ग्वालियर. अगर आपका वाहन एमपी-07 ए, बी या किसी पुरानी सीरीज में पंजीकृत है और 15-20 साल बाद कबाड़ हो चुका है या बेच दिया गया है, तो संभव है कि उसका पंजीयन नंबर अब भी सरकारी रिकॉर्ड में ‘एक्टिव’ दिख रहा हो। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के आंकड़ों के अनुसार शहर में 8 लाख से अधिक दो और चार पहिया वाहन सक्रिय दर्ज हैं, लेकिन इनमें से कितने वास्तव में सड़क पर चल रहे हैं और कितने कंडम हो चुके हैं, इसका सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है।
अनुमान है कि करीब 1.5 से 2 लाख वाहन 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं। बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं जिन्हें मालिक वर्षों पहले बेच चुके हैं या जो कबाड़ हो गए, लेकिन उनका पंजीयन निरस्त (Registration Cancellation) नहीं कराया गया। परिणामस्वरूप लाखों नंबर कागजों में ‘जिंदा’ हैं।
नंबर ट्रांसफर प्रक्रिया भी अधर में
पुराने वाहन नंबर को नए वाहन पर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया भी सुचारु रूप से शुरू नहीं हो सकी है। इससे न तो पुराने नंबर पूरी तरह निरस्त हो पा रहे हैं और न ही नई सीरीज में व्यवस्थित रूप से शामिल हो पा रहे हैं। नंबर सीरीज मैनेजमेंट पर भी इसका असर पड़ रहा है।
स्क्रैप पॉलिसी का सीमित असर
केंद्र की वाहन स्क्रैप नीति लागू होने के बावजूद अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर और स्पष्ट निरस्तीकरण प्रक्रिया की कमी से जमीनी असर सीमित है। जब तक कंडम वाहनों का रिकॉर्ड अपडेट नहीं होगा, सक्रिय वाहनों की वास्तविक संख्या सामने नहीं आएगी।
एचएसआरपी और डेटा लिंकिंग की धीमी रफ्तार
2019 से पहले पंजीकृत वाहनों के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) अनिवार्य है, लेकिन बड़ी संख्या में वाहन अब भी बिना HSRP के चल रहे हैं। करीब दो लाख से अधिक वाहन मोबाइल और आधार से लिंक नहीं हैं, जिससे रिकॉर्ड अपडेट में बाधा आ रही है।
आरटीओ विक्रम जीत सिंह कंग के अनुसार, वाहन को स्क्रैप कराने के बाद पुराना नंबर सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। यदि वाहन अनुपयोगी हो चुका है तो उसका पंजीयन निरस्त कराना आवश्यक है, अन्यथा भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक दिक्कतें आ सकती हैं।


