भदोही में संयुक्त वामपंथी मोर्चा के बैनर तले शुक्रवार को CPI, CPI-M, CPI-ML व फारवर्ड ब्लॉक के नेताओं ने फत्तुपुर स्थित विश्वकर्मा मंदिर तिराहे के पास ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का पुतला फूंका गया और जमकर नारेबाजी की गई। इंद्रदेव पाल ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों और इस्लामी गणराज्य के सर्वोच्च नेता सैयद अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और लोगों से ‘हमले के खिलाफ खड़े होने’ तथा ईरानी जनता के साथ एकजुटता व्यक्त करने का आह्वान किया। पाल ने कहा कि इस प्रदर्शन के माध्यम से वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘साम्राज्यवादी दादागिरी’ और ‘जायोनी इजराइल की आक्रामकता’ के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। रामजीत यादव ने ईरान पर हमले से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा- ‘ईरान के प्रति ट्रंप की साम्राज्यवादी आक्रामकता पर नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं? ईरान पर हुए हमले पर उनकी चुप्पी क्यों है?’ यादव ने आगे कहा- ‘इजरायल के नेतन्याहू के खून से सने हाथों को थामकर उन्होंने कहा कि यह भारत की जनता की आवाज है। यह किसकी आवाज है? क्या आप इजरायल को समर्थन देने गए थे? और 24 घंटे के भीतर ईरान पर हमला हो गया। क्या आप वहां भारत की मंजूरी देने गए थे?’ भानसिंह मौर्य ने जोर दिया कि भारत की विदेश नीति कुछ सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को विदेश संबंधों को राष्ट्रीय संप्रभुता के नजरिए से देखना चाहिए। वामपंथी नेता राजेंद्र प्रसाद कन्नौजिया ने भी मोदी की इजराइल यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार को युद्ध रोकने और शांति की दिशा में काम करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। विरोध-प्रदर्शन एवं पुतला दहन में जगन्नाथ मौर्य, भुलाल पाल, ज्ञानप्रकाश प्रजापति, सोहनलाल, केशव प्रसाद विश्वकर्मा, हृदय लाल, मुलन बेगम और रमेश कुमार मौर्य सहित कई अन्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।


