किशनगंज की प्रधान शिक्षिका निधि चौधरी होंगी सम्मानित:बिहार दिवस पर शिक्षा, साहित्य और सामाजिक योगदान का सम्मान; लड़कियों को पढ़ाई के लिए किया प्रेरित

किशनगंज की प्रधान शिक्षिका निधि चौधरी होंगी सम्मानित:बिहार दिवस पर शिक्षा, साहित्य और सामाजिक योगदान का सम्मान; लड़कियों को पढ़ाई के लिए किया प्रेरित

बिहार दिवस के अवसर पर किशनगंज जिले की प्रधान शिक्षिका कुमारी निधि चौधरी को सम्मानित किया जाएगा। उन्हें शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया जाएगा, जिसमें सम्मान राशि भी शामिल है। यह सम्मान बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत को मजबूत करने वाली विभूतियों को प्रोत्साहन देने का प्रतीक है। BPSC से चयनित है शिक्षिका कुमारी निधि चौधरी बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा चयनित प्रधान शिक्षिका हैं। वर्तमान में वह किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय बिरनाबाड़ी में कार्यरत हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों के माध्यम से बच्चों को निपुण बनाने का अभूतपूर्व कार्य किया है। उनके प्रयासों से भूमिहीन और भवनहीन स्कूलों को संसाधन-संपन्न बनाया गया, जिससे दूर-दराज के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकी। प्रतिभाशाली लेखिका भी हैं निधि चौधरी निधि चौधरी न केवल एक कुशल शिक्षिका हैं, बल्कि एक प्रतिभाशाली लेखिका भी हैं। उन्होंने एक उपन्यास और एक बाल कथा संग्रह सहित कुल दस पुस्तकें लिखी हैं। उनके साहित्यिक और शैक्षणिक योगदान को भारत बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिला है। उन्होंने “निपुण बालमंच कोना” और “निपुण बालमंच पत्रिका” की शुरुआत की, जिसे बिहार शिक्षा विभाग ने अपनाया और राज्य स्तर पर लागू किया। ये पहल बच्चों की रचनात्मकता और भाषा कौशल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुई हैं। लड़कियों को पढ़ाई के लिए किया प्रेरित उनके सामाजिक कार्य भी सराहनीय हैं। बाल विवाह के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाकर उन्होंने बेटियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा है। उनके प्रयासों से कई लड़कियां स्कूल छोड़कर घरेलू कामों में लगने से बचीं और शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनीं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों को पहले भी कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2024 में उन्हें राजकीय शिक्षक सम्मान मिला, और राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान भी प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, उन्हें नेपाल और बांग्लादेश से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है। बिहार शिक्षा विभाग की पुस्तक ‘छोटे कदम बड़े बदलाव’ में उनकी प्रेरणादायक संघर्ष गाथा को स्थान दिया गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बनेगा प्रेरणा स्रोत बिहार दिवस पर निधि का यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे बिहार के शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। उनकी सफलता साबित करती है कि समर्पण और नवाचार से कोई भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। बिहार सरकार द्वारा ऐसे योगदानकर्ताओं का सम्मान राज्य की प्रगति की दिशा में एक मजबूत कदम है। बिहार दिवस के अवसर पर किशनगंज जिले की प्रधान शिक्षिका कुमारी निधि चौधरी को सम्मानित किया जाएगा। उन्हें शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया जाएगा, जिसमें सम्मान राशि भी शामिल है। यह सम्मान बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत को मजबूत करने वाली विभूतियों को प्रोत्साहन देने का प्रतीक है। BPSC से चयनित है शिक्षिका कुमारी निधि चौधरी बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा चयनित प्रधान शिक्षिका हैं। वर्तमान में वह किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय बिरनाबाड़ी में कार्यरत हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों के माध्यम से बच्चों को निपुण बनाने का अभूतपूर्व कार्य किया है। उनके प्रयासों से भूमिहीन और भवनहीन स्कूलों को संसाधन-संपन्न बनाया गया, जिससे दूर-दराज के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकी। प्रतिभाशाली लेखिका भी हैं निधि चौधरी निधि चौधरी न केवल एक कुशल शिक्षिका हैं, बल्कि एक प्रतिभाशाली लेखिका भी हैं। उन्होंने एक उपन्यास और एक बाल कथा संग्रह सहित कुल दस पुस्तकें लिखी हैं। उनके साहित्यिक और शैक्षणिक योगदान को भारत बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिला है। उन्होंने “निपुण बालमंच कोना” और “निपुण बालमंच पत्रिका” की शुरुआत की, जिसे बिहार शिक्षा विभाग ने अपनाया और राज्य स्तर पर लागू किया। ये पहल बच्चों की रचनात्मकता और भाषा कौशल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुई हैं। लड़कियों को पढ़ाई के लिए किया प्रेरित उनके सामाजिक कार्य भी सराहनीय हैं। बाल विवाह के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाकर उन्होंने बेटियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा है। उनके प्रयासों से कई लड़कियां स्कूल छोड़कर घरेलू कामों में लगने से बचीं और शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनीं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों को पहले भी कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2024 में उन्हें राजकीय शिक्षक सम्मान मिला, और राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान भी प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, उन्हें नेपाल और बांग्लादेश से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है। बिहार शिक्षा विभाग की पुस्तक ‘छोटे कदम बड़े बदलाव’ में उनकी प्रेरणादायक संघर्ष गाथा को स्थान दिया गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बनेगा प्रेरणा स्रोत बिहार दिवस पर निधि का यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे बिहार के शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। उनकी सफलता साबित करती है कि समर्पण और नवाचार से कोई भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। बिहार सरकार द्वारा ऐसे योगदानकर्ताओं का सम्मान राज्य की प्रगति की दिशा में एक मजबूत कदम है।  

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