सफलता की राह में सैकड़ों कठिनाइयां आती हैं। परिस्थितियां बदलती रहती हैं और बाधाएं सामने आती हैं, लेकिन आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों और परिश्रम की भावना से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। चुनौतियों का सामना करने के लिए ज्ञान सबसे आवश्यक साधन है और शिक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत Thawar Chand Gehlot ने मंगलवार को गुलबर्गा विश्वविद्यालय के 43वे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि शिक्षा चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और बुद्धिमत्ता, संवेदनशीलता, नैतिकता तथा सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करती है। तेजी से बदलती दुनिया में ज्ञान के साथ कौशल, नवाचार और तकनीकी समझ भी आवश्यक है।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान करते हुए नवाचार, उद्यमिता, अनुसंधान और सामाजिक सेवा में सक्रिय भागीदारी की अपील की। साथ ही समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील रहने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध रहने और अपने ज्ञान का उपयोग मानवता की सेवा में करने का संदेश दिया।
तीन को मानद डॉक्टरेट
समारोह में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पूर्व मंत्री पी. जी. आर. सिंधिया, पूर्व मंत्री मुरुगेश निराणी और सामाजिक कार्यकर्ता केदारलिंगैया हिरेमठ को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।
स्वर्ण पदक एवं उपाधियां
समारोह में 77 विद्यार्थियों को कुल 172 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 58 छात्राएं और 19 छात्र शामिल हैं। 24 पदक स्नातक स्तर के टॉपर्स को तथा 148 पदक स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को दिए गए। इसके अलावा नौ स्वर्ण पदकों को नकद पुरस्कार में परिवर्तित कर 19 विद्यार्थियों (14 छात्राएं और 5 छात्र) को प्रदान किया गया।समारोह में कुल 19,133 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 15,504 स्नातक, 3,462 स्नातकोत्तर, 44 पीजी डिप्लोमा धारक और 123 पीएचडी शोधार्थी शामिल हैं। कुल उपाधि प्राप्तकर्ताओं में 10,463 पुरुष और 8,670 महिलाएं शामिल हैं।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम. सी. सुधाकर और कुलपति प्रो. शशिकांत एस. उडीकेरी उपस्थित थे।


