जू सफारी में सिखाए घोंसला बनाने के गुर:नन्हीं गौरैया को बचाने के लिए राजगीर के बच्चों ने बढ़ाए हाथ, छात्रों ने प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

जू सफारी में सिखाए घोंसला बनाने के गुर:नन्हीं गौरैया को बचाने के लिए राजगीर के बच्चों ने बढ़ाए हाथ, छात्रों ने प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

नालंदा में विलुप्त हो रही गौरैया के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से आज ‘विश्व गौरैया दिवस’ के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राजगीर जू सफारी के तत्वावधान में नगर के मध्य विद्यालय, राजगीर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। इस दौरान छात्रों को गौरैया के पारिस्थितिक महत्व और उनके घटते कुनबे को फिर से बसाने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। छात्रों ने बनाए आकर्षक इको-फ्रेंडली घोंसले कार्यक्रम के आकर्षण का मुख्य केंद्र ‘गौरैया घोंसला निर्माण प्रतियोगिता’ रही। इसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। बच्चों ने गत्ते, जूट, सूखी घास और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर नन्हीं चिड़ियों के लिए सुरक्षित और आकर्षक घोंसले तैयार किए। बच्चों के हुनर को देख वहां मौजूद वन विभाग के अधिकारी और शिक्षक भी दंग रह गए। शहरीकरण और विकिरण से संकट में गौरैया: डॉ. संजीत कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजगीर जू सफारी के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. संजीत ने बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने गौरैया के अस्तित्व पर मंडराते खतरों की चर्चा करते हुए कहा कि बढ़ते शहरीकरण और मोबाइल टावरों से निकलने वाले विकिरण के कारण इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है। उन्होंने बच्चों से अपील करते हुए कहा कि गौरैया हमारे पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा है। हमें अपने घरों की छतों या बालकनी में दाना-पानी रखने और कृत्रिम घोंसले लगाकर इन्हें फिर से अपने आंगन में बुलाना होगा। वनकर्मियों ने दिया संरक्षण का संदेश इस पूरे आयोजन का सफल समन्वय वन रक्षी (Forest Guard) राज कुमार मंडल और प्रिंस कुमार की ओर से किया गया। उन्होंने न केवल बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से घोंसला बनाने की तकनीक सिखाई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की महती भूमिका पर भी चर्चा की। स्कूल के शिक्षकों ने जू सफारी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों का जुड़ाव प्रकृति के साथ और गहरा होता है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट घोंसला बनाने वाले छात्रों को पुरस्कृत भी किया गया। नालंदा में विलुप्त हो रही गौरैया के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से आज ‘विश्व गौरैया दिवस’ के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राजगीर जू सफारी के तत्वावधान में नगर के मध्य विद्यालय, राजगीर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। इस दौरान छात्रों को गौरैया के पारिस्थितिक महत्व और उनके घटते कुनबे को फिर से बसाने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। छात्रों ने बनाए आकर्षक इको-फ्रेंडली घोंसले कार्यक्रम के आकर्षण का मुख्य केंद्र ‘गौरैया घोंसला निर्माण प्रतियोगिता’ रही। इसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। बच्चों ने गत्ते, जूट, सूखी घास और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर नन्हीं चिड़ियों के लिए सुरक्षित और आकर्षक घोंसले तैयार किए। बच्चों के हुनर को देख वहां मौजूद वन विभाग के अधिकारी और शिक्षक भी दंग रह गए। शहरीकरण और विकिरण से संकट में गौरैया: डॉ. संजीत कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजगीर जू सफारी के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. संजीत ने बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने गौरैया के अस्तित्व पर मंडराते खतरों की चर्चा करते हुए कहा कि बढ़ते शहरीकरण और मोबाइल टावरों से निकलने वाले विकिरण के कारण इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है। उन्होंने बच्चों से अपील करते हुए कहा कि गौरैया हमारे पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा है। हमें अपने घरों की छतों या बालकनी में दाना-पानी रखने और कृत्रिम घोंसले लगाकर इन्हें फिर से अपने आंगन में बुलाना होगा। वनकर्मियों ने दिया संरक्षण का संदेश इस पूरे आयोजन का सफल समन्वय वन रक्षी (Forest Guard) राज कुमार मंडल और प्रिंस कुमार की ओर से किया गया। उन्होंने न केवल बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से घोंसला बनाने की तकनीक सिखाई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की महती भूमिका पर भी चर्चा की। स्कूल के शिक्षकों ने जू सफारी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों का जुड़ाव प्रकृति के साथ और गहरा होता है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट घोंसला बनाने वाले छात्रों को पुरस्कृत भी किया गया।  

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