मजदूर व किसानों ने काला बिल्ला लगा कर मनाया काला दिवस, जताया विरोध

मजदूर व किसानों ने काला बिल्ला लगा कर मनाया काला दिवस, जताया विरोध

सिटी रिपोर्टर|बेतिया ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस(एटक) व बिहार राज्य किसान सभा ने चार श्रम संहिता को लेकर शहर के शहीद पार्क में विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही काला दिवस दिवस मनाया। मजदूरों, किसानों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने हाथों में काली पट्टी और सीने पर काला बिल्ला लगाकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया। एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति ने कहा कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों की दशकों की लड़ाई से हासिल अधिकारों को खत्म करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के जरिए हायर एंड फायर की नीति को मजबूत किया गया है, जिससे कंपनियों को मनमाने तरीके से कामगारों को नौकरी पर रखने और निकालने की छूट मिल जाएगी।किसान नेता राधामोहन यादव और अन्य वक्ताओं ने कहा कि इस संहिता के लागू होने से मजदूरों के न्यायिक अधिकार भी कमजोर होंगे और उन्हें न्याय पाने में और अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। मौके पर बबलू दूबे, केदार चौधरी, संजय सिंह, आशा नेत्री आरती, सुनीता, गीता, रसोईया नेता लालबाबू राम, गुलाबी देवी, गिरजा देवी, शीला देवी, खेत मजदूर नेता सुबोध मुखिया, राजेंद्र साह, अंजारूल, किसान नेता अशोक मिश्र आदि मौजूद रहे। सिटी रिपोर्टर|बेतिया ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस(एटक) व बिहार राज्य किसान सभा ने चार श्रम संहिता को लेकर शहर के शहीद पार्क में विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही काला दिवस दिवस मनाया। मजदूरों, किसानों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने हाथों में काली पट्टी और सीने पर काला बिल्ला लगाकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया। एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति ने कहा कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों की दशकों की लड़ाई से हासिल अधिकारों को खत्म करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के जरिए हायर एंड फायर की नीति को मजबूत किया गया है, जिससे कंपनियों को मनमाने तरीके से कामगारों को नौकरी पर रखने और निकालने की छूट मिल जाएगी।किसान नेता राधामोहन यादव और अन्य वक्ताओं ने कहा कि इस संहिता के लागू होने से मजदूरों के न्यायिक अधिकार भी कमजोर होंगे और उन्हें न्याय पाने में और अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। मौके पर बबलू दूबे, केदार चौधरी, संजय सिंह, आशा नेत्री आरती, सुनीता, गीता, रसोईया नेता लालबाबू राम, गुलाबी देवी, गिरजा देवी, शीला देवी, खेत मजदूर नेता सुबोध मुखिया, राजेंद्र साह, अंजारूल, किसान नेता अशोक मिश्र आदि मौजूद रहे।  

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