कौआकोल सीओ-राजस्व अधिकारी हड़ताल पर:अंचल कार्यालय बंद, DCLR पदनाम बदलने से नाराज

कौआकोल सीओ-राजस्व अधिकारी हड़ताल पर:अंचल कार्यालय बंद, DCLR पदनाम बदलने से नाराज

नवादा जिले के कौआकोल अंचल कार्यालय में सीओ मनीष कुमार और राजस्व अधिकारी अनीश कुमार के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से कामकाज ठप हो गया है। संघ के आह्वान पर शुरू हुई इस हड़ताल के कारण अंचल कार्यालय में सन्नाटा पसरा है और ताला लटका हुआ है। हड़ताल के चलते दाखिल-खारिज सहित विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र जारी करने का काम पूरी तरह रुक गया है। इससे आम लोगों की परेशानी बढ़नी तय है, क्योंकि उन्हें आवश्यक सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सीओ मनीष कुमार ने बताया कि वे 29 जनवरी को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में डीसीएलआर पद से संबंधित लिए गए निर्णय के विरोध में हड़ताल पर हैं। उनके अनुसार, यह निर्णय उनके संवर्ग के हित में नहीं है और इससे उनकी पदोन्नति की संभावनाएं खतरे में पड़ गई हैं। राजस्व अधिकारियों का मानना है कि पहले राजस्व अधिकारी ही पदोन्नत होकर डीसीएलआर और एडीएम बनते थे। लेकिन, अब एक नया पद बनाए जाने से उनकी पदोन्नति की संभावनाएं समाप्त हो सकती हैं। सीओ का कहना है कि कैबिनेट के इन निर्णयों से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति मार्ग और कार्यक्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह निर्णय न केवल बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010 की भावना के विपरीत है, बल्कि माननीय पटना उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों की भी अनदेखी करता है। दाखिल-खारिज, जमाबंदी अद्यतन, म्यूटेशन अपील और भूमि विवाद निपटारे जैसे मामलों में पहले से ही कार्यभार अधिक है, ऐसे में सेवा शर्तों में अस्थिरता कर्मचारियों का मनोबल गिरा रही है। मंत्रिपरिषद के निर्णय संख्या 23 के तहत भूमि सुधार उप समाहर्ता पदनाम में बदलाव किया गया है, और निर्णय संख्या 30 के तहत बिहार प्रशासनिक सेवा संवर्ग में 101 नए पदों का सृजन किया गया है। दरअसल, पिछली मंत्रिपरिषद की बैठक में डीसीएलआर के पद को बदलकर अनुमंडल राजस्व अधिकारी कर दिया गया है। इन फैसलों से राजस्व सेवा के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है, जिससे राजस्व संवर्ग के अधिकारियों में खासी नाराजगी है। नवादा जिले के कौआकोल अंचल कार्यालय में सीओ मनीष कुमार और राजस्व अधिकारी अनीश कुमार के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से कामकाज ठप हो गया है। संघ के आह्वान पर शुरू हुई इस हड़ताल के कारण अंचल कार्यालय में सन्नाटा पसरा है और ताला लटका हुआ है। हड़ताल के चलते दाखिल-खारिज सहित विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र जारी करने का काम पूरी तरह रुक गया है। इससे आम लोगों की परेशानी बढ़नी तय है, क्योंकि उन्हें आवश्यक सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सीओ मनीष कुमार ने बताया कि वे 29 जनवरी को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में डीसीएलआर पद से संबंधित लिए गए निर्णय के विरोध में हड़ताल पर हैं। उनके अनुसार, यह निर्णय उनके संवर्ग के हित में नहीं है और इससे उनकी पदोन्नति की संभावनाएं खतरे में पड़ गई हैं। राजस्व अधिकारियों का मानना है कि पहले राजस्व अधिकारी ही पदोन्नत होकर डीसीएलआर और एडीएम बनते थे। लेकिन, अब एक नया पद बनाए जाने से उनकी पदोन्नति की संभावनाएं समाप्त हो सकती हैं। सीओ का कहना है कि कैबिनेट के इन निर्णयों से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति मार्ग और कार्यक्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह निर्णय न केवल बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010 की भावना के विपरीत है, बल्कि माननीय पटना उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों की भी अनदेखी करता है। दाखिल-खारिज, जमाबंदी अद्यतन, म्यूटेशन अपील और भूमि विवाद निपटारे जैसे मामलों में पहले से ही कार्यभार अधिक है, ऐसे में सेवा शर्तों में अस्थिरता कर्मचारियों का मनोबल गिरा रही है। मंत्रिपरिषद के निर्णय संख्या 23 के तहत भूमि सुधार उप समाहर्ता पदनाम में बदलाव किया गया है, और निर्णय संख्या 30 के तहत बिहार प्रशासनिक सेवा संवर्ग में 101 नए पदों का सृजन किया गया है। दरअसल, पिछली मंत्रिपरिषद की बैठक में डीसीएलआर के पद को बदलकर अनुमंडल राजस्व अधिकारी कर दिया गया है। इन फैसलों से राजस्व सेवा के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है, जिससे राजस्व संवर्ग के अधिकारियों में खासी नाराजगी है।  

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