जब वही रहेगा तो व्यवस्था कैसे बदलेगी। 10 हजार के लालच, जाति और हिंदू-मुसलमान के नाम पर वोट दे दिया है, तो 5 साल तक इसी व्यवस्था को चलना होगा। हम लोगों की आवाज बनेंगे, मदद करेंगे लेकिन जनता ने जिसे सरकार चलाने की जवाब दे दिया, उनसे जनता को सवाल पूछना चाहिए। 10-10 देकर दो लाख देने की घोषणा कर दी हमने चुनाव से पहले जो कहा सरकार ने वह कर दिया, जिससे उसको फायदा हुआ। हमने कहा था कि प्रत्येक परिवार 10 से 15 हजार प्रत्येक महीने कमाए, इसकी व्यवस्था बनाने का वादा किया था, सरकार उससे घबराई और 10-10 देकर दो लाख देने की घोषणा कर दी। हमारे कहने से मिल रहा है तो अच्छी बात है। बिहार के बुजुर्गों और विधवाओं का पेंशन बढ़ाकर 1100 हो गया। अगर हर परिवार को नीतीश की सरकार दो-दो लाख रुपए दे दे तो यह अच्छी बात है। उन्होंने 10 हजार जो दिया वह रोजगार के लिए नहीं दिया, उन्होंने वोट को प्रभावित करने के लिए दिया था। अगर सही में रोजगार के लिए दिया था तो अपने वादे के अनुसार उन सभी डेढ़ करोड़ परिवार को बची हुई 190000 रुपए की राशि भी मिलनी चाहिए। सबको रोजगार मिल जाए, लोगों को बाहर नहीं जाना पड़े, यही तो हमारा एजेंडा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि हमारा एजेंडा MLA और मंत्री बनना नहीं है। अगर बिहार के डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार मिल जाए, पलायन नहीं करना पड़े तो जन सुराज को जीतने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार पैसा नहीं देगी तो जन सुराज लोगों के साथ खड़ी होगी और आंदोलन करना पड़ेगा वह सब कुछ हम करेंगे।हम लोगों को 17-18 लाख वोट मिला है, जनता की आवाज बन रहे हैं। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आज बेगूसराय में पत्रकारों से बातचीत की। इन्होंने बिहार नवनिर्माण के लिए फिर पूरी ताकत से पूरे बिहार में नया अभियान शुरू किए हैं। अपने साथ जुड़े सभी साथियों के साथ मिल-बैठकर विधायक विचार कर रहे हैं कि पार्टी को क्या करना चाहिए। लोग क्या चाहते हैं, इन मुद्दों पर बात कर जनता के मुद्दों के अनुसार काम करना है। सरकार में एनडीए है, 200 से अधिक उनके विधायक हैं, तो फिर एनडीए के विधायक सदन में शराबबंदी पर पुनर्विचार की मांग क्यों करते हैं, उन्हें तो पुनर्विचार कर देना चाहिए। अगर बिहार में शराबबंदी से महिलाओं को सशक्तिकरण हो रहा है तो इसे यूपी सहित पूरे देश में लागू किया जाए। अगर यह बढ़िया स्कीम है तो बिहार के महिलाओं के लिए क्यों। पूरे देश की महिलाओं को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है, सबको लाभ मिलना चाहिए। शराबबंदी को पूरे देश में लागू करना चाहिए एनडीए की सरकार बिहार में है और दिल्ली में भी है। अगर बिहार में एनडीए के शराबबंदी स्कीम से महिलाओं का फायदा हो रहा है, तो मोदी जी को इसे देश भर में लागू करना चाहिए। जिससे पूरे देश के महिलाओं को फायदा हो। खुले में मांस बिक्री पर रोक को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा है कि आप जैसी व्यवस्था चुनेंगे, वैसी व्यवस्था पाएंगे, जैसा करेंगे वैसा ही फल मिलेगा। एनडीए की सरकार बनी है तो उनका चलेगा, उनका एजेंडा क्लियर है। हम सुप्रीम कोर्ट गए थे, तो कोर्ट ने कहा कि यह हाईकोर्ट के क्षेत्र का मामला है, हम हाईकोर्ट जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश टिप्पणी किया कि आप चुनाव हारने के बाद आए हैं। इस देश के संविधान की व्यवस्था के अनुसार जिसके साथ अन्याय होता है, वही तो न्यायालय में जाता है। लेकिन यह नया भारत है, यह नए भारत के न्यायाधीश हैं, उन्होंने यह टिप्पणी क्यों की यह वही जानें। नियमों का वर्गीकरण नया उनके डेफिनेशन के हिसाब से न्यायालय में वही जा सकता है, जो चुनाव जीता है, लेकिन जो चुनाव जीता है, वह न्यायालय क्यों जाएगा। जिनको लगता है कि गलत तरीके से चुनाव जीत गया है, वही तो कोर्ट जाएगा। यह नया भारत है, न्यायाधीश नए हैं, नियमों का वर्गीकरण नया है। उनको इस तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहिए, हम लोग हाई कोर्ट की तैयारी कर रहे हैं। कानून व्यवस्था को लेकर कहा कि अभी तीन-चार महीना पहले ही बिहार की जनता ने काफी विश्वास के साथ फिर से एनडीए को वोट दिया है। बिहार की कानून व्यवस्था लगातार लंबे समय से बदतर होती जा रही है। लोगों ने जब फिर से उसी सरकार को चुना है तो निश्चित तौर पर अब उसमें सुधार की संभावना लोगों को नहीं देखना चाहिए। जो अपराध हो रहा है उसके लिए जहां तक हो सकेगा जन सुराज आवाज उठाएगी। जहानाबाद की छात्रा के साथ जघन्य अपराध जहानाबाद की छात्रा के साथ जघन्य अपराध हुआ, पुलिस प्रशासन ने उसे आत्महत्या कह दिया था। सबसे पहले जन सुराज के लोग और हम पीड़िता के घर गए, तब सरकार की आंख खुली और एसआईटी का गठन किया गया। पुलिस के दो अधिकारी सस्पेंड किए गए। जहां भी उस तरह अपराध होता है, हम कोशिश करते हैं कि वहां पहुंचे, उनकी आवाज बनें, मदद करें। लेकिन जो सरकारी व्यवस्था है, वह जनता ने चुनकर बनाया है। हम 3 साल से लोगों को बता रहे थे कि अगर आप बबुल बोएगें तो आम नहीं खा सकेंगे। लोगों ने एनडीए की जो सरकार चुनी है, इस व्यवस्था से लोग परेशान थे, भ्रष्टाचार और अपराध से लोग परेशान थे। फिर से उन्हीं विधायक को चुना और इस सरकार को फिर से वोट के बड़े अंतर से चुनकर सरकार बना दिया, तो स्थिति बदलने वाली नहीं है। इसके लिए लोगों को बदलना होगा, क्योंकि जब वोट देना होता है तो फिर उसी को वोट दे देते हैं, सोचते हैं नहीं। जब वही रहेगा तो व्यवस्था कैसे बदलेगी। 10 हजार के लालच, जाति और हिंदू-मुसलमान के नाम पर वोट दे दिया है, तो 5 साल तक इसी व्यवस्था को चलना होगा। हम लोगों की आवाज बनेंगे, मदद करेंगे लेकिन जनता ने जिसे सरकार चलाने की जवाब दे दिया, उनसे जनता को सवाल पूछना चाहिए। 10-10 देकर दो लाख देने की घोषणा कर दी हमने चुनाव से पहले जो कहा सरकार ने वह कर दिया, जिससे उसको फायदा हुआ। हमने कहा था कि प्रत्येक परिवार 10 से 15 हजार प्रत्येक महीने कमाए, इसकी व्यवस्था बनाने का वादा किया था, सरकार उससे घबराई और 10-10 देकर दो लाख देने की घोषणा कर दी। हमारे कहने से मिल रहा है तो अच्छी बात है। बिहार के बुजुर्गों और विधवाओं का पेंशन बढ़ाकर 1100 हो गया। अगर हर परिवार को नीतीश की सरकार दो-दो लाख रुपए दे दे तो यह अच्छी बात है। उन्होंने 10 हजार जो दिया वह रोजगार के लिए नहीं दिया, उन्होंने वोट को प्रभावित करने के लिए दिया था। अगर सही में रोजगार के लिए दिया था तो अपने वादे के अनुसार उन सभी डेढ़ करोड़ परिवार को बची हुई 190000 रुपए की राशि भी मिलनी चाहिए। सबको रोजगार मिल जाए, लोगों को बाहर नहीं जाना पड़े, यही तो हमारा एजेंडा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि हमारा एजेंडा MLA और मंत्री बनना नहीं है। अगर बिहार के डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार मिल जाए, पलायन नहीं करना पड़े तो जन सुराज को जीतने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार पैसा नहीं देगी तो जन सुराज लोगों के साथ खड़ी होगी और आंदोलन करना पड़ेगा वह सब कुछ हम करेंगे।हम लोगों को 17-18 लाख वोट मिला है, जनता की आवाज बन रहे हैं।


