जमुई जिले के सदर अस्पताल में रसोई गैस के गंभीर संकट के बावजूद मरीजों के भोजन की व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। ‘जीविका रसोई’ से जुड़ी महिलाएं, जिन्हें जीविका दीदी के नाम से जाना जाता है, पारंपरिक लकड़ी और कोयले के चूल्हों का उपयोग करके मरीजों के लिए भोजन तैयार कर रही हैं। यह पहल जिले में पिछले एक महीने से जारी गैस आपूर्ति की कमी के बीच की गई है। जिले में बढ़ती गैस की कीमतें और आपूर्ति संकट आम जनजीवन के साथ-साथ अस्पतालों, होटलों और विभिन्न सरकारी योजनाओं को भी प्रभावित कर रहा है। सदर अस्पताल में संचालित ‘जीविका रसोई’ भी इस संकट से अछूती नहीं रही, जहां भर्ती मरीजों के लिए नियमित भोजन तैयार किया जाता है। गैस की अनुपलब्धता के कारण रसोई के संचालन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो गई थीं, जिससे मरीजों के भोजन पर संकट मंडरा रहा था। महिलाओं ने वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं ने वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई। बसंती देवी, सीमा देवी, गुड़िया देवी, मीरा देवी, पुतुल देवी, संजू देवी सहित अन्य जीविका दीदियों ने पारंपरिक चूल्हों का सहारा लिया। उन्होंने लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना शुरू किया, ताकि मरीजों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जा सके। जीविका दीदियों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। गैस की कमी के कारण 15 मार्च से 18 मार्च तक तीन दिनों के लिए रसोई को बंद रखना पड़ा था। इसके बाद, लकड़ी और कोयले पर बड़ी मात्रा में भोजन तैयार करना और उसे समय पर मरीजों तक पहुंचाना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। सैकड़ों मरीजों के लिए बनता है खाना हालांकि, उन्होंने इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया है और अब रोजाना चूल्हे पर खाना बनाकर मरीजों तक पहुंचा रही हैं। इस रसोई में आधा दर्जन से अधिक महिलाएं मिलकर कार्य कर रही हैं और हर दिन सैकड़ों मरीजों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार किया जा रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि मरीजों के स्वास्थ्य पर कोई असर न पड़े। अस्पताल प्रशासन ने भी जीविका दीदियों के इस प्रयास की सराहना की है। स्थानीय स्तर पर दिखा असर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर थनीश कुमार ने बताया कि वैश्विक स्तर पर गैस और तेल आपूर्ति में आई बाधाओं का असर स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में जीविका दीदियों द्वारा पारंपरिक तरीके से रसोई संचालन करना न केवल सराहनीय है, बल्कि प्रेरणादायक भी है। उन्होंने कहा कि यह पहल दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इच्छाशक्ति और समर्पण से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। जीविका समूह की यह कार्यशैली अन्य संस्थानों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। गैस आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग गौरतलब है कि सदर अस्पताल में प्रतिदिन गर्भवती महिलाएं के अलावे बड़ी संख्या में मरीज भर्ती होते हैं, जिनके लिए भोजन की नियमित व्यवस्था बेहद आवश्यक होती है। ऐसे में ‘जीविका रसोई’ का सुचारू संचालन मरीजों के लिए राहत का कारण बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने भी जीविका दीदियों के इस जज्बे की सराहना की है और प्रशासन से गैस आपूर्ति व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त करने की मांग की है। कुल मिलाकर, गैस संकट के इस दौर में जीविका दीदियों ने जिस समर्पण और आत्मनिर्भरता का परिचय दिया है, वह समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है। जमुई जिले के सदर अस्पताल में रसोई गैस के गंभीर संकट के बावजूद मरीजों के भोजन की व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। ‘जीविका रसोई’ से जुड़ी महिलाएं, जिन्हें जीविका दीदी के नाम से जाना जाता है, पारंपरिक लकड़ी और कोयले के चूल्हों का उपयोग करके मरीजों के लिए भोजन तैयार कर रही हैं। यह पहल जिले में पिछले एक महीने से जारी गैस आपूर्ति की कमी के बीच की गई है। जिले में बढ़ती गैस की कीमतें और आपूर्ति संकट आम जनजीवन के साथ-साथ अस्पतालों, होटलों और विभिन्न सरकारी योजनाओं को भी प्रभावित कर रहा है। सदर अस्पताल में संचालित ‘जीविका रसोई’ भी इस संकट से अछूती नहीं रही, जहां भर्ती मरीजों के लिए नियमित भोजन तैयार किया जाता है। गैस की अनुपलब्धता के कारण रसोई के संचालन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो गई थीं, जिससे मरीजों के भोजन पर संकट मंडरा रहा था। महिलाओं ने वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं ने वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई। बसंती देवी, सीमा देवी, गुड़िया देवी, मीरा देवी, पुतुल देवी, संजू देवी सहित अन्य जीविका दीदियों ने पारंपरिक चूल्हों का सहारा लिया। उन्होंने लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना शुरू किया, ताकि मरीजों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जा सके। जीविका दीदियों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। गैस की कमी के कारण 15 मार्च से 18 मार्च तक तीन दिनों के लिए रसोई को बंद रखना पड़ा था। इसके बाद, लकड़ी और कोयले पर बड़ी मात्रा में भोजन तैयार करना और उसे समय पर मरीजों तक पहुंचाना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। सैकड़ों मरीजों के लिए बनता है खाना हालांकि, उन्होंने इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया है और अब रोजाना चूल्हे पर खाना बनाकर मरीजों तक पहुंचा रही हैं। इस रसोई में आधा दर्जन से अधिक महिलाएं मिलकर कार्य कर रही हैं और हर दिन सैकड़ों मरीजों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार किया जा रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि मरीजों के स्वास्थ्य पर कोई असर न पड़े। अस्पताल प्रशासन ने भी जीविका दीदियों के इस प्रयास की सराहना की है। स्थानीय स्तर पर दिखा असर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर थनीश कुमार ने बताया कि वैश्विक स्तर पर गैस और तेल आपूर्ति में आई बाधाओं का असर स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में जीविका दीदियों द्वारा पारंपरिक तरीके से रसोई संचालन करना न केवल सराहनीय है, बल्कि प्रेरणादायक भी है। उन्होंने कहा कि यह पहल दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इच्छाशक्ति और समर्पण से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। जीविका समूह की यह कार्यशैली अन्य संस्थानों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। गैस आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग गौरतलब है कि सदर अस्पताल में प्रतिदिन गर्भवती महिलाएं के अलावे बड़ी संख्या में मरीज भर्ती होते हैं, जिनके लिए भोजन की नियमित व्यवस्था बेहद आवश्यक होती है। ऐसे में ‘जीविका रसोई’ का सुचारू संचालन मरीजों के लिए राहत का कारण बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने भी जीविका दीदियों के इस जज्बे की सराहना की है और प्रशासन से गैस आपूर्ति व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त करने की मांग की है। कुल मिलाकर, गैस संकट के इस दौर में जीविका दीदियों ने जिस समर्पण और आत्मनिर्भरता का परिचय दिया है, वह समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है।


