इस हफ्ते लेबनान पर इजराइल के हमलों में लगभग 300 लोग मारे गए। इस बीच खबर है कि लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम जल्द ही वाशिंगटन डीसी जाने वाले हैं। मकसद है इजराइल के साथ सीधी बातचीत का रास्ता खोलना।
नेतन्याहू ने साफ कहा- लेबनान में कोई सीजफायर नहीं
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान को लेकर कोई लागलपेट नहीं रखी है। उन्होंने सीधे कहा कि लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है और हिज्बुल्लाह पर हमले पूरी ताकत से जारी रहेंगे।
उनके शब्द थे कि जब तक लेबनान की जनता की सुरक्षा बहाल नहीं होती, इजराइल रुकेगा नहीं। इजराइली सेना ने इस हफ्ते हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर ताजा हमलों की भी पुष्टि की।
तो फिर बातचीत क्यों?
नेतन्याहू ने हमले जारी रखने का ऐलान किया और साथ ही अपनी कैबिनेट को लेबनान से सीधी बातचीत शुरू करने का निर्देश भी दे दिया। उनका कहना है कि लेबनान की तरफ से बार-बार बातचीत की गुजारिश आ रही थी।
इसी के जवाब में उन्होंने दो लक्ष्य तय किए हैं। पहला, हिज्बुल्लाह का हथियार छोड़ना। दूसरा, इजराइल और लेबनान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता। इजराइल ने यह भी कहा कि लेबनान के पीएम का बेरूत को हथियारमुक्त करने का बयान एक सकारात्मक कदम है।
अमेरिका और ईरान का सीजफायर बीच में कहां से आया?
पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में अमेरिका और ईरान के बीच एक नाजुक दो हफ्ते का युद्धविराम चल रहा है जो अभी टिका हुआ है लेकिन दबाव में है।
ईरान का कहना है कि इस सीजफायर में लेबनान पर इजराइली हमले भी शामिल हैं यानी वो भी बंद होने चाहिए। लेकिन इजराइल इस बात को नहीं मानता। यही टकराव पूरे समझौते को कभी भी तोड़ सकता है।
लेबनान के PM वाशिंगटन क्यों जा रहे हैं?
लेबनानी सरकार के एक सूत्र ने सीएनएन को बताया कि नवाफ सलाम आने वाले दिनों में अमेरिकी राजधानी का दौरा करेंगे। इजराइल की तरफ से सीधी बातचीत की मांग के बाद यह यात्रा हो रही है।
माना जा रहा है कि अमेरिका इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा। जब दो देशों के बीच सीधे बात करना मुश्किल हो तो वाशिंगटन का रास्ता होकर जाना पुरानी कूटनीतिक परंपरा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल तस्वीर यह है कि जमीन पर लड़ाई जारी है, हवा में बातचीत की कोशिश हो रही है और बीच में ईरान-अमेरिका सीजफायर की डोर है जो कभी भी टूट सकती है।
लेबनान के लिए यह वक्त बेहद कठिन है क्योंकि एक तरफ सैकड़ों लोग मर रहे हैं और दूसरी तरफ उसे मेज पर बैठकर शर्तें सुननी पड़ रही हैं।


