कानपुर में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किडनी ट्रांसप्लांट के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया। सोमवार देर रात टीम ने शहर के 3 बड़े अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की। जिसमें ICU में भर्ती डोनर और रिसीवर मिले। डोनर से 60 लाख रुपए में किडनी का सौदा किया गया, लेकिन महज 9.50 लाख दिए गए। इसके बाद उत्तराखंड के युवक से विवाद हुआ, तो मामला खुला। पुलिस ने मंगलवार सुबह तक सिंडीकेट में शामिल दलाल, डॉक्टर समेत 10 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया। किडनी बेचने वाले MBA स्टूडेंट ने पूछताछ में बताया कि शिवम उर्फ काड़ा ने उसे फंसाकर किडनी बिकवा दी और रुपए भी नहीं दिए। जांच में जुटी पुलिस और मेडिकल टीम को अब तक 12 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट के साक्ष्य मिले हैं। यह नेटवर्क कानपुर, लखनऊ से लेकर दिल्ली, मुंबई, नेपाल, पश्चिम बंगाल के कोलकाता समेत कई राज्यों से जुड़ा हुआ है। किडनी स्टोन व गॉलब्लेडर ऑपरेशन के नाम पर चल रहा था ट्रांसप्लांट का खेल एक IPS अफसर ने बताया कि कल्याणपुर के अहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा था। यहां पर बिहार के समस्तीपुर के रहने डोनर आयुष को 10 लाख में किडनी का सौदा करके लाया गया था। मुजफ्फर नगर की किडनी पेशेंट पारुल तोमर के किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी। पारुल को 60 से 90 लाख रुपए में किडनी बेची गई थी। हालांकि अभी इसकी रकम साफ नहीं हो सकी है। इधर आयुष को कम पैसे मिलने पर बात बिगड़ गई तो मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। मामला बिगड़ता देख अहूजा हॉस्पिटल के संचालक ने किडनी डोनेट करने वाले आयुष को मेड लाइफ हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया। जबकि किडनी रिसीवर पारुल तोमर को कल्याणपुर के ही प्रिया हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया। पुलिस मामले की जांच पड़ताल करते हुए डोनर और रिसवर दोनों तक पहुंच गई। प्राथमिक जांच में किडनी ट्रांसप्लांट से संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं दिखा सके। इतना ही नहीं जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि किडनी के स्टोन व गॉलब्लेडर का ऑपरेशन कराने के नाम पर दोनों को एडमिट किया गया था। इसकी आड़ में अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट किया जा रहा था। दोनों अस्पताल में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस की निगरानी में आयुष का इलाज चल रहा है, जबकि आयुष की हालत बिगड़ने पर उसे मेड लाइफ हॉस्पिटल से पुलिस ने हैलट में रेफर करा दिया। दोनों का इलाज पुलिस की निगरानी में चल रहा है। पुलिस की टीमें पूछताछ के आधार पर देर रात तक कानपुर के कल्याणपुर के साथ ही कानपुर साउथ सिटी के कई इलाकों में छापेमारी करती रही। शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा मास्टर माइंड निकला पुलिस का कहना है कि कल्याणपुर के आवास विकास तीन में बने एक आपर्टमेंट में शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा ने आयुष को पैसों का लालच देकर बिहार से कानपुर बुलवाया। उनके बीच बातचीत में एक मरीज को किडनी बेचने की बात तय हुई। शिवम ने आयुष को 10 लाख रुपए दिलाने का वादा किया। दोनों का रावतपुर के एक नामी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। किडनी डोनेट करने के बाद आयुष को महज 9.50 लाख दिए गए, तो विवाद हो गया। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद कानपुर में चल रहे अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट तक पुलिस पहुंच गई और परते उधड़ने लगीं। टेलीग्राम के ग्रुप से MBA स्टूडेंट को फंसाया पुलिस की जांच में सामने आया कि शातिर और किडनी ट्रांसप्लांट कराने का मास्टर माइंड शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा ने आयुष को एक टेलीग्राम ग्रुप के जरिए फंसाया था। आयुष मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है, लेकिन मौजूदा समय में मेरठ में रहता है। आयुष ने अस्पताल में लेटे-लेटे कंबल के अंदर से पुलिस के सवालों का जवाब देता रहा। उसने बताया- एक टेलीग्राम ग्रुप पर उसने जरूरतमंद बनकर उसे अपने झांसे में लिया था, इसके बाद दोनों की मोबाइल से बात हुई और फिर कानपुर में आकर डील तय हुई थी। डील फाइनल होने के बाद उसने अपनी एक किडनी बेच दी और रुपए पूरे नहीं मिलने पर विवाद हुआ। बहन बनाकर किया था किडनी डोनेट जांच में सामने आया कि पारुल को बहन बताकर आयुष को डोनर बनाया गया था, लेकिन कोई भी लीगल डॉक्यूमेंट तैयार नहीं किए गए थे। पूछताछ में आयुष ने पहले तो बताया कि पारुल उसकी बहन है, लेकिन सख्ती करने पर उसने सच्चाई बयां कर दी। 3 हॉस्पिटल संचालकों से चल रही पूछताछ
टीम ने कल्याणपुर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, रावतपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल और पनकी रोड के प्रिया हॉस्पिटल में ताबड़तोड़ छापेमारी की। जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और एक सक्रिय दलाल शिवम अग्रवाल उर्फ ‘काना’ समेत 10 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। एसीएमओ बोले…किडनी अवैध ट्रांसप्लांट का जल्द होगा खुलासा जांच टीम में शामिल एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया- कल्याणपुर के अस्पतालों में अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट का इनपुट मिला था। पुलिस, विजलेंस और डॉक्टर की संयुक्त टीमों ने छापेमारी की तो किडनी ट्रांसप्लांट की बात सही पाई गई है। टीमें लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही हैं। अस्पतालों को नोटिस जारी, जल्द लाइसेंस होगा निरस्त एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि कल्याणपुर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, रावतपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल और पनकी रोड के प्रिया हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया गया है। इन तीनों अस्पतालों से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीज यहां कैसे पहुंचे…? समेत 10 सवालों के जवाब पूछे गए हैं। अस्पतालों के जवाब मिलने के बाद तीनों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ————————–
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