Kidney Health : अक्सर मूत्र रोगों से बचने के लिए एक सामान्य सी सलाह डॉक्टर से लेकर आम आदमी तक देता है – “खूब पानी पियो”। अधिकतर लोग किडनी को हेल्दी रखने के लिए, पथरी आदि ना हो इसके लिए जमकर पानी पीते हैं। पर, क्या ये वाकई काम करता है। द लैंसेट में प्रकाशित शोध “Prevention of Urinary Stones with Hydration” के अनुसार, ये बात पूरी तरह से सही नहीं। इसमें ये भी साफ तौर पर पता चली कि ये कितना कारगर है।
किडनी स्टोन और पानी : क्या सिर्फ ज्यादा पानी पीना काफी है?
किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) का दर्द दुनिया के सबसे असहनीय दर्दों में से एक माना जाता है। इससे जूझने वाले मरीजों की संख्या भी कम नहीं। यह अध्ययन ‘यूरिनरी स्टोन डिजीज रिसर्च नेटवर्क’ द्वारा किया गया। इसमें 1,600 से अधिक वयस्कों और किशोरों को शामिल किया गया, जिन्हें पहले पथरी की समस्या रह चुकी थी। वैज्ञानिकों का लक्ष्य यह देखना था कि लोगों को कितना पानी पिलाया जा सकता है कि उनकी पथरी दोबारा न बने।

पथरी के मरीजों पर हाई-टेक तरीके का इस्तेमाल
अध्ययन में शामिल लोगों को केवल “पानी पियो” कहकर नहीं छोड़ा गया, बल्कि उन्हें आधुनिक सुविधाएं दी गईं। स्मार्ट वॉटर बॉटल जो ब्लूटूथ से जुड़ी बोतलें जो ट्रैक करती थीं कि व्यक्ति ने कितना पानी पिया। हर व्यक्ति के लिए यूरिन आउटपुट का लक्ष्य (कम से कम 2.5 लीटर प्रतिदिन) तय किया गया।
हैरान करने वाले नतीजे आए सामने
दो साल तक चले इस कड़े प्रयास के बाद जो नतीजे सामने आए, उन्होंने शोधकर्ताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। इससे ये साफ हो गया कि हाइड्रेशन तो बढ़ा, पर पथरी नहीं रुकी। तकनीक और इनाम की मदद से लोगों ने पहले के मुकाबले थोड़ा ज्यादा पानी पीना शुरू किया और उनके यूरिन की मात्रा भी बढ़ी। लेकिन, पानी पीने में यह बढ़ोतरी इतनी पर्याप्त नहीं थी कि पथरी दोबारा बनने की दर को काफी हद तक कम कर सके।
जिन लोगों को विशेष सहायता दी गई और जिन्हें सामान्य सलाह दी गई, दोनों समूहों में पथरी दोबारा होने का खतरा लगभग एक जैसा ही दिखा।
क्यों मुश्किल है व्यवहार बदलना?
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के डॉ. जोनाथन हार्पर और डॉ. अलाना देसाई के अनुसार, यह अध्ययन बताता है कि किडनी स्टोन से बचने के लिए जितना पानी (दिन भर में करीब 3-4 लीटर) पीना जरूरी है, उसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना बहुत चुनौतीपूर्ण है। दफ्तर का काम, भागदौड़ भरी जिंदगी और बार-बार टॉयलेट जाने की मजबूरी जैसे कारण लोगों को पर्याप्त हाइड्रेशन से रोकते हैं।
विशेषज्ञ अभी भी मानते हैं कि हाइड्रेशन ही बचाव का मुख्य रास्ता है। इसके साथ यह रिसर्च यह बता रही है कि हर मरीज के लिए एक जैसा नियम काम नहीं करता। सिर्फ “पानी पियो” कहना काफी नहीं है, बल्कि यह समझना जरूरी है कि मरीज ऐसा क्यों नहीं कर पा रहा है।


