‘माउंट अकोंकागुआ (Mount Aconcagua) दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना में एंडीज पर्वतमाला में स्थित सबसे ऊंची चोटी है। यहां हवा बहुत तेज होती है। 16 किलो वजन का सूट पहनने के बाद भी 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार वाली हवा मुझे उडाकर ले गयी। मेरी आंखों के सामने अंधेरा छ गया था। मै कुछ नीचे आकर गिरी और चोट भी लगी पर अब सुकून है कि मैंने 6961 मीटर की एशिया के बाहर दुनिया ऊंची चोटी को फतह कर लिया।’ ये कहना है वाराणसी की पर्वातारोही गुंजन अग्रवाल का; जो 49 साल की उम्र में पहाड़ों को छोटा कर उनपर आसानी से ट्रेकिंग कर रही हैं। हमने पूछा- घर में आपको पहाड़ पर चढ़ने से कोई रोकता तो नहीं? आप 49 साल की हैं। गुंजन ने कहा – बस मेरे पति हर बार पूछ लेते हैं कि अब टास्क पूरा हो गया न। आगे कोई और टास्क तो नहीं? मगर फिर मैं प्रैक्टिस में लग जाती हूं, जिसमें मेरे फिटनेस कोच हीरा सिंह का योगदान रहता है। यह बातचीत उस बेकरी पर हो रही थी, जो गुंजन चलाती हैं। इसके अलावा उनकी फ्लॉवर शॉप भी है। वह कस्टमर डील करने के लिए कुछ देर के लिए बातचीत को रोक देती हैं। फ्री होने के बाद वह हमारे साथ बैठीं। उन्होंने पर्वतारोही बनने की कहानी दैनिक भास्कर से साझा की…
सवाल : माउंट एल्ब्रुस के बाद माउंट अकोंकागुआ को क्यों चुना ? जवाब : कोरोना काल के समय मैंने अपनी फिटनेस को लेकर दौड़ना शुरू किया। जिसमें मेरे फिटनेस कोच हीरा सिंह ने मुझे हमेशा सलाह दी और हर चीजें सिखाई। उन्ही के कहने और सिखाने पर मैंने पर्वतारोही बनने की शुरुआत की। पहले किताबों से जानकारी ली। इसके बाद शुरू किया और जिस एल्ब्रुस पर्वत को हिटलर भी क्रास नहीं कर सका था। उसे क्रास किया। फिर एक साल की मेहनत और लगन के बाद इसी 21 जनवरी को दुनिया के पश्चिमी गोलार्ध के सबसे ऊंचे बिंदु माउंट अकोंकागुआ को फतह कर लिया। सवाल : कब शुरू की अकोंकागुआ पर चढ़ाई और कितना समय लगा? जवाब : हमने जब शुरू किया और कैंप नंबर तीन पर पहुंचे तो वहां से फिर हमें कोई कैंप नहीं मिलना था। वहां से सीधे टॉप पर जाना था बिना रुके। ऐसे में 11 जनवरी से शुरू हुआ सफर कैंप नंबर तीन पर आकर रुक गया। यहां हमने कुछ घंटे बिताए और 8 घंटे में लगातार बिना रुके 21 जनवरी को 6961 मीटर को फतह कर उसपर भारत का झंडा लहरा दिया। यह फतह बाबा विश्वनाथ को समर्पित है। सवाल : अकोंकागुआ को फतह करने में क्या दिक्कतें आईं ? जवाब : पर्वतारोहण करने में हमेशा से दिक्कतें आती हैं। दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वतमाला में मृत ज्वालामुखी पर्वत है अकोंकागुआ; यह अपनी तेज हवाओं और खड़ी चढ़ाई के लिए मशहूर है। अकोंकागुआ को चढ़ते समय एक वक्त ऐसा भी आया की मुझे हवा उड़ाकर ले गयी। मै गिरी और मेरे पैरों में चोट लगी पर मेरे ट्रैकर ने मुझे उठाया। हमने थोड़ी देर आराम किया और उसके बाद फिर चढ़ाई शुरू कर दी। पुरुषों के ट्रेकिंग टूर में मै अकेली महिला थी। बाथरूम की भी दिक्कत थी पर फिर जो हुआ वो सबको पता है। सवाल : क्या अब एवरेस्ट फतह करने के लिए एलिजिबल हो गई हैं ? जवाब : दुनिया में यदि आप 7000 मीटर की ऊंचाई को फतह कर लेते हैं। तो आप माउंट एवरेस्ट पर ट्रेकिंग करने के लिए एलिजिबल हो जाएंगे। दक्षिण अमेरिका की माउंट अकोंकागुआ; जो की 6,961 मीटर है। इसे फतह करने के बाद आप दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को ट्रेक करने के लिए एलिजिबल हो जाते हैं। मै भी हो गयी हूं लेकिन अभी माउंट एवरेस्ट का इरादा नहीं है। क्योंकि खर्च बहुत ज्यादा है। साथ ही साथ अब परिवार और अपने पुराने इवेंट मैराथन पर ध्यान देना है। सवाल : आप बिजनेस करती आ रही हैं, पर्वतारोही कैसे बन गईं? जवाब : कोरोना काल में मुझे कोविड हुआ। उसके बाद डॉक्टर की सलाह पर मैं वर्क आउट और योगा करना शुरू किया। इसके लिए BLW के मैदान पर जाती थी। इस दौरान वहां के फुटबाल के असिस्टेंट कोच और फिटनेस कोच हीरा सिंह सर से मुलाकात हुई। उन्होंने मेरा वर्कआउट देखा तो मुझे पर्वतारोहण की तरफ जाने की सलाह दी। सवाल : कौन-कौन से पहाड़ पर आप गईं हैं? जवाब : सबसे पहले कश्मीर में सोनमर्ग, फिर लद्दाख में कांग्यांसेन-2 पर 6250 मीटर तक चढ़ाई की। इसके बाद मैंने माउंट एल्ब्रुस पर चढ़ने की तैयारी शुरू की। 24 अगस्त 2024 को रूस पहुंची थी। यहां माउंट एल्ब्रुस के पास पहुंचकर वहां के सर्द वातावरण में रही। हमने 30 अगस्त 2024 की रात 12 बजे चढ़ाई शुरू की। सुबह 6.30 बजे माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर पहुंचे। वहां भारत का तिरंगा लहरा दिया। इसके बाद 11 जनवरी को हम दक्षिणी अमेरिका के अर्जेंटीना पहुंचे और 21 जनवरी की सुबह में माउंट अकोंकागुआ फतह कर लिया। हम 10 मिनट रुके और फिर नीचे की तरफ उतर गए। सवाल : आगे क्या लक्ष्य है ? क्या एवरेस्ट फतह करेंगी ? जवाब : अभी कुछ दिन ब्रेक करना है। अकोंकागुआ को फतह करने के बाद अब हम माउंट एवरेस्ट को फतह करने के लिए एलिजिबल हो गए हैं। पर अभी हमें कुछ दिन रुकना है। एज फैक्टर भी है। आप जितनी ऊपर जाओगे सांस लेने में उतनी दिक्कत होती है। ऐसे में अभी मुझे मैराथन की तरफ फोकस करना है। अब मैराथन के इवेंट्स में हिस्सा लूंगी अपने कोच हीरा सिंह के निर्देश में।
गुंजन के फिटनेस कोच से भी हमने बात की… हीरा सिंह बोले – 49 की उम्र में वह बहुत एक्टिव हैं
BLW में असिस्टेंट फुटबाल और फिटनेस कोच हीरा सिंह ने कहा- गुंजन को जब मैंने पहली बार देखा तब उनके अंदर गजब का जुनून था। मैंने उनसे पूछा कि क्या आप पर्वतारोही बनेगी, तब उन्होंने कई दिनों तक मुझसे इसकी बारीकियों को समझा। फिर हां कर दी। वह रोजाना सुबह 5 बजे ग्राउंड पर पहुंच जाती हैं। अपनी प्रैक्टिस जरूर करती हैं। उसके बाद उन्हें घर के काम और शाप भी देखनी होती है। 49 की एज में वो काफी एक्टिव और जोश से भरी हुई हैं। हीरा बताते हैं – वो रोजाना अपना ट्रैकिंग किट लेकर प्रैक्टिस करती हैं। क्योंकि यह 16 किलो वजन का होता। इसमें अकेले शूज ही साढ़े 4 किलो के होते हैं।


