दरभंगा के विशनपुर थाना क्षेत्र के पटोरी-बसंत गांव में साल 1994 में गोलीबारी और डबल मर्डर हुआ था। इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने चर्चित वकील अंबर इमाम हाशमी उर्फ छोटा बाबू और पूर्व लोक अभियोजक कौशर इमाम हाशमी समेत पांच को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि यह मामला विशनपुर थाना कांड संख्या-58/1994 से संबंधित है, जो दो अलग-अलग सत्रवाद संख्या 326/1999 और 320/2010 के तहत न्यायालय में विचाराधीन था। अदालत ने कौशर इमाम हाशमी, अंबर इमाम हाशमी, राजा हाशमी, मोइन हाशमी और अंजार हाशमी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307, 149 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी पाया। घटना 8 अगस्त 1994 की है। किसान रामकृपाल चौधरी की मौके पर मौत अभियोजन पक्ष के अनुसार, पटोरी-बसंत गांव में कब्रिस्तान और रास्ते को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हुआ था, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। इस दौरान दर्जनों राउंड फायरिंग हुई। गोलीबारी में किसान रामकृपाल चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि रामपुकार चौधरी की मौत इलाज के दौरान हुई। गोली लगने से मोहन चौधरी, रविंदर चौधरी, अशोक चौधरी, कैलाश बिहारी चौधरी, संगीत चौधरी समेत आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आजीवन कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई पीड़ित पक्ष की ओर से रामपुकार चौधरी के आवेदन पर विशनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में 13 नामजद और 10 से 12 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच के दौरान एक अभियुक्त फरार हो गया था, जबकि पुलिस ने कुल 12 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान दो अन्य अभियुक्त भी फरार हो गए, जिनका ट्रायल अलग कर दिया गया। शेष पांच अभियुक्तों के खिलाफ सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई। नामजद अधिकांश अभियुक्तों की समय के साथ मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष अभियुक्तों पर अब जाकर कानून का शिकंजा कस सका है। 32 साल बाद आए इस फैसले को जिले के चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है। दरभंगा के विशनपुर थाना क्षेत्र के पटोरी-बसंत गांव में साल 1994 में गोलीबारी और डबल मर्डर हुआ था। इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने चर्चित वकील अंबर इमाम हाशमी उर्फ छोटा बाबू और पूर्व लोक अभियोजक कौशर इमाम हाशमी समेत पांच को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि यह मामला विशनपुर थाना कांड संख्या-58/1994 से संबंधित है, जो दो अलग-अलग सत्रवाद संख्या 326/1999 और 320/2010 के तहत न्यायालय में विचाराधीन था। अदालत ने कौशर इमाम हाशमी, अंबर इमाम हाशमी, राजा हाशमी, मोइन हाशमी और अंजार हाशमी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307, 149 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी पाया। घटना 8 अगस्त 1994 की है। किसान रामकृपाल चौधरी की मौके पर मौत अभियोजन पक्ष के अनुसार, पटोरी-बसंत गांव में कब्रिस्तान और रास्ते को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हुआ था, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। इस दौरान दर्जनों राउंड फायरिंग हुई। गोलीबारी में किसान रामकृपाल चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि रामपुकार चौधरी की मौत इलाज के दौरान हुई। गोली लगने से मोहन चौधरी, रविंदर चौधरी, अशोक चौधरी, कैलाश बिहारी चौधरी, संगीत चौधरी समेत आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आजीवन कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई पीड़ित पक्ष की ओर से रामपुकार चौधरी के आवेदन पर विशनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में 13 नामजद और 10 से 12 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच के दौरान एक अभियुक्त फरार हो गया था, जबकि पुलिस ने कुल 12 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान दो अन्य अभियुक्त भी फरार हो गए, जिनका ट्रायल अलग कर दिया गया। शेष पांच अभियुक्तों के खिलाफ सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई। नामजद अधिकांश अभियुक्तों की समय के साथ मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष अभियुक्तों पर अब जाकर कानून का शिकंजा कस सका है। 32 साल बाद आए इस फैसले को जिले के चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है।


