गयाजी. छत्तीसगढ़ स्थित स्पंज आयरन कंपनी में पिछले शुक्रवार को ब्लास्ट हुआ था। इस मामले में घायल मजदूर रामू भारती की मौत हो गई है। इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। रामू भारती गया के डुमरिया प्रखंड के गोटीबांध गांव के रहने वाले थे। हादसे के बाद जैसे ही उनका शव गांव पहुंचा, पूरा इलाका शोक में डूब गया। परिजनों के अनुसार रामू भारती आठ तारीख को काम के सिलसिले में छत्तीसगढ़ गए थे। वहां स्पंज आयरन कंपनी में हुए जोरदार ब्लास्ट में वे गंभीर रूप से झुलस गए। लंबे समय तक अस्पताल में इलाज चला। हालत में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन 31 तारीख को उन्होंने दम तोड़ दिया। तड़के करीब तीन बजे उनका शव गांव लाया गया। शव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव की गलियां सिसकियों और आहों से भर उठीं। रविवार शाम गोटीबांध में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। रामू भारती अपने पीछे चार नाबालिग बच्चों को छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी किरण कुमारी 12 साल की है। छोटी बेटी निशा कुमारी महज 7 साल की है। बेटों में प्रेम कुमार 10 साल और सबसे छोटा विकास कुमार सिर्फ 5 साल का है। इन मासूमों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कमाने वाला चला गया, अब घर की जिम्मेदारी किसके कंधे पर होगी, यह सवाल सबको परेशान कर रहा है। पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग ग्रामीणों ने बताया कि इस स्पंज आयरन कंपनी ब्लास्ट में गोटीबांध गांव के कुल छह मजदूरों की मौत घटना के दिन ही हो गई थी। दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए थे। रामू भारती उन्हीं घायलों में शामिल थे, जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ा। एक ही गांव से लगातार हो रही मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही चारों बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने की भी अपील की गई है। लोगों का कहना है कि बाहर काम करने गए मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और कंपनियों की जिम्मेदारी है। गोटी बांध गांव में सन्नाटा है। गयाजी. छत्तीसगढ़ स्थित स्पंज आयरन कंपनी में पिछले शुक्रवार को ब्लास्ट हुआ था। इस मामले में घायल मजदूर रामू भारती की मौत हो गई है। इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। रामू भारती गया के डुमरिया प्रखंड के गोटीबांध गांव के रहने वाले थे। हादसे के बाद जैसे ही उनका शव गांव पहुंचा, पूरा इलाका शोक में डूब गया। परिजनों के अनुसार रामू भारती आठ तारीख को काम के सिलसिले में छत्तीसगढ़ गए थे। वहां स्पंज आयरन कंपनी में हुए जोरदार ब्लास्ट में वे गंभीर रूप से झुलस गए। लंबे समय तक अस्पताल में इलाज चला। हालत में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन 31 तारीख को उन्होंने दम तोड़ दिया। तड़के करीब तीन बजे उनका शव गांव लाया गया। शव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव की गलियां सिसकियों और आहों से भर उठीं। रविवार शाम गोटीबांध में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। रामू भारती अपने पीछे चार नाबालिग बच्चों को छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी किरण कुमारी 12 साल की है। छोटी बेटी निशा कुमारी महज 7 साल की है। बेटों में प्रेम कुमार 10 साल और सबसे छोटा विकास कुमार सिर्फ 5 साल का है। इन मासूमों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कमाने वाला चला गया, अब घर की जिम्मेदारी किसके कंधे पर होगी, यह सवाल सबको परेशान कर रहा है। पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग ग्रामीणों ने बताया कि इस स्पंज आयरन कंपनी ब्लास्ट में गोटीबांध गांव के कुल छह मजदूरों की मौत घटना के दिन ही हो गई थी। दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए थे। रामू भारती उन्हीं घायलों में शामिल थे, जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ा। एक ही गांव से लगातार हो रही मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही चारों बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने की भी अपील की गई है। लोगों का कहना है कि बाहर काम करने गए मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और कंपनियों की जिम्मेदारी है। गोटी बांध गांव में सन्नाटा है।


