रायपुर में सोमवार को LGBTQIA (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर, इंटरसेक्सुअल, असेक्सुअल) समुदाय ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। उन्होंने ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल-2026 के खिलाफ विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने “हमारी गरिमा हमारी लड़ाई” और “न्याय चाहिए, भेदभाव नहीं” जैसे नारे लगाए। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा- हमें ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी से निकाल दिया गया है। एक मेडिकल बोर्ड बैठा दिया गया है। इसके लिए फिजिकल स्क्रिनिंग की जाएगी। हमें अपना जेंडर बताने के लिए कपड़े उतारने पड़ेंगे। ये किसी भी व्यक्ति की गरिमा के साथ खिलवाड़ है। सोमवार को LGBTQ कम्युनिटी ने रैली निकाली और रायपुर मोतीबाग चौक में समाप्त हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहे। देखिए प्रदर्शन की 4 तस्वीरें… राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद की सदस्य विद्या राजपूत ने कहा कि अमेंडमेंट में सरकार ने इस बात को जोड़ा है कि जेंडर अफर्मेशन सर्जरी के लिए अगर किसी को बहला फुसलाया गया है या लालच दिया गया है। ऐसे व्यक्ति को 10 साल की सजा और 5 लाख का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। कोई भी व्यक्ति इसमें किसी के खिलाफ आरोप लगा सकता है। विद्या ने बताया कि सरकार को इस समय इस संशोधन की जरूरत नहीं थी। कम्यूनिटी के बिना चर्चा के ही ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल लोकसभा और राज्यसभा में लाया गया है। और दोनों सदनों में यह पास हो गया है। अब बिल राष्ट्रपति के पास गया है। अमेंडमेंट में ट्रांसमैन का जिक्र ही नहीं किया गया पॉपी देवनाथ ने कहा ने कहा कि ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल में ट्रांसमैन की जिक्र नहीं किया गया है। लेकिन भरे लोगसभा और राज्यसभा में शिखंडी-शिखंडी बोला गया है। जितने ट्रांसमैन है वह शिखंड़ी उनके पूर्वज है। जब आप शिखंडी को मान रहे हो तो ट्रांसमैन को क्यो हटाया जा रहा है। देवनाथ ने कहा कि सरकार को ये पता नहीं हा कि ट्रांसजेंड़र सेक्स से निर्धारित नहीं होता है। वह साइकोलॉजिक जेंडर है। पहचान के साथ खिलवाड़ रानी शेट्टी ने बताया कि ट्रांसजेंडर पर्सन्स संशोधन विधेयक 2026 को लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया है लेकिन ये हमारे हित में नहीं है। ये हमारी पहचान के साथ खिलवाड़ है। 2014 और 2019 में जो बिल पास हुआ था। इसके साथ ही सूप्रीम कोर्ट को जो जजमेंट आया था। लेकिन उसके उलट ये बिल लाया गया है। जो किन्नर समुदाय और LGBTQ कम्यूनिटी के लिए सही नहीं है। ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल-2026 को समझिए इस बिल में कहा गया है कि जो लोग अपनी यौन अभिवृत्ति (सेक्सुअल ओरिएंटेशन) या अपनी पहचान (जेंडर आइडेंटिटी) को खुद महसूस करते हैं, उन्हें ट्रांसजेंडर नहीं माना जाएगा। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर कोई व्यक्ति अपनी यौन अभिवृत्ति या जेंडर आइडेंटिटी को खुद तय करता है, तो उसे ट्रांसजेंडर नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि ट्रांसजेंडर की परिभाषा अब केवल उन लोगों तक सीमित कर दी गई है जो पहले से ही इस श्रेणी में हैं।


