मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब स्थानीय बाजारों तक दिखने लगा है। अपनी खास पहचान रखने वाली मुजफ्फरपुर की मशहूर ‘लाह की लहठियां’ (चूड़ियां) महंगी हो गई हैं। जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। शादी-विवाह के सीजन से ठीक पहले कीमतों में 30 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी ने ग्राहकों की खरीदारी कम कर दी है, वहीं दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। शहर के इस्लामपुर स्थित सबसे बड़ी लाठी मंडी में इन दिनों रौनक कम नजर आ रही है। आमतौर पर लगन के मौसम में जहां भारी भीड़ उमड़ती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। दुकानदारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और कच्चे माल की महंगाई का सीधा असर कारोबार पर पड़ा है। 55 साल पुरानी दुकान में भी घटी बिक्री करीब 50-55 साल पुरानी दुकान चलाने वाले व्यापारी मोहम्मद फिरोज बताते हैं, ‘मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ गई है। पहले जो लहठियां 100 रुपए में मिलती थी, अब उनकी कीमत 140-150 रुपए तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ा है, जिससे बिक्री 50 से 60 फीसदी तक घट गई है।’ मुजफ्फरपुर की लहठी का देश-विदेश में डिमांड मुजफ्फरपुर की ये पारंपरिक लहठियां सिर्फ बिहार या भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान रखती हैं। खासतौर पर यहां की चूड़ियों की डिमांड शादी-विवाह के सीजन में काफी बढ़ जाती है। स्थानीय कारीगरों का दावा है कि इन चूड़ियों की खूबसूरती और डिजाइन के कारण बॉलीवुड हस्तियां भी इन्हें पसंद करती रही हैं, जिनमें ऐश्वर्या राय का नाम भी लिया जाता है। लगन के बावजूद बाजार सुस्त हालांकि, इस बार 15 अप्रैल से शुरू हो रहे लगन सीजन से पहले बाजार में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं दिख रही है। महंगाई के कारण ग्राहक सीमित खरीदारी कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि अगर जल्द ही कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो पारंपरिक ‘लाख उद्योग’ पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। वहीं, कारीगरों के सामने भी रोजगार का संकट गहराने लगा है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब स्थानीय बाजारों तक दिखने लगा है। अपनी खास पहचान रखने वाली मुजफ्फरपुर की मशहूर ‘लाह की लहठियां’ (चूड़ियां) महंगी हो गई हैं। जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। शादी-विवाह के सीजन से ठीक पहले कीमतों में 30 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी ने ग्राहकों की खरीदारी कम कर दी है, वहीं दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। शहर के इस्लामपुर स्थित सबसे बड़ी लाठी मंडी में इन दिनों रौनक कम नजर आ रही है। आमतौर पर लगन के मौसम में जहां भारी भीड़ उमड़ती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। दुकानदारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और कच्चे माल की महंगाई का सीधा असर कारोबार पर पड़ा है। 55 साल पुरानी दुकान में भी घटी बिक्री करीब 50-55 साल पुरानी दुकान चलाने वाले व्यापारी मोहम्मद फिरोज बताते हैं, ‘मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ गई है। पहले जो लहठियां 100 रुपए में मिलती थी, अब उनकी कीमत 140-150 रुपए तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ा है, जिससे बिक्री 50 से 60 फीसदी तक घट गई है।’ मुजफ्फरपुर की लहठी का देश-विदेश में डिमांड मुजफ्फरपुर की ये पारंपरिक लहठियां सिर्फ बिहार या भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान रखती हैं। खासतौर पर यहां की चूड़ियों की डिमांड शादी-विवाह के सीजन में काफी बढ़ जाती है। स्थानीय कारीगरों का दावा है कि इन चूड़ियों की खूबसूरती और डिजाइन के कारण बॉलीवुड हस्तियां भी इन्हें पसंद करती रही हैं, जिनमें ऐश्वर्या राय का नाम भी लिया जाता है। लगन के बावजूद बाजार सुस्त हालांकि, इस बार 15 अप्रैल से शुरू हो रहे लगन सीजन से पहले बाजार में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं दिख रही है। महंगाई के कारण ग्राहक सीमित खरीदारी कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि अगर जल्द ही कीमतों में स्थिरता नहीं आई, तो पारंपरिक ‘लाख उद्योग’ पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। वहीं, कारीगरों के सामने भी रोजगार का संकट गहराने लगा है।


