आपकी नसों में भी प्लाक/ब्लॉकेज! जानें क्या है? कैसे बनता है और कब बढ़ाता है हार्ट अटैक रिस्क?

आपकी नसों में भी प्लाक/ब्लॉकेज! जानें क्या है? कैसे बनता है और कब बढ़ाता है हार्ट अटैक रिस्क?

Healthy Heart Dil ka Sach Series part 6 : दिल की बीमारी या हार्ट अटैक को लेकर पिछले पार्ट्स में आप जान चुके हैं कि मेडिकल साइंस के मुताबिक ये कोई एक दिन में और अचानक होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि दशक बीतते आज पांव पसार चुकी है। जी हां हार्ट अटैक ऐसी ही घटना है, जिसकी शुरुआत वर्षों पहले ही हो चुकी है, लेकिन इसका पता आज चलता है, जब कुछ गंभीर हुआ है या हार्ट अटैक आया है। इसकी असली वजह है सूजन। आपके शरीर पर नजर आने वाली नसों में होने वाली सूजन। जो नसों को डैमेज करने लगती है और तब होती है प्लाक की शुरुआत। दिल का सच बताती पत्रिका की इस हेल्दी हार्ट सीरीज के पार्ट 6 में आज आप जानेंगे क्या होता है प्लाक, कैसे बनता है और दिल के लिए खतरा कब-कैसे बन जाता है…. पढ़ें संजना कुमार की खास रिपोर्ट…

Heart Attack real Cause if Inflammation
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लेकिन असली सवाल यह है कि यह प्लाक आखिर होता क्या है? यह किन चीजों से बना होता है? और क्या हर प्लाक एक जैसा होता है?

भोपाल एम्स कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विक्रम वाटी कहते हैं कि दिल की बीमारी को समझने के लिए इन सवालों का जवाब जानना बहुत जरूरी है।

नसों में जमा होने वाला चिपचिपा पदार्थ

जब डॉक्टर प्लाक की बात करते हैं, तो उनका मतलब किसी एक पदार्थ से नहीं होता, असल में यह कई अलग-अलग तत्वों से बना एक मिश्रण होता है, जो धीरे-धीरे नसों या रक्त वाहिकाओं की भीतरी दीवारों पर जमा होने लगता है।

भोपाल एम्स के डॉ. विक्रम वाटी इसका उदाहरण भी देते हैं और बताते हैं कि अगर किसी पाइपलाइन में कहीं दरार आ जाए तो उसे बंद करने के लिए आप गोंद या किसी सीलेंट का इस्तेमाल करते हैं। आपका शरीर भी कुछ इसी तरह काम करता है, जब रक्त वाहिका की अंदरूनी परत को लगातार बनी रहने वाली सूजन से नुकसान पहुंचने लगता है, तब आपका शरीर उसे ठीक करने की कोशिश करने लगता है। शरीर द्वारा नसों की मरम्मत की यह प्रक्रिया जब शुरु की जाती है, तो की तरह के पदार्थ वहां इकट्ठा होने लगते हैं। धीरे-धीरे जब यह जमाव ज्यादा होने लगता है तो यह प्लाक का रूप ले लेता है।

असली शुरुआत सूजन से ही

डॉ. विक्रम वाटी बताते हैं कि कई शोध और अध्ययनों से पता चलता है कि दिल की बीमारी की जड़ अक्सर क्रॉनिक सूजन यानी लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन होती है। जब शरीर में सूजन बढ़ती है, तो रक्तवाहिकाओं की भीतरी परत कमजोर होने लगती है। सूजन के कारण नसों या रक्तवाहिकाओं की तरह पर सूक्ष्म दरारें बन सकती हैं। छोटे-छोटे नुकसान हो सकते हैं। यही कारण है कि शरीर नसों की इन दरारों या छोटे-मोटे नुकसान की भरपाई के लिए काम करना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में इन नसों में खून में मौजूद कई पदार्थ जमा होने लगते हैं। यदि यह प्रक्रिया संतुलित रहे, तो शरीर नुकसान की भरपाई कर लेता है। लेकिन जब सूजन लगातार बनी रहती है, तो जमा होने वाले ये तत्व बढ़ते रहते हैं और प्लाक बढ़ता जाता है।

when Heart Attack Risk increased
when Heart Attack Risk increased(photo:AI)

प्लाक किन चीजों से मिलकर बनता है?

नसों में बनने वाला प्लाक कई अलग-अलग तत्वों से मिलकर बनता है। वहीं इन तत्वों की मात्रा ही यह तय करती है कि जो प्लाक बना वो कितना खतरनाक?

1-फैटी पदार्थ और कॉलेस्ट्रॉल

प्लाक के निर्माण में सबसे अहम योगदान लिपिड्स यानी फैटी पदार्थों का होता है। खासकर LDL कॉलेस्ट्रॉल के कण इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब LDL कण क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं में जमा होने लगते हैं, धीरे-धीरे वे एक मोटी परत बना सकते हैं।

2-कैल्शियम का जमाव

समय के साथ जब प्लाक पुराना होने लगता है, तो उसमें कैल्शियम जमा होने लगता है, इसी वजह से कई जांचों में कैल्शियम स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति के दिल की धमनियों में कैल्शियम ज्यादा मिलता है, तो यह संकेत होता है कि वहां प्लाक है।

3- प्रोटीन संरचना

फाइब्रिन और कोलेजन जैसे प्रोटीन प्लाक को एक ढांचा देते हैं। ये पदार्थ प्लाक को एक साथ बांधकर रखने का काम करते हैं, जिससे वह एक ठोस संरचना का रूप ले लेता है।

4- प्रतिरक्षा कोशिकाएं

प्लाक के अंदर शरीर की इम्यून सिस्टम कोशिकाएं भी होती हैं। इनमें मैक्रोफेज जैसी कोशिकाएं शामिल होती हैं, जो सूजन की प्रक्रिया में सक्रिय रहती हैं। ये कोशिकाएं खराब कोलेस्ट्रॉल को निगलने की कोशिश करती हैं, लेकिन कई बार खुद ही प्लाक का हिस्सा बन जाती हैं।

5- मृत कोशिकाओं के अवशेष

समय के साथ जब कोशिकाएं मरती हैं, तो उनके अवशेष भी प्लाक में जमा हो सकते हैं। इससे प्लाक का ढांचा और जटिल हो जाता है।

कैसे बनता है प्लाक का ढांचा

जब इन सभी पदार्थों का जमाव बढ़ता है, तो नसों की दीवारों के भीर एक तरह का थैला बन जाता है। इस थैले के अंदर फैट, प्रोटीन, कैल्शियम और कोशिकाओं के अवशेष जमा रहते हैं। यह थैला किस चीज से ज्यादा बना है, उसी आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि प्लाक किस प्रकार का है और कितना खतरनाक है?

यहां जानें प्लाक कितने प्रकार के

मेडिकल की भाषा में प्लाक को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, इनकी बनावट, स्थिरता अलग-अलग होती है वहीं खतरे का स्तर भी अलग होता है।

फाइब्रस प्लाक- शुरुआती लेकिन स्थिर

इस तरह का प्लाक मुख्य रूप से फाइब्रिन और कनेक्टिव टिश्यू से बना होता है। इसकी बाहरी परत अपेक्षाकृत मोटी और मजबूत होती है। इसी कारण इसे स्थिरता प्लाक माना जाता है। हालांकि यह आसानी से फटती नहीं है, लेकिन जिसका एक नुकसान है…जब यह धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है, तो नस की चौड़ाई कम होने लगती है। नतीजा यह होता है कि दिल तक जाने वाला खून कम हो सकता है। ऐसी स्थित में मरीज को अक्सर एंजाइना यानी सीने में दबाव या दर्द की शिकायत हो सकती है।

वल्नरेबल प्लाक- ये सबसे खतरनाक

यह प्लाक दिखने में छोटा हो सकता है, लेकिन गंभीर जोखिम के मामले में यह संबसे गंभीर और खतरनाक माना जाता है। इसमें अंदर की ओर फैटी पदार्थों का बड़ा हिस्सा होता है, जिसे पतली फाइब्रस परत ढंक लेती है। समस्या यह है कि यह बाहरी परत बेहद नाजुक होती है। अगर यह परत किसी कारणवश टूट जाए, तो प्लाक का अंदरूनी हिस्सा सीधे खून के संपर्क में आ सकता है। खून के संपर्क में आने पर तुरंत खून का थक्का बनने लगता है। अगर यह थक्का धमनियों को पूरी तरह बंद कर दे तो, दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचना बंद हो सकता है। यही स्थिति अचानक हार्ट अटैक का कारण बनती है।

कैल्सिफाइड प्लाक- सख्त लेकिन गंभीर हैं संकेत

जब प्लाक लंबे समय तक मौजूद रहता है, तो उसमें कैल्शियम जमा होने लगता है। वह बेहद कठोर हो जाता है। ऐसे प्लाक को कैल्सिफाइड प्लाक कहा जाता है। यह आमतौर पर प्लाक बनने की प्रक्रिया का उन्नत चरण माना जाता है। हालांकि इसका टूटना आसान नहीं, लेकिन इसकी मौजूदगी यह बताती है कि धमनियों में बीमरी काफी आगे तक बढ़ चुकी है। कई मामलों में यह प्लाक इतना बड़ा हो सकता है कि नस का रास्ता ही संकरा हो जाए और इसके कारण खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

क्या बताता है कैल्शियम स्कोर

दिल की धमनियों या नसों की जांच के लिए एक टेस्ट किया जाता है, जिसे कैल्शियम स्कोर टेस्ट कहते हैं। अगर स्कोर ज्यादा आता है, तो नसों में प्लाक का बोझ ज्यादा है। जितना ज्यादा प्लाक होगा, दिल की बीमारियों या हार्ट अटैक का खतरा भी उतना ही बढ़ सकता है।

हर प्लाक का खतरा एक जैसा नहीं

डॉ. विक्रम वाटी बताते हैं कि यह समझना जरूरी है कि हर प्लाक हार्ट अटैक (Heart Attack)का कारण नहीं बनता। कुछ प्लाक धीरे-धीरे बढ़ते हैं और सिर्फ नसों को संकरा करते हैं। इसी वजह से डॉक्टर सिर्फ ब्लॉकेज की मात्रा नहीं देखते, बल्कि प्लाक की प्रकृति को समझने की कोशिश करते हैं।

कैसे रोकी जा सकती है प्लाक बनने की प्रक्रिया

प्लाक बनने की शुरुआत अक्सर लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है। अगर सूजन को बढ़ाने वाले कारकों को नियंत्रित कर लिया जाए तो यह प्रक्रिया काफी हद तक धीमी की जा सकती है।

इसके लिए अहम हैं ये महत्वपूर्ण कदम

  • संतुलित और प्राकृतिक भोजन
  • चीनी और अत्यधिक प्रोस्स्ड फूड से दूरी
  • नियमित एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधि
  • पर्याप्त नींद
  • तनाव का नियंत्रण
  • समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच

नोट: इन उपायों से न सिर्फ प्लाक बनने की गति कम हो सकती है, बल्कि दिल की बीमारी का खतरा भी घट सकता है।

Dil ka sach series part 6 what is Plaque Healthy Diet Healthy Heart
Dil ka sach series part 6 what is Plaque Healthy Diet Healthy Heart(Graphic AI)

दिल की बीमारी को समझें कैसे

पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों की समझ काफी बदली है। पहले दिल की बीमारी सिर्फ कोलेस्ट्रॉल का नतीजा थी। लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि सूजन, जीवन शैली और इम्यून सिस्टम के साथ ही कई अन्य कारक मिलकर इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि दिल की बीमीरी रोकने के लिए सिर्फ दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय लाइफस्टाइल सुधारने पर भी जोर दिया जा रहा है।

अब आगे क्या?

दिल का सच सीरीज के पार्ट 6 में आज आपने जाना कि आखिर प्लाक क्या है, कैसे होती है प्लाक बनने की शुरुआत, कौन सा प्लाक खतरनाक और क्या करें कि प्लाक बने ही ना… यह जानकारी पढ़कर उम्मीद है कि आपको अच्छा लगा होगा। अब अगले अंक में हम जानेंगे हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार प्लाक या ब्लाकेज हो जाए तो हार्ट अटैक के खतरे को क्या टाला जा सकता है, अगर हां तो कैसे और नहीं तो क्यों नहीं… जानने लिए पढ़ते रहिए और जुड़े रहिए patrika.com के साथ... और हां.. कमेंट बॉक्स में बताना न भूलें कैसी लगी आपको हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार ‘प्लाक / ब्लॉकेज के बारे में ये विस्तृत जानकारी…

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