Kattu Ka Aata: व्रत के दौरान कट्टू का आटा का इस्तेमाल कई घरों में आम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ परिस्थितियों में यह आटा आपकी सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है? सही समय और तरीके से इसका सेवन करना बहुत जरूरी है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि कब और कैसेकट्टू का आटा खतरनाक हो सकता है, और किन लोगों को इसे खाने से बचना चाहिए।
कुट्टू क्या होता है?
कुट्टू को अक्सर चावल या गेहूं समझ लिया जाता है, जबकि यह एक छद्म अनाज (Pseudo grain) है। यह मुख्य रूप से ठंडे और पहाड़ी इलाकों में उगता है। इसका वैज्ञानिक नाम Fagopyrum esculentum है।कुट्टू में प्रोटीन, फाइबर और कुछ जरूरी मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, इसी वजह से इसे व्रत में खाया जाता है। हालांकि, इसमें नमी जल्दी पकड़ने की क्षमता होती है, जिससे यह खराब भी जल्दी हो सकता है।
कब खतरनाक बन जाता है कुट्टू का आटा?
कुट्टू का आटा बीमारियों की सबसे बड़ी वजह बन सकता है, खासकर अगर यह पुराना, एक्सपायर्ड, या गलत तरीके से स्टोर किया गया हो, या फिर इसमें मिलावट की गई हो। अगर आटे में नमी चली जाए, तो इसमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं। यही कारण है कि कई बार व्रत के दौरान लोग फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त या पेट दर्द जैसी शिकायतों का सामना करते हैं।
कितने समय तक स्टोर करना सुरक्षित है?
कुट्टू के आटे को ज्यादा समय तक संभालकर रखना ठीक नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, कुट्टू का आटा अधिकतम 5–6 महीने तक ही सुरक्षित रहता है, और इससे ज्यादा समय तक रखा गया आटा खाने से बचना चाहिए। बेहतर यही है कि कुट्टू को साबुत खरीदकर घर में ही जरूरत के अनुसार पिसवाएं और उसे एयरटाइट डिब्बे में रखें, ताकि इसकी ताजगी और गुणवत्ता बनी रहे।
कुट्टू का आटा खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं?
- पेट की दिक्कतें – ज्यादा फाइबर होने के कारण गैस, सूजन, अपच या पेट दर्द हो सकता है।
- एलर्जी की संभावना – कुछ लोगों को स्किन रैशेज, उलझन, सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
- ब्लड प्रेशर पर असर -अगर आटे में नमक या सोडियम की मिलावट हो, तो बीपी प्रभावित हो सकता है।
- पोषण असंतुलन – सिर्फ कुट्टू पर निर्भर रहने से शरीर को जरूरी विटामिन्स और अन्य पोषक तत्व कम मिल सकते हैं।
- किडनी पर असर -इसमें मौजूद फॉस्फोरस ज्यादा मात्रा में लेने से किडनी की परेशानी बढ़ सकती है।
- ब्लड शुगर गिरना – कुट्टू ब्लड शुगर लेवल को तेजी से कम कर सकता है, इसलिए डायबिटीज के मरीज सीमित मात्रा में ही लें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


