किशनगंज में 36वां जिला स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। मुख्य समारोह का आयोजन स्थानीय असफाक उल्लाह खान स्टेडियम में किया गया। सांसद डॉ. जावेद आजाद और जिलाधिकारी विशाल राज सहित अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर और गुब्बारे उड़ाकर इसका विधिवत उद्घाटन किया। पहले दिन विकास मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किशनगंज को वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय जगन्नाथ मिश्रा ने जिले का दर्जा दिया था।दो दिवसीय समारोह के पहले दिन विकास मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जिनका अवलोकन अतिथियों ने किया। दोपहर में विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन कार्यक्रमों को दर्शकों ने सराहा।संध्या के समय बॉलीवुड कलाकारों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इस अवसर पर विधायक कमरूल हुदा, नगर परिषद अध्यक्ष इंद्रदेव पासवान, अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार सहित कई अन्य अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। आइए जाने कैसे बना और बदला किशनगंज… किशनगंज को जिला बनाए 36 वर्ष पूरे हो गए। इन 36 सालों में शहर में बहुत कुछ बदल गया है। कालांतर में यह इलाका कभी कृष्ण कुंज के नाम से जाना जाता था। महाभारत काल की कई घटनाएं आज भी जिले के विभिन्न हिस्सों में संरक्षित हैं। डेगेन फ्रूट की खेती के लिए बिहार में मिली अपनी पहचान चायपत्ती, धान, पाट, अदरक और मक्का, डेगेन फ्रूट की खेती के लिए किशनगंज पूरे बिहार में अपनी अलग पहचान रखता है। जिला मुख्यालय लगभग 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य, स्वच्छता, भरपूर वर्षा और सुहावना मौसम किशनगंज को अन्य जिलों से अलग बनाते हैं। 14 जनवरी 1990 को किशनगंज को अलग जिला घोषित किया था। आज किशनगंज जिला अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 36 वसंत बीत जाने के बाद भी पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले इस जिले ने अपनी अलग पहचान बनाने में सफलता प्राप्त की है। नेपाल और बांग्लादेश से सटा होने के कारण सामरिक महत्व
तीनों ओर से पश्चिम बंगाल की सीमाओं के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश से सटा होने के कारण सामरिक दृष्टि से भी किशनगंज का विशेष महत्व है। पूर्व में कृष्ण कुंज तथा आलमगंज के नाम से जाना जाने वाला किशनगंज पूर्णिया जिले का मात्र एक अनुमंडल था। लेकिन किशनगंज नाम का भी एक रोचक इतिहास है। उस समय यहां खगड़ा नवाब मो. फकीरूद्दीन का शासन था। इसी दौरान एक साधु यहाँ आए। हरी-भरी वादियों को देखकर उन्होंने कुछ देर विश्राम करने का निर्णय लिया। लेकिन शहर के बीच बहने वाली नदी का नाम रमजान और शासक का नाम फकीरूद्दीन देखकर उन्होंने अपनी मंशा बदल दी। जब साधु के लौटने की खबर नवाब को मिली, तो उन्होंने शहर का नाम बदलकर कृष्ण कुंज कर दिया, जो आज किशनगंज के नाम से प्रसिद्ध है। 20 लाख से अधिक की आबादी, 7 प्रखंड में फेला है जिला 1884 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जिले की जनसंख्या 20 लाख से अधिक है। जिले में कुल 7 प्रखंड हैं। बहादुरगंज, दिघलबैंक, किशनगंज, कोचाधामन, पोठिया, ठाकुरगंज और टेढ़ागाछ। जबकि केवल एक अनुमंडल किशनगंज है। यहाँ 72% आबादी मुस्लिम, 27% हिंदू और मात्र 1% अन्य है, फिर भी आपसी भाईचारे की मिसाल सिर्फ प्रदेश और देश ही नहीं, बल्कि विश्व भर में मशहूर है। पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार होने के कारण जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। रमजान नदी, ऐतिहासिक खगड़ा मेला भीम वालिस, कच्चूदह झील, बड़ीजान, बेणुगढ़ आदि पौराणिक स्थल विकास की प्रतीक्षा में हैं। किशनगंज में 36वां जिला स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। मुख्य समारोह का आयोजन स्थानीय असफाक उल्लाह खान स्टेडियम में किया गया। सांसद डॉ. जावेद आजाद और जिलाधिकारी विशाल राज सहित अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर और गुब्बारे उड़ाकर इसका विधिवत उद्घाटन किया। पहले दिन विकास मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किशनगंज को वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय जगन्नाथ मिश्रा ने जिले का दर्जा दिया था।दो दिवसीय समारोह के पहले दिन विकास मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जिनका अवलोकन अतिथियों ने किया। दोपहर में विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन कार्यक्रमों को दर्शकों ने सराहा।संध्या के समय बॉलीवुड कलाकारों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इस अवसर पर विधायक कमरूल हुदा, नगर परिषद अध्यक्ष इंद्रदेव पासवान, अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार सहित कई अन्य अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। आइए जाने कैसे बना और बदला किशनगंज… किशनगंज को जिला बनाए 36 वर्ष पूरे हो गए। इन 36 सालों में शहर में बहुत कुछ बदल गया है। कालांतर में यह इलाका कभी कृष्ण कुंज के नाम से जाना जाता था। महाभारत काल की कई घटनाएं आज भी जिले के विभिन्न हिस्सों में संरक्षित हैं। डेगेन फ्रूट की खेती के लिए बिहार में मिली अपनी पहचान चायपत्ती, धान, पाट, अदरक और मक्का, डेगेन फ्रूट की खेती के लिए किशनगंज पूरे बिहार में अपनी अलग पहचान रखता है। जिला मुख्यालय लगभग 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य, स्वच्छता, भरपूर वर्षा और सुहावना मौसम किशनगंज को अन्य जिलों से अलग बनाते हैं। 14 जनवरी 1990 को किशनगंज को अलग जिला घोषित किया था। आज किशनगंज जिला अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 36 वसंत बीत जाने के बाद भी पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले इस जिले ने अपनी अलग पहचान बनाने में सफलता प्राप्त की है। नेपाल और बांग्लादेश से सटा होने के कारण सामरिक महत्व
तीनों ओर से पश्चिम बंगाल की सीमाओं के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश से सटा होने के कारण सामरिक दृष्टि से भी किशनगंज का विशेष महत्व है। पूर्व में कृष्ण कुंज तथा आलमगंज के नाम से जाना जाने वाला किशनगंज पूर्णिया जिले का मात्र एक अनुमंडल था। लेकिन किशनगंज नाम का भी एक रोचक इतिहास है। उस समय यहां खगड़ा नवाब मो. फकीरूद्दीन का शासन था। इसी दौरान एक साधु यहाँ आए। हरी-भरी वादियों को देखकर उन्होंने कुछ देर विश्राम करने का निर्णय लिया। लेकिन शहर के बीच बहने वाली नदी का नाम रमजान और शासक का नाम फकीरूद्दीन देखकर उन्होंने अपनी मंशा बदल दी। जब साधु के लौटने की खबर नवाब को मिली, तो उन्होंने शहर का नाम बदलकर कृष्ण कुंज कर दिया, जो आज किशनगंज के नाम से प्रसिद्ध है। 20 लाख से अधिक की आबादी, 7 प्रखंड में फेला है जिला 1884 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जिले की जनसंख्या 20 लाख से अधिक है। जिले में कुल 7 प्रखंड हैं। बहादुरगंज, दिघलबैंक, किशनगंज, कोचाधामन, पोठिया, ठाकुरगंज और टेढ़ागाछ। जबकि केवल एक अनुमंडल किशनगंज है। यहाँ 72% आबादी मुस्लिम, 27% हिंदू और मात्र 1% अन्य है, फिर भी आपसी भाईचारे की मिसाल सिर्फ प्रदेश और देश ही नहीं, बल्कि विश्व भर में मशहूर है। पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार होने के कारण जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। रमजान नदी, ऐतिहासिक खगड़ा मेला भीम वालिस, कच्चूदह झील, बड़ीजान, बेणुगढ़ आदि पौराणिक स्थल विकास की प्रतीक्षा में हैं।


