लाखों आवेदन, फिर भी हजारों सीटें खाली: केंद्र सरकार की मेगा इंटर्नशिप योजना से युवाओं की दूरी क्यों?

लाखों आवेदन, फिर भी हजारों सीटें खाली: केंद्र सरकार की मेगा इंटर्नशिप योजना से युवाओं की दूरी क्यों?

केंद्र सरकार की तरफ से युवाओं को रोजगार और कौशल बढ़ाने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी पैकेज धरातल पर सुस्त पड़ता दिखाई पड़ रहा है। दरअसल, वित्त वर्ष 2025-26 में इस फ्लैगशिप रोजगार और कौशल विकास पैकेज के तहत आवंटित राशि का सिर्फ 5 फीसदी ही खर्च किया जा सका है। इससे केंद्र की घोषित महत्वाकांक्षी विशेष पैकेज के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ध्यान रहे कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2024-25 में इस विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इसमें इंटर्नशिप योजना, 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के उन्नयन, और रोजगार सृजन से जुड़ी स्किलिंग योजनाएं शामिल थीं। इस पैकेज का लक्ष्य 5 वर्षों में करीब 4.1 करोड़ युवाओं को लाभ पहुंचाना था। इसके लिए 2 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाने थे।

लेकिन रविवार को जारी नवीनतम बजट आंकड़ों के मुताबिक सरकारी की तरफ से वित्त वर्ष 2025-26 में इन तीनों घटकों पर कुल 1,730 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए, जबकि 2024-25 के बजट में इसके लिए 33,830 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। इस तरह देखें तो सरकार की ओर से आवंटित राशि के मुकाबले खर्च बेहद कम रहा।

इंटर्नशिप योजना की प्रगति निराशाजनक

योजना के तहत अब तक केवल दो पायलट चरण ही पूरे हो सके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए 10,800 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन इसमें से सिर्फ 526 करोड़ रुपए का ही उपयोग हुआ। योजना को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय इसके लिए जल्द कैबिनेट की मंजूरी लेने की तैयारी में है। इसी बीच, 2026-27 के लिए इंटर्नशिप योजना का प्रस्तावित बजट घटाकर 4,788 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

आंकड़ों पर गौर करें तो योजना में डिमांड और कन्वर्जन के बीच बड़ा गैप (योजना में रुचि तो है, लेकिन वह नौकरी या इंटर्नशिप में तब्दील नहीं हो पा रही) बना हुआ है। पहले चरण में लगभग 1.3 लाख इंटर्नशिप अवसरों के लिए 6.2 लाख आवेदन आए। कंपनियों ने 82 हजार से अधिक ऑफर दिए, लेकिन इनमें से केवल 28 हजार उम्मीदवारों ने ही इंटर्नशिप स्वीकार की। दूसरे चरण में भी हालात कुछ बेहतर नहीं रहे, यानी 1.2 लाख इंटर्नशिप अवसरों के मुकाबले 83 हजार से अधिक ऑफर दिए गए, लेकिन सिर्फ 24,600 इंटर्नशिप ही स्वीकार की गईं।

क्या कहना है विशेषज्ञों का?

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टाइपेंड, स्थान, अवधि और भविष्य की नौकरी को लेकर स्पष्टता की कमी के कारण युवाओं की रुचि ऑफर मिलने के बाद कम हो रही है। वहीं, आईटीआई उन्नयन और अन्य रोजगार सृजन योजनाओं की धीमी रफ्तार ने सरकार के रोजगार एजेंडे पर सवाल और गहरे कर दिए हैं। कुल युवाओं के लिए घोषित बड़ा रोजगार पैकेज फिलहाल ‘नीति और क्रियान्वयन के अंतर का शिकार नजर आ रहा है, जहां घोषणाओं के मुकाबले ज़मीनी हकीकत काफी पीछे है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *