अजित पवार की मौत के आखिरी 26 मिनट…अंतिम संदेश के जवाब में दिखा आग का गोला

अजित पवार की मौत के आखिरी 26 मिनट…अंतिम संदेश के जवाब में दिखा आग का गोला

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा चार्टर्ड विमान बुधवार सुबह करीब 35 मिनट तक हवा में रहने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) इस हादसे की गहन जांच कर रहे हैं, जबकि शुरुआती जानकारियों में बारामती एयरपोर्ट की भौगोलिक और तकनीकी चुनौतियां सामने आई हैं।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस हादसे के आखिरी 26 मिनटों का पूरा ब्यौरा साझा किया है, जिससे पता चलता है कि पायलटों ने विमान को सुरक्षित उतारने की पूरी कोशिश की थी। हादसे का शिकार विमान बॉम्बार्डियर लियरजेट 45 था। इसे दिल्ली की निजी जेट चार्टर कंपनी वीएसआर वेंचर्स (VSR Aviation) संचालित कर रही थी। विमान ने सुबह करीब 8:10 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बारामती के लिए उड़ान भरी थी।

क्यों मुश्किल है बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग

बारामती एयरपोर्ट एक क्षेत्रीय हवाई पट्टी है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से पायलट प्रशिक्षण और निजी विमानों के लिए किया जाता है। यहां आधुनिक नेविगेशनल उपकरण मौजूद नहीं हैं, जो कम दृश्यता की स्थिति में पायलटों की मदद कर सकें। ऐसे में पायलटों को लैंडिंग के दौरान पूरी तरह दृश्यता और रेडियो संचार पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसके अलावा बारामती एक अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड है, यानी यहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर नहीं है। आमतौर पर ऐसे एयरफील्ड पर फ्लाइंग स्कूलों के प्रशिक्षक या पायलट ही हवाई यातायात से जुड़ी जानकारी देते हैं। यही कारण है कि खराब दृश्यता को इस हादसे की एक अहम वजह माना जा रहा है।

वो आखिरी 26 मिनट…

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, विमान सुबह 8:18 बजे बारामती एयरपोर्ट के संपर्क में आया और 8:44 बजे रनवे-11 के पास आग की लपटें दिखाई दीं। इन 26 मिनटों के घटनाक्रम को हादसे की जांच में बेहद अहम माना जा रहा है।

मंत्रालय ने कहा, बारामती एयरपोर्ट के संपर्क में आने के बाद, विमान को अगली सूचना बारामती की ओर 30 समुद्री मील की दूरी पर दी गई और पुणे एयरपोर्ट के संचालन केंद्र से उन्हें उतरने की अनुमति दी गई। साथ ही पायलटों को दृश्य मौसम परिस्थितियों में अपने विवेक से उतरने की सलाह दी गई थी। पायलटों ने हवा और दृश्यता के बारे में जानकारी मांगी, जिस पर बताया गया कि हवा शांत है और दृश्यता लगभग 3,000 मीटर है।

हालांकि, पायलटों ने पहली कोशिश में रनवे दिखाई न देने पर ‘गो-अराउंड’ किया, यानी विमान को वापस हवा में ले गए ताकि दोबारा लैंडिंग की कोशिश की जा सके। विमान ने एक चक्कर लगाकर दोबारा लैंड करने का प्रयास किया और यह हादसा हो गया।

अनुभवी पायलट, फिर भी टला नहीं हादसा

विमान के कैप्टन के पास 15,000 से ज्यादा उड़ान घंटों का अनुभव था, जबकि को-पायलट के पास भी 1,500 घंटे से अधिक का अनुभव था। दूसरी बार लैंडिंग के प्रयास के दौरान पायलटों ने रनवे 11 की फाइनल अप्रोच की सूचना दी। जब ऑपरेटर ने पूछा कि क्या रनवे दिख रहा है। पायलटों ने पहले कहा कि रनवे नजर नहीं आ रहा, लेकिन कुछ सेकंड बाद उन्होंने रनवे दिखने की जानकारी दी।

सुबह 8:43 बजे विमान को लैंडिंग की अनुमति दी गई, लेकिन इसके बाद कोई जवाब नहीं आया। ठीक एक मिनट बाद, 8:44 बजे, रनवे 11 के पास आग की लपटें दिखाई दीं और तुरंत आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं।

AAIB की टीम पहुंची

AAIB की एक टीम दिल्ली से बारामती पहुंच चुकी है। वहीं, AAIB के महानिदेशक जीवीजी युगंधर भी हैदराबाद से बारामती पहुंचे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या कम दृश्यता, तकनीकी कारण या मानवीय चूक इस हादसे की असली वजह बनी।

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