Kiradu Temple : बाड़मेर जिले का प्राचीन किराडू मंदिर राजस्थान की स्थापत्य कला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का अनमोल खजाना है। 11वीं सदी में निर्मित यह मंदिर समूह आज भी अपनी भव्यता, बारीक नक्काशी और रहस्यमयी कथाओं की वजह से यात्रियों को आकर्षित करता है।
मंदिर तक कैसे पहुंचे
किराडू मंदिर बाड़मेर मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बाड़मेर से गडरारोड़ मार्ग पर आगे बढ़ते ही यह ऐतिहासिक स्थल सामने आता है। बाड़मेर शहर से टैक्सी, निजी वाहन और लोकल बसों के माध्यम से आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है।
निर्माण और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
किराडू मंदिरों का निर्माण 11 वीं-12वीं सदी के दौरान परमार वंश के शासनकाल में हुआ माना जाता है। यह क्षेत्र उसी समय पश्चिमी राजस्थान में कला, संस्कृति और व्यापार का मजबूत केंद्र था।
मंदिर समूह में मुख्य रूप से पांच मंदिर थे, जिनमें सोमेश्वर मंदिर सबसे प्रमुख है। इसकी शिल्पकला खजुराहो शैली से मिलती-जुलती होने के कारण इसे राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है।
स्थापत्य और कलात्मक विशेषताएं
किराडू मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है इसकी अद्भुत नक्काशी। स्तंभों, गर्भगृह और मंडप पर की गई बारीक कारीगरी और सुंदरता का उत्कृष्ट उदाहरण है। पाषाण से बने देव-देवियों के चित्रण, नृत्य करती अप्सराएं, किन्नर और अन्य अलंकरण आज भी अपने समय की उच्च शिल्पकला का प्रमाण देते हैं।
पत्थरों पर की गई उत्कीर्ण कलाकृतियां सूर्य की रोशनी में विशेष चमक बिखेरती हैं, जो इसे और भी मनमोहक बनाती है।


