भिवाड़ी. नवीन ङ्क्षसह ने बताया कि उनका जन्म 1986 में टाटानगर झारखंड में हुआ और एमबीए किया। पिता मदन ङ्क्षसह टाटा स्टील में प्रबंधक थे। एमबीए करने के बाद मैनेजर स्टील प्लांट में कई कंपनियों में नौकरी की। इस दौरान मेरी पोस्टिंग कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड में रहा। 2017 में मेरा वेतन सवा लाख रुपए महीना था। मन में आया कि खूब वेतन मिल रहा है लेकिन संतुष्टि नहीं थी, मन करता था कि खुद का व्यापार किया जाए, भले ही उसमें वेतन से कम मुनाफा हो या ज्यादा हो। छत्तीसगढ़ से नौकरी छोडऩे के बाद भिवाड़ी आया। भिवाड़ी में व्यवसाय की उम्मीद से आया था। मुझे स्टील प्लांट में प्रदूषण नियंत्रण की अच्छी जानकारी थी, नौकरी के दौरान भी मेरे पर इस तरह के काम की जिम्मेदारी थी। भिवाड़ी में भी स्टील प्लांट हैं। प्रदूषण देखते हुए, प्रदूषण रोकने की मशीन सही करने और नई मशीन तैयार करने का काम शुरू किया। 2017 में एक छोटा ऑफिस खोलकर प्रदूषण रोकने के लिए मशीनों की सर्विस शुरू की। शुरूआत में सर्विस का काम किया, बड़ा प्लांट लगाने के लिए पैसा नहीं था। सर्विस से जो पैसा उससे 2018 में किराए पर फैक्टरी लेकर मशीन बनाने लगे। दो साल में दो करोड़ का टर्नओवर पहुंच गया। 2020 में पांच सौ मीटर के भूखंड पर चौपानकी में फैक्टरी लगाई। पांच साल में हमारा टर्नओवर दोगुना हो गया। 2025 में दूसरी फैक्टरी लगाई। फैक्टरी में हुए उत्पादन को संबंधित इकाइयों तक पहुंचाने के लिए कॉर्पोरेट ऑफिस भी शुरू कर दिया। इस साल हमारा टर्नओवर छह करोड़ की उम्मीद है। मेरी दोनों फैक्टरी में दर्जनों लोग काम कर रहे हैं, दर्जनों परिवार हमसे जुड़ चुके हैं।
सफर नहीं था आसान ये मिली सीख
अगर दृढ़ संकल्प और मेहनत करना जानते हैं तो आपके सारे सपने पूरे हो सकते हैं। जरूरत है अपने आप के ऊपर विश्वास करने की। जब मैंने लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ी और खुद का व्यवसाय करना शुरू किया तो बड़ी कठिनाई सामने आई। व्यवसाय का सफर आसान नहीं था। एक साल तक परिवार छत्तीसगढ़ रहा और मैं बच्चों से दूर रहा। पहले महीने में सिर्फ पांच हजार रुपए की आमदनी हुई। कभी-कभी ऐसा भी हुआ कि एक वक्त के टिफिन से दोनों समय का खाना खाया लेकिन हर परिस्थिति में आनंद लिया। पर्यावरण को लेकर इंडस्ट्री में बहुत समस्या हैं लेकिन मैं हमेशा फीस लेकर ही नहीं निशुल्क भी उद्यमियों की सेवा करता हूं। फैक्टरी में कोई मशीन है, उसका उपयोग नहीं हो रहा या उससे परेशानी है तो उसका कैसे बेहतर उपयोग हो, मैं इसको लेकर भी कई इकाइयों को परामर्श देता हूं। व्यवसाय में अच्छा व्यवहार जरूरी है। मेरे साथ उद्यमियों के अच्छे संबंध है, उनका अपार भरोसा है जिसकी वजह से मैं इतनी जल्दी अपना उद्योग खड़ा कर सका।


