खानदेशी कुलदेवी का सात दिवसीय महोत्सव:विधिविधान से माता को लेकर आए श्रद्धालु, जयकारों से हुआ स्वागत

खानदेशी कुलदेवी का सात दिवसीय महोत्सव:विधिविधान से माता को लेकर आए श्रद्धालु, जयकारों से हुआ स्वागत

बड़वानी जिले के पानसेमल नगर के समीप ओसवाड़ा गांव में महाराष्ट्र की कुलदेवी आइसाहेब कानबाई माता का सात दिवसीय भव्य उत्सव मनाया जा रहा है। शनिवार को माता का महाराष्ट्र के मालेगांव अंबासन से आगमन हुआ। गांव के जितेंद्र माली ने बताया कि किसान देविदास माली के पुत्र भूषण माली बचपन से ही कानबाई माता की भक्ति में लीन थे। भूषण की गहरी भक्ति देखकर माता-पिता ने महाराष्ट्र के लामकनी स्थित कानबाई माता के भगत देवा महाराज को इसकी जानकारी दी। देवा भगत ने बताया कि भूषण माली पर कानबाई माता की असीम कृपा है और उनमें दैवीय गुणों का समावेश है। माता उनके घर में स्थापित होना चाहती हैं। भगत के निर्देश पर देविदास माली ने अपने घर में कानबाई माता को स्थापित करने के लिए गांव में भव्य उत्सव का आयोजन किया, जिसमें ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिला। सात दिवसीय उत्सव की शुरुआत भगवा ध्वज के रोपण से हुई। इसके बाद घर में लगी फर्शियों को हटाकर मिट्टी की खुदाई की गई। ग्रामीणों ने कुएं से पानी लाकर मिट्टी पर छिड़काव किया और भूमि पूजन के बाद घर को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया। यहीं से कानबाई माता के दिव्य उत्सव की शुरुआत हुई। कानबाई माता की स्थापना के लिए विधि-विधान से अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। स्थापना स्थल पर मिट्टी में कुमकुम का छिड़काव किया गया। पानसेमल से कुम्हार, मांग और सुतार के घरों से खापर, मटका, मिट्टी का तवा एवं समस्त मिट्टी के घरेलू सामान लाए गए। इसके बाद दरवाजा खोला गया। श्रद्धालुओं ने बताया कि दरवाजा खोलने पर कुमकुम पर कानबाई माता के पैरों के चिन्ह चमत्कारिक रूप से दिखाई दिए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने माता के जयकारे लगाते हुए भजन-कीर्तन और नृत्य किया। शुक्रवार सुबह 6 बजे समी के पेड़ के नीचे से कस्तूरी नामक मिट्टी लाई गई, जिस पर विधि-विधान से हवन किया गया। हवन की अग्नि भगत देवा महाराज ने सूर्य की किरणों द्वारा प्रज्वलित की।
दोपहर में महाप्रसादी के पश्चात 3:00 बजे समीप मतराला गांव से दिलीप सुतार के द्वारा चंदन व आम की लकड़ी से बनाई गई माता की मूर्ति लाई गई जिसमें शीश मालेगांव के चंदनपुरी से लाकर लगाया गया।

पश्चात बड़े ही धूमधाम के साथ भूषण माली के घर कानबाई माता की स्थापना की गई। स्थापना करने के पूर्व माता का प्रिय भोग रोट पूरनपोली के लिए पांच क्विंटल गेहूं गांव के 50 घट्टीयों पर पिसा गया। जिसके आटे द्वारा शनिवार को पूरन पोली खीर के व्यंजन बनाए जाएंगे व माता को भोग लगाकर प्रसादी वितरित किया गया। शनिवार को महाराष्ट्र के मालेगांव अंबासन से स्त्रियां गवरनी रूप में गांव में आगमन किया गया। जिनका गांव भ्रमण कराया। शनिवार शाम को बैलगाड़ी से आम के पत्तों को ढोल बाजे के साथ लाकर माता स्थापना परिसर को पूर्वजों की परंपरा अनुसार सजाया जाएगा। रविवार को कानबाई माता का थाट भरा जाएगा व गवर्नियों को भोजन करा उनके मनपसंद उपहार भेंट किए जाएंगे फिर उन्हें विदाई दी जाएगी। शाम को कानबाई माता का लगन लगाकर सामूहिक विवाह भी संपन्न कराए जाएंगे । सामूहिक विवाह में समाज में संदेश प्रसारित होगा की महंगी शादी ना करते हुए धार्मिक रूप से आयोजन कर परिवार को आर्थिक मजबूती मिले। सोमवार को सुबह माता को मंडप में लाकर माता के गीत गाते हुए विसर्जन चल समारोह आयोजित होगा। पश्चात सात दिवसीय संपूर्ण कानबाई माता उत्सव का समापन किया जाएगा ।

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